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पुरानी हवाई पट्टी को ही विस्तार देकर शुरू होगी हवाई उड़ान
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पुरानी हवाई पट्टी को ही विस्तार देकर उड़ान शुरू करने की योजना
हवाई पट्टी की सीध में आ रही है वन विभाग से ली गई 12 हेक्टेयर जमीन
डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने एएआई को नक्शे सहित भेजी इसकी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। हवाई उड़ान के लिए नई हवाई पट्टी निर्माण की कवायद नहीं होगी। मौजूदा रनवे के सामने ही वन विभाग की जमीन है, जिस पर रनवे का विस्तार किया जा सकता है। इस सुझाव पर अमल होने से गगोल तीर्थ आदि की जमीन का अधिग्रहण होने से बचेगा। वहीं पराग दुग्ध संघ के निर्माण पर भी आंशिक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में हवाई उड़ान की कवायद में खर्च कम आने की बात कही जा रही है।
डा. भीमराव आंबेडकर हवाई पट्टी को क्षेत्रीय उड़ान योजना के तहत हवाई अड्डे के रूप में तब्दील किया जायेगा। केंद्र सरकार की क्षेत्रीय हवाई उड़ान योजना के तहत मेरठ से लखनऊ और प्रयागराज तक की उड़ान को स्वीकृति मिल चुकी है और जूम एयरवेज को उड़ान शुरू करनी है। शुरुआती दौर में ही मेरठ से 72 सीटर विमान की उड़ान का मसौदा तैयार किया जा रहा है। उसी के अनुरूप रनवे बनाने पर फोकस है।
एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया, नागरिक उड्डयन निदेशालय उत्तर प्रदेश और जूम एयरवेज के अधिकारियों ने तीन अप्रैल को डा. भीमराव आंबेडकर हवाई पट्टी का निरीक्षण किया था। तब नागरिक उड्डयन विभाग ने जिला प्रशासन से 406 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की मांग की थी। इस दौरान हवाई अड्डा निर्माण के लिए लगभग 643 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया। निरीक्षण में जो सबसे बड़ा पेंच फंसा था, वह हवाई पट्टी के विस्तारीकरण के साथ आने वाले निर्माणों को लेकर था। टीम ने हवाई पट्टी की स्थानीय स्तर पर देखरेख करने वाले अधिकारियाें से वार्ता के बाद कहा था कि रनवे का दोबारा निर्माण कराया जायेगा, जिसके लिए गगोल तीर्थ तक जगह लेने के साथ ही पराग दुग्ध प्लांट के भवन को भी गिराने की बात कही थी। लेकिन जब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने वर्तमान रनवे को ठीक बताते हुए थोड़ी ही मरम्मत से चालू होने की बात कहते हुए रनवे की सीध में आगे की जमीन का हवाला दिया तो टीम ने विचार करने की बात कही। डा. वाजपेयी के अनुसार रनवे की सीध में आगे की तरफ वन विभाग की 12 हेक्टेयर जमीन है, जिसका अधिग्रहण हवाई अड्डे के लिए हो चुका है। इसलिए इस दिशा में रनवे को बढ़ाना उचित रहेगा। उन्होंने टीम को इससे अवगत कराने के साथ अलग से भी एएआई को नक्शे सहित इसकी रिपोर्ट भेजी है। वाजपेयी का कहना है कि इस संबंध में मई के प्रथम सप्ताह में दिल्ली जाकर व्यक्तिगत रूप से भी बात करूंगा।
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वर्तमान में ये है हवाई पट्टी की स्थिति
वर्तमान में रनवे की लंबाई 1513 मीटर और चौड़ाई 23 मीटर है, जिसे 2600 मीटर लंबाई के साथ 45 मीटर चौड़ा करने की तैयारी है। हालांकि पहले इसकी लंबाई 1800 मीटर तक करने की योजना थी, लेकिन अब सीधे 2600 मीटर करने पर विचार चल रहा है।
चुनाव बाद जमीन भुगतान की चलेगी प्रक्रिया
किसानों से जो जमीन लेने पर समझौता हुआ है, वह आचार संहिता के चलते अटका हुआ है। आचार संहिता हटते ही इस काम में तेजी लाई जाएगी। जमीन पर कब्जा लेकर उसे एएआई के हैंडओवर करने के साथ हवाई अड्डा निर्माण पर काम शुरू हो जायेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर 2019 तक उड़ान शुरू हो सकती है।
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हवाई पट्टी की सीध में आ रही है वन विभाग से ली गई 12 हेक्टेयर जमीन
डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने एएआई को नक्शे सहित भेजी इसकी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। हवाई उड़ान के लिए नई हवाई पट्टी निर्माण की कवायद नहीं होगी। मौजूदा रनवे के सामने ही वन विभाग की जमीन है, जिस पर रनवे का विस्तार किया जा सकता है। इस सुझाव पर अमल होने से गगोल तीर्थ आदि की जमीन का अधिग्रहण होने से बचेगा। वहीं पराग दुग्ध संघ के निर्माण पर भी आंशिक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में हवाई उड़ान की कवायद में खर्च कम आने की बात कही जा रही है।
डा. भीमराव आंबेडकर हवाई पट्टी को क्षेत्रीय उड़ान योजना के तहत हवाई अड्डे के रूप में तब्दील किया जायेगा। केंद्र सरकार की क्षेत्रीय हवाई उड़ान योजना के तहत मेरठ से लखनऊ और प्रयागराज तक की उड़ान को स्वीकृति मिल चुकी है और जूम एयरवेज को उड़ान शुरू करनी है। शुरुआती दौर में ही मेरठ से 72 सीटर विमान की उड़ान का मसौदा तैयार किया जा रहा है। उसी के अनुरूप रनवे बनाने पर फोकस है।
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एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया, नागरिक उड्डयन निदेशालय उत्तर प्रदेश और जूम एयरवेज के अधिकारियों ने तीन अप्रैल को डा. भीमराव आंबेडकर हवाई पट्टी का निरीक्षण किया था। तब नागरिक उड्डयन विभाग ने जिला प्रशासन से 406 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की मांग की थी। इस दौरान हवाई अड्डा निर्माण के लिए लगभग 643 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया। निरीक्षण में जो सबसे बड़ा पेंच फंसा था, वह हवाई पट्टी के विस्तारीकरण के साथ आने वाले निर्माणों को लेकर था। टीम ने हवाई पट्टी की स्थानीय स्तर पर देखरेख करने वाले अधिकारियाें से वार्ता के बाद कहा था कि रनवे का दोबारा निर्माण कराया जायेगा, जिसके लिए गगोल तीर्थ तक जगह लेने के साथ ही पराग दुग्ध प्लांट के भवन को भी गिराने की बात कही थी। लेकिन जब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने वर्तमान रनवे को ठीक बताते हुए थोड़ी ही मरम्मत से चालू होने की बात कहते हुए रनवे की सीध में आगे की जमीन का हवाला दिया तो टीम ने विचार करने की बात कही। डा. वाजपेयी के अनुसार रनवे की सीध में आगे की तरफ वन विभाग की 12 हेक्टेयर जमीन है, जिसका अधिग्रहण हवाई अड्डे के लिए हो चुका है। इसलिए इस दिशा में रनवे को बढ़ाना उचित रहेगा। उन्होंने टीम को इससे अवगत कराने के साथ अलग से भी एएआई को नक्शे सहित इसकी रिपोर्ट भेजी है। वाजपेयी का कहना है कि इस संबंध में मई के प्रथम सप्ताह में दिल्ली जाकर व्यक्तिगत रूप से भी बात करूंगा।
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वर्तमान में ये है हवाई पट्टी की स्थिति
वर्तमान में रनवे की लंबाई 1513 मीटर और चौड़ाई 23 मीटर है, जिसे 2600 मीटर लंबाई के साथ 45 मीटर चौड़ा करने की तैयारी है। हालांकि पहले इसकी लंबाई 1800 मीटर तक करने की योजना थी, लेकिन अब सीधे 2600 मीटर करने पर विचार चल रहा है।
चुनाव बाद जमीन भुगतान की चलेगी प्रक्रिया
किसानों से जो जमीन लेने पर समझौता हुआ है, वह आचार संहिता के चलते अटका हुआ है। आचार संहिता हटते ही इस काम में तेजी लाई जाएगी। जमीन पर कब्जा लेकर उसे एएआई के हैंडओवर करने के साथ हवाई अड्डा निर्माण पर काम शुरू हो जायेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर 2019 तक उड़ान शुरू हो सकती है।