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निपाह वायरस हल्दौर स्टोरी

Fri, 08 Jun 2018 12:04 AM IST
Updated Fri, 08 Jun 2018 12:04 AM IST
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निपाह वायरस हल्दौर स्टोरी
निपाह वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
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हल्दौर। केरल में निपाह वायरस से हुई कई लोगों की मौत के बाद से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। साथ ही लोगों में भी इसकी काफी दहशत है। विभाग संक्रमित वायरस के क्षेत्र में स्थानांतरित होने को लेकर आशंकित है। सीएचसी प्रभारी ने चिकित्सकों की टीम को क्षेत्र में रोग से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए। साथ ही क्षेत्रवासियों से इस रोग से बचाव के लिए चमगादड़ों एवं सूकरों से दूरी बनाए रखने की अपील की।
क्षेत्र के कई लोग केरल में रहकर विभन्न काम करते है। इनका केरल से अपने क्षेत्र में आना जाना लगा रहता है। केरल में रहने वाले यहां के लोगों से क्षेत्र में निपाह वायरस फैलने की आशंका बनी हुई है। संक्रमित वायरस से स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ी है। सीएचसी प्रभारी मदन पाल सिंह ने बताया कि निपाह वायरस संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने अथवा इनके संपर्क में आई वस्तुओं के सेवन करने से होता है। संक्रमित इंसानों से भी संक्रमण बढ़ने का खतरा है। चिंताग्रस्त बात यह है कि इससे निपटने के लिए कोई कारगर दवा नहीं बनी है। चिकित्सक केवल लक्षणों के आधार पर ही उपचार कर सकते है। उपचार में देरी होने से रोगी की मौत भी हो सकती है। निपाह वायरस चमगादड़ों और सूकरों से फैलता है। सीएचसी प्रभारी के अनुसार निपाह के प्रकोप से रोगी के मस्तिष्क में सूजन आ जाती है। 24 से 48 घंटों में वह कोमा में भी जा सकता है। इस जानलेवा वायरस से लोगों को बचाने के लिए सीएचसी प्रभारी ने बुधवार को चिकित्सकों और अस्पताल के स्टाफ को क्षेत्र में वायरस के प्रति जागरूकता लाने के दिशा निर्देश दिए हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों से भी अपील की है कि चमगादड़ वाले इलाकों में सावधानी बरतने और सुकरों के संपर्क में आने बचने की कोशिश करें।
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ये हैं लक्षण
सीएचसी प्रभारी मदनपाल सिंह के अनुसार निपाह रोगी को सांस लेने में तकलीफ होने के साथ-साथ तेज बुखार होना, सिर में लगातार दर्द बने रहने के साथ चक्कर आना, मस्तिष्क में सूजन आना एवं मानसिक भ्रम की स्थिति पैदा होना आदि लक्षण गंभीर हैं। उन्होंने ऐसे लक्षण पाए जाने वाले रोगी को तुरंत प्रशिक्षित एवं योग्य चिकित्सक के यहां उपचार कराने की सलाह दी।
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ऐसे करें बचाव
1. संक्रमित रोगी के संपर्क में आने से बचें।
2. पेड़ से गिरे फल एवं सब्जियों को न खाएं।
3. पशु-पक्षियों के जूठे फल खाने से बचें।
4. केले, आम एवं खजूर खाने को लेकर सतर्कता बरतें।
5. सूकर और उनके आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों के संपर्क में आने से बचें।
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