{"_id":"5c1c0257bdec2256a47cbbbf","slug":"101545339479-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कम पर्चियां मिलने के बाद किसानो की परेशानी बढ रही। सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ भी कम पर्चियां किसानो को भेज रही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कम पर्चियां मिलने के बाद किसानो की परेशानी बढ रही। सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ भी कम पर्चियां किसानो को भेज रही
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अमर उजाला ब्यूरो
माछरा/मुंडाली। नंगलामल चीनी मिल चलने के बाद किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चीनी मिल कम इंडेंट भेजने के कारण सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ भी कम पर्चियां किसानों को भेज रही है। ऐसे में किसान का गन्ना खेतों में खड़ा है और गेहूं की बुवाई पिछड़ने की समस्या उत्पन्न हो रही है।
सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ से किसान नाखुश हैं। उनका कहना है कि किसानों को गन्ना पर्चियां कम दी जा रही हैं तथा जो भी पर्चियां काटी जा रही हैं उन्हें गांव में पहुंचाने की भी उचित व्यवस्था नहीं है। एक आदमी ही गन्ना पर्ची लेकर जाता है और एक ही जगह रख देता है। जिसमें किसानों की गन्ना पर्चियां गुम हो जाती हैं। उन्हे समिति कार्यालय जाने पर पता चलता है कि पर्ची जारी हो चुकी हैं। किन्तु किसान तक न पहुंचने से वे परेशान रहते हैं। किसान जितेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, इरफान राधना, अनिल कुमार, जमशेद आदि का कहना है कि आमतौर पर गन्ना मिल अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में पेराई शुरू कर देते थे पंरतु इस बार 9 नवंबर से चीनी मिल चले हैं। किसानों को कम पर्चियां दी जा रही हैं। जिससे किसान का गन्ना खेतों में ही खड़ा है। इस कारण किसान गेहूं की बुवाई नहीं कर पा रहा है। इस बार गेहूं उत्पादन प्रभावित हो सकता है। राधना निवासी किसान इरफान अहमद का कहना है कि करीब डेढ़ माह से शुगर मिल पेराई कर रही है। अभी तक पांच या छह गन्ना पर्चियां ही मिली हैं। ये खेत खाली करने के लिए नाकाफी हैं। ऐसे में गन्ना सूखने क ेकगार पर पहुंच रहा है। मऊखास निवासी किसान ब्रजेश कुमार का कहना है कि गन्ना समिति मेरठ के कई बार चक्कर गन्ना पर्ची की जानकारी के लिए काटने पड़ रहे हैं। किसान गन्ना पर्ची लेने के लिए चक्कर समिति के काटे या गन्ना फिर खेत में गन्ने की छिलाई करे। भगवानपुर चट्टावन के ग्राम प्रधान अनिल कुमार तोमर का कहना है कि यदि गन्ना पर्चियां इसी तरह से कम मिलती रहीं तो किसान गेहूं की बुवाई करने से वंछित रह जायेगा। इसलिए किसान खेतों को खाली करने के लिए कोल्हू पर भी गन्ना डाल रहा है। माछरा निवासी किसान राकेश त्यागी का कहना है कि उनका गन्ना बांड है पंरतु सभी की दशा ऐसी है पांच-पांच पर्चियां ही आई हैं। र्कई किसानों की एक भी गन्ना पर्ची नहीं आई है। किसानों का कहना है कि यदि ऐसी ही स्थिति रही तो किसानों का गन्ने से मोह भंग हो जायेगा। गन्ना समिति सचिव रामनरेश शर्मा का कहना है कि इंडेंट जितना मिल देता है उसी के अनुरूप गेट एवं गन्ना क्रय केन्द्र की पर्चियां काट दी जाती हैं। किसी भी किसान के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।
मुख्य बातें
नंगलामल चीनी मिल से जुडे़ किसान कोल्हुओं पर गन्ना बेचने के लिए मजबूर
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माछरा/मुंडाली। नंगलामल चीनी मिल चलने के बाद किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चीनी मिल कम इंडेंट भेजने के कारण सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ भी कम पर्चियां किसानों को भेज रही है। ऐसे में किसान का गन्ना खेतों में खड़ा है और गेहूं की बुवाई पिछड़ने की समस्या उत्पन्न हो रही है।
सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ से किसान नाखुश हैं। उनका कहना है कि किसानों को गन्ना पर्चियां कम दी जा रही हैं तथा जो भी पर्चियां काटी जा रही हैं उन्हें गांव में पहुंचाने की भी उचित व्यवस्था नहीं है। एक आदमी ही गन्ना पर्ची लेकर जाता है और एक ही जगह रख देता है। जिसमें किसानों की गन्ना पर्चियां गुम हो जाती हैं। उन्हे समिति कार्यालय जाने पर पता चलता है कि पर्ची जारी हो चुकी हैं। किन्तु किसान तक न पहुंचने से वे परेशान रहते हैं। किसान जितेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, इरफान राधना, अनिल कुमार, जमशेद आदि का कहना है कि आमतौर पर गन्ना मिल अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में पेराई शुरू कर देते थे पंरतु इस बार 9 नवंबर से चीनी मिल चले हैं। किसानों को कम पर्चियां दी जा रही हैं। जिससे किसान का गन्ना खेतों में ही खड़ा है। इस कारण किसान गेहूं की बुवाई नहीं कर पा रहा है। इस बार गेहूं उत्पादन प्रभावित हो सकता है। राधना निवासी किसान इरफान अहमद का कहना है कि करीब डेढ़ माह से शुगर मिल पेराई कर रही है। अभी तक पांच या छह गन्ना पर्चियां ही मिली हैं। ये खेत खाली करने के लिए नाकाफी हैं। ऐसे में गन्ना सूखने क ेकगार पर पहुंच रहा है। मऊखास निवासी किसान ब्रजेश कुमार का कहना है कि गन्ना समिति मेरठ के कई बार चक्कर गन्ना पर्ची की जानकारी के लिए काटने पड़ रहे हैं। किसान गन्ना पर्ची लेने के लिए चक्कर समिति के काटे या गन्ना फिर खेत में गन्ने की छिलाई करे। भगवानपुर चट्टावन के ग्राम प्रधान अनिल कुमार तोमर का कहना है कि यदि गन्ना पर्चियां इसी तरह से कम मिलती रहीं तो किसान गेहूं की बुवाई करने से वंछित रह जायेगा। इसलिए किसान खेतों को खाली करने के लिए कोल्हू पर भी गन्ना डाल रहा है। माछरा निवासी किसान राकेश त्यागी का कहना है कि उनका गन्ना बांड है पंरतु सभी की दशा ऐसी है पांच-पांच पर्चियां ही आई हैं। र्कई किसानों की एक भी गन्ना पर्ची नहीं आई है। किसानों का कहना है कि यदि ऐसी ही स्थिति रही तो किसानों का गन्ने से मोह भंग हो जायेगा। गन्ना समिति सचिव रामनरेश शर्मा का कहना है कि इंडेंट जितना मिल देता है उसी के अनुरूप गेट एवं गन्ना क्रय केन्द्र की पर्चियां काट दी जाती हैं। किसी भी किसान के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।
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मुख्य बातें
नंगलामल चीनी मिल से जुडे़ किसान कोल्हुओं पर गन्ना बेचने के लिए मजबूर