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न कुते पकड़े गए और न डेयरियां हुई शहर से बाहर
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न कुत्ते पकड़े गए और न शहर से डेयरी हुई बाहर
- अब हाईकोर्ट हुआ सख्त, 15 मार्च को नगरायुक्त हाईकोर्ट तलब
- चार जनवरी के आदेश में मांगा था न्यायालय ने कार्यवाही का ब्यौरा
मेरठ। शहर में डेयरियों से निकलने वाले गोबर और सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों से जनता परेशान हैं। मामला नगर निगम की बोर्ड बैठक तक ही सीमित नहीं रहा है बल्कि हाईकोर्ट तक पहुंच गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 15 मार्च को न्यायालय में नगरायुक्त को तलब किया है। निगम प्रशासन की तरफ से न्यायालय में अब तक अपना पक्ष नहीं रखा गया है।
महानगर में 700 से अधिक डेयरियां हैं। जिनमें हजारों पशु पलते हैं। पशुओं का गोबर शहर से बाहर जाने की बजाय सबमर्सिबल के पानी से नालों में बहाया जाता है। जिसके कारण शहर के सभी नाले चोक हैं। आए दिन शहर की गलियों में जलभराव रहता है। पूरा शहर गंदगी से भरा पड़ा है। इसी गंदगी के कारण स्वच्छता सर्वेक्षण में मेरठ नगर निगम की बार बार किरकिरी हो रही है। लोकल स्तर पर सुनवाई न होने के बाद जनता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। लोकेश खुराना के अनुसार दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने निगम को जमकर फटकार लगाई हैं। जनवरी माह में न्यायालय ने नगर निगम प्रशासन को एक माह का समय इसलिए दिया था कि वह शहर से डेयरियों को बाहर करने के लिए कैटिल कॉलोनी की व्यवस्था करें। कुत्तों को पकड़कर कार्रवाई की जाए। इसकी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करनी थी, लेकिन निगम ने ऐसा नहीं किया। शुक्रवार को हाईकोर्ट न्यायालय ने सुनवाई करते हुए आगामी 15 मार्च को नगरायुक्त को न्यायालय में तलब किया है।
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- अब हाईकोर्ट हुआ सख्त, 15 मार्च को नगरायुक्त हाईकोर्ट तलब
- चार जनवरी के आदेश में मांगा था न्यायालय ने कार्यवाही का ब्यौरा
मेरठ। शहर में डेयरियों से निकलने वाले गोबर और सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों से जनता परेशान हैं। मामला नगर निगम की बोर्ड बैठक तक ही सीमित नहीं रहा है बल्कि हाईकोर्ट तक पहुंच गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 15 मार्च को न्यायालय में नगरायुक्त को तलब किया है। निगम प्रशासन की तरफ से न्यायालय में अब तक अपना पक्ष नहीं रखा गया है।
महानगर में 700 से अधिक डेयरियां हैं। जिनमें हजारों पशु पलते हैं। पशुओं का गोबर शहर से बाहर जाने की बजाय सबमर्सिबल के पानी से नालों में बहाया जाता है। जिसके कारण शहर के सभी नाले चोक हैं। आए दिन शहर की गलियों में जलभराव रहता है। पूरा शहर गंदगी से भरा पड़ा है। इसी गंदगी के कारण स्वच्छता सर्वेक्षण में मेरठ नगर निगम की बार बार किरकिरी हो रही है। लोकल स्तर पर सुनवाई न होने के बाद जनता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
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आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। लोकेश खुराना के अनुसार दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने निगम को जमकर फटकार लगाई हैं। जनवरी माह में न्यायालय ने नगर निगम प्रशासन को एक माह का समय इसलिए दिया था कि वह शहर से डेयरियों को बाहर करने के लिए कैटिल कॉलोनी की व्यवस्था करें। कुत्तों को पकड़कर कार्रवाई की जाए। इसकी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करनी थी, लेकिन निगम ने ऐसा नहीं किया। शुक्रवार को हाईकोर्ट न्यायालय ने सुनवाई करते हुए आगामी 15 मार्च को नगरायुक्त को न्यायालय में तलब किया है।
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