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आउट सोर्स कर्मचारियों के वेतन लायक भी नहीं निगम की आय
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कहां से हो विकास, फूटी कौड़ी नहीं पास
आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों के वेतन के बराबर भी नहीं नगर निगम की आय
सालभर में कुल हाउस टैक्स 25 करोड़, सफाई कर्मियों का वेतन 42 करोड़
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। नगर निगम शहर में विकास कार्य कराने के तमाम दावे करता है, लेकिन वह कभी धरातल पर नहीं दिखाई देंगे। वजह नगर निगम आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। निगम प्रशासन आय के साधन तलाशने की बजाय खर्च बढ़ाने पर अधिक काम कर रहा है। नगर निगम के खजाने की स्थिति इतनी खराब है कि जितना राजस्व निगम को मिलता है, उससे कहीं ज्यादा आउट सोर्सिंग पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होता है। कुल मिलाकर विकास के लिए निगम खजाने में फूटी कौड़ी भी नहीं है।
आय के सीमित हैं साधन
नगर निगम के पास हाउस टैक्स, पानी टैक्स और होर्डिंग आय के बड़े स्रोत हैं। तीनों स्रोतों से पूरे साल में 25 से 28 करोड़ रुपये की आय होती है। नगर निगम की आय को निगम बोर्ड फंड के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि नगर निगम को दुकानों से भी किराए के रूप में आय होती है।
शहर के विकास के लिए होता है बोर्ड फंड
निगम बोर्ड फंड से पार्षदों के प्रस्ताव पर शहर में विकास कार्य होता है। वहीं आउट सोर्सिंग पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों के वेतन पर 42 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। अगर शासन आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों के वेतन की धनराशि देने से इंकार कर दे तो बोर्ड फंड की स्थिति बेहद खराब हो जाएगी।
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ठेकेदारों ने किया टेंडर बहिष्कार
नगर निगम का खजाना खाली है। इस कारण शहर के विकास के लिए निकाले गए 102 टेंडरों का ठेकेदारों ने विरोध कर दिया है। खाली खजाने का मामला नगर निगम की बोर्ड बैठक में भी गूंजा था। साथ ही अधिकारियों से कम आय का कारण पूछा था। पार्षदों ने निगम की आय के स्रोत बढ़ाने के प्रस्ताव पास किए थे। अब देखना है कि निगम प्रशासन पर कितना असर होता है।
31 मार्च तक होगी राजस्व वसूली
वित्तीय वर्ष खत्म होने में दो माह भी नहीं बचे हैं। अभी तक कम राजस्व वसूली के कारण नगर निगम का खजाना खाली है। अब 50 दिन में निगम के कर्मचारी कैसे राजस्व का लक्ष्य पूरा करेंगे। हालांकि नगरायुक्त मनोज चौहान का कहना है कि राजस्व बढ़ाने के लिए टैक्स विभाग के अफसरों को निर्देश जारी किए गए हैं। किराए पर गाड़ी ली जा रही हैं। ताकि बकाएदारों के प्रतिष्ठानों पर पहुंचकर वसूली की जा सके।
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आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों के वेतन के बराबर भी नहीं नगर निगम की आय
सालभर में कुल हाउस टैक्स 25 करोड़, सफाई कर्मियों का वेतन 42 करोड़
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। नगर निगम शहर में विकास कार्य कराने के तमाम दावे करता है, लेकिन वह कभी धरातल पर नहीं दिखाई देंगे। वजह नगर निगम आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। निगम प्रशासन आय के साधन तलाशने की बजाय खर्च बढ़ाने पर अधिक काम कर रहा है। नगर निगम के खजाने की स्थिति इतनी खराब है कि जितना राजस्व निगम को मिलता है, उससे कहीं ज्यादा आउट सोर्सिंग पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होता है। कुल मिलाकर विकास के लिए निगम खजाने में फूटी कौड़ी भी नहीं है।
आय के सीमित हैं साधन
नगर निगम के पास हाउस टैक्स, पानी टैक्स और होर्डिंग आय के बड़े स्रोत हैं। तीनों स्रोतों से पूरे साल में 25 से 28 करोड़ रुपये की आय होती है। नगर निगम की आय को निगम बोर्ड फंड के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि नगर निगम को दुकानों से भी किराए के रूप में आय होती है।
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शहर के विकास के लिए होता है बोर्ड फंड
निगम बोर्ड फंड से पार्षदों के प्रस्ताव पर शहर में विकास कार्य होता है। वहीं आउट सोर्सिंग पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों के वेतन पर 42 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। अगर शासन आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों के वेतन की धनराशि देने से इंकार कर दे तो बोर्ड फंड की स्थिति बेहद खराब हो जाएगी।
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ठेकेदारों ने किया टेंडर बहिष्कार
नगर निगम का खजाना खाली है। इस कारण शहर के विकास के लिए निकाले गए 102 टेंडरों का ठेकेदारों ने विरोध कर दिया है। खाली खजाने का मामला नगर निगम की बोर्ड बैठक में भी गूंजा था। साथ ही अधिकारियों से कम आय का कारण पूछा था। पार्षदों ने निगम की आय के स्रोत बढ़ाने के प्रस्ताव पास किए थे। अब देखना है कि निगम प्रशासन पर कितना असर होता है।
31 मार्च तक होगी राजस्व वसूली
वित्तीय वर्ष खत्म होने में दो माह भी नहीं बचे हैं। अभी तक कम राजस्व वसूली के कारण नगर निगम का खजाना खाली है। अब 50 दिन में निगम के कर्मचारी कैसे राजस्व का लक्ष्य पूरा करेंगे। हालांकि नगरायुक्त मनोज चौहान का कहना है कि राजस्व बढ़ाने के लिए टैक्स विभाग के अफसरों को निर्देश जारी किए गए हैं। किराए पर गाड़ी ली जा रही हैं। ताकि बकाएदारों के प्रतिष्ठानों पर पहुंचकर वसूली की जा सके।