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फ्लैट बिके तो आवास विकास के खाते आयें 168 करोड़
Updated Thu, 31 May 2018 02:24 AM IST
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फ्लैट बिकें तो आवास विकास के खाते में आएंगे168 करोड़
मेरठ। आवास विकास की जागृति विहार विस्तार योजना में फ्लैटों को ग्राहक मिले तो परिषद के खाते में 168 करोड़ रुपये आ सकते हैं। प्रति वर्ष घटती आय के चलते परिषद अधिकारी चिंतित हैं। पिछले पांच सालों में इस वित्तीय वर्ष में सबसे कम आय के चलते संपत्ति विभागीय अधिकारियों पर मुख्यालय से दबाव भी है। कारण है विस्तार योजना में नौ सौ से ज्यादा फ्लैट खाली पड़े हैं।
आवास एवं विकास द्वारा 2012 में शुरू हुई फ्लैट योजना ने परिषद की आय का खेल ही बिगाड़ दिया। आंकड़ों में पिछले पांच वित्तीय वर्ष में इस वित्तीय वर्ष की आय सबसे कम 33 लाख रुपये हुई। आय कम के चलते लखनऊ मुख्यालय से भी संपत्ति विभाग पर फ्लैट बेचने का दबाव है। जागृति विहार में कुल 23 सौ फ्लैट्स का निर्माण हुआ। जिसमें 916 फ्लैट खाली पड़े हैं। जिनकी कीमत 168 करोड़ 52 लाख रुपये हैं। ऐसे मेें इन फ्लैट को ग्राहक मिले तो परिषद को करोड़ों राशि आय के तौर पर मिल सकती है। जिसके लिए विभागीय अधिकारियों ने ग्राहकों से संपर्क साधने का प्लान तैयार किया है। सभी अधिकारियों को अलग अलग विभागों में फ्लैटों के प्रचार में लगाया जाएगा। संपत्ति अधिकारी नरेश बाबू ने बताया हमारे विभाग में कर्मचारियों और अधिकारियों की बहुत कमी चल रही है। यहीं कारण रहा कि ग्राहकों से संपर्क साधने में परेशानी आ रही है। अधिकतर अधिकारी आफिस के कार्याें से बाहर ही नहीं निकल पाते हैं। पहले भी फ्लैट्स की बिक्री के लिए अधिकारियों को विभागों में लगाया था। दोबारा फिर से विभागीय अधिकारियों को अलग-अलग प्राइवेट, सरकारी संस्थानों में प्रचार के लिए लगाया जाएगा। जिससे परिषद की आय बढ़ाई जा सके।
खाली फ्लैट क्षेत्रफल कीमत
484 32 वर्ग मी. 48 करोड़ 40 लाख रु.
271 57 वर्ग मी. 48 करोड़ 78 लाख रु.
204 64 वर्ग मी. 46 करोड़ 92 लाख रु.
28 100 वर्ग मी. 10 करोड़ 36 लाख रु.
29 127 वर्ग मी. 14 करोड़ 6 लाख रु.
खास बातें:
- जागृति विहार विस्तार योजना में 916 फ्लैटों ने बिगाड़ा परिषद का गणित
- घटती आय से संपत्ति विभाग पर फ्लैट बेचने का दबाव
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मेरठ। आवास विकास की जागृति विहार विस्तार योजना में फ्लैटों को ग्राहक मिले तो परिषद के खाते में 168 करोड़ रुपये आ सकते हैं। प्रति वर्ष घटती आय के चलते परिषद अधिकारी चिंतित हैं। पिछले पांच सालों में इस वित्तीय वर्ष में सबसे कम आय के चलते संपत्ति विभागीय अधिकारियों पर मुख्यालय से दबाव भी है। कारण है विस्तार योजना में नौ सौ से ज्यादा फ्लैट खाली पड़े हैं।
आवास एवं विकास द्वारा 2012 में शुरू हुई फ्लैट योजना ने परिषद की आय का खेल ही बिगाड़ दिया। आंकड़ों में पिछले पांच वित्तीय वर्ष में इस वित्तीय वर्ष की आय सबसे कम 33 लाख रुपये हुई। आय कम के चलते लखनऊ मुख्यालय से भी संपत्ति विभाग पर फ्लैट बेचने का दबाव है। जागृति विहार में कुल 23 सौ फ्लैट्स का निर्माण हुआ। जिसमें 916 फ्लैट खाली पड़े हैं। जिनकी कीमत 168 करोड़ 52 लाख रुपये हैं। ऐसे मेें इन फ्लैट को ग्राहक मिले तो परिषद को करोड़ों राशि आय के तौर पर मिल सकती है। जिसके लिए विभागीय अधिकारियों ने ग्राहकों से संपर्क साधने का प्लान तैयार किया है। सभी अधिकारियों को अलग अलग विभागों में फ्लैटों के प्रचार में लगाया जाएगा। संपत्ति अधिकारी नरेश बाबू ने बताया हमारे विभाग में कर्मचारियों और अधिकारियों की बहुत कमी चल रही है। यहीं कारण रहा कि ग्राहकों से संपर्क साधने में परेशानी आ रही है। अधिकतर अधिकारी आफिस के कार्याें से बाहर ही नहीं निकल पाते हैं। पहले भी फ्लैट्स की बिक्री के लिए अधिकारियों को विभागों में लगाया था। दोबारा फिर से विभागीय अधिकारियों को अलग-अलग प्राइवेट, सरकारी संस्थानों में प्रचार के लिए लगाया जाएगा। जिससे परिषद की आय बढ़ाई जा सके।
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खाली फ्लैट क्षेत्रफल कीमत
484 32 वर्ग मी. 48 करोड़ 40 लाख रु.
271 57 वर्ग मी. 48 करोड़ 78 लाख रु.
204 64 वर्ग मी. 46 करोड़ 92 लाख रु.
28 100 वर्ग मी. 10 करोड़ 36 लाख रु.
29 127 वर्ग मी. 14 करोड़ 6 लाख रु.
खास बातें:
- जागृति विहार विस्तार योजना में 916 फ्लैटों ने बिगाड़ा परिषद का गणित
- घटती आय से संपत्ति विभाग पर फ्लैट बेचने का दबाव