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यातायात पुलिस की कार्यशाला
Updated Wed, 16 May 2018 01:44 AM IST
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गुस्सा आए तो लंबी सांसे लें
मेरठ। ड्यूटी के वक्त ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिससे कर्मियों में गुस्सा और चिड़चिड़ाहट बढ़ती है। इसका असर उनके काम पर पड़ता है। परिवार भी प्रभावित होता है। इसी को लेकर डीजीपी के निर्देश पर मंगलवार को यातायात पुलिस कर्मियों की कार्यशाला का आयोजन बेगमपुल स्थित भगवान पैलेस में किया गया। इसमें ट्रैफिक पुलिसकर्मी, कालेजों के मनोवैज्ञानिक, जिला अस्पताल के क्लीनिकल मनोचिकित्सक शामिल हुए। रोड सेफ्टी क्लब के चीफ इंस्पेक्टर सुनील शर्मा ने मंच का संचालन किया। सीओ ट्रैफिक संजीव देसवाल, टीआई सुनील सिंह, टीएसआई नदीम शामिल रहे।
मन में सेवा भाव लेकर ड्यूटी पर जाएं
पीएल शर्मा अस्पताल की क्लीनिकल एडवाइजर डॉक्टर विभा नागर ने कहा लंबी थकान भरी ड्यूटी की वजह से गुस्सा, चिड़चिड़ाहट स्वभाविक है। बेहतर होगा कि तनाव से बचें। ड्यूटी पर जाते वक्त मन में सेवा भाव लेकर जाएं। मेरठ कॉलेज के मनोवैज्ञानिक डॉ. भगत सिंह ने कहा कि काम की थकान से अधिकतर चिड़चिड़ापन भी होता है। अक्सर देखा जाता है कि ड्यूटी के बाद घर जाने पर यदि बच्चा टॉफी मांग लेता है तो उस पर चिल्लाने लगते हैं। बेहतर होगा कि गुस्से को कंट्रोल करें। जब कभी भी गुस्सा आए तो आंखें बंद कर लंबी लंबी सांसे लें। चेहरे पर हाथ रखें। थोड़ा पानी पिएं। इसके अलावा पीएल शर्मा के क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. कमलेंद्र शेखर ने कहा कि ड्यूटी पर जाते वक्त मन में पुलिस वाला होने की इगो होती है। यदि कोई गाड़ी न रोके तो इगो प्रोबलम हो जाती है। इससे बीपी, हार्ट अटैक और कैंसर की समस्या भी हो सकता है। उन्होंने ट्रैफिक कर्मियों को नियमित योग, व्यायाम और विवाद के वक्त अपना ध्यान दूसरी ओर ध्यान डायवर्ट करने की सलाह दी।
ट्रैफिक बूथ पर रजिस्टर रखवाएंगे
रोड सेफ्टी सोसायटी के अध्यक्ष अमित नागर ने कहा उनकी संस्था द्वारा शहर के प्रत्येक मुख्य चौराहों के बूथ पर एक रजिस्टर रखवा दिया जाएगा। इसमें ड्यूटी के वक्त आने वाली समस्या, संसाधन की दिक्कत आदि के बारे में ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मी दर्ज कर दें। बाद में संस्था इन समस्याओं को संबंधित व्यक्ति या संस्था से बातचीत के माध्यम से हल कराने का प्रयास करेगी।
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नेताओं की धमकी देते हैं लोग
एचसीपी ब्रजेश कुमार ने कहा कि नियम तोड़ने पर वाहनों को पकड़ते हैं तो उन्हें नेताओं की धमकी दी जाती है। सिफारिश आने लगती है। ना मानने पर कुछ लोग तो वर्दी तक उतरवाने की धमकी देते हैं। इस पर एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी ने कहा कि किसी से उलझें नहीं। इस तरह के वाहनों को पुलिस लाइन में खड़ा करवा दें। वहीं एचसीपी विनोद ने कहा कि ई रिक्शा व ऑटो सड़कों पर खड़े होने से जाम लगता है। उन्हें हटाया जाता है तो वे उनसे ही सवाल पूछ लेते हैं बताओ इन्हें कहां खड़ा करें। जिसका उनके पास भी जवाब नहीं होता। एचसीपी ने जाम से निपटने को शहर में पार्किंग स्थल बनाने का सुझाव दिया।
जाम की चार वजह
टीएसआई दीनदयाल दीक्षित ने कहा कि जाम की समस्या से निपटने को पूरा ट्रैफिक महकमा पूरी मेहनत कर रहा है। एंजिल, ट्रैमाें भी सड़कों पर दौड़ रही हैं, लेकिन टीपी नगर, दोनों बस अड्डों का शहर के अंदर होना। पार्किंग स्थल और रिंग रोड का अभाव इसकी चार मुख्य वजह हैं। ये दूर हो जाएं तो जाम की समस्या खत्म हो सकती है।
संयम से काम लें
एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी ने कहा कि पुलिस कर्मी समझाता हैं कि चेकिंग उनका अधिकार है, जबकि कुछ लोग समझते हैं कि चेकिंग होने से उनकी इमेज पर असर होगा। इसी वजह से विवाद होता है। बेहतर होगा कि पुलिस कर्मी संयम से काम लें।
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मेरठ। ड्यूटी के वक्त ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिससे कर्मियों में गुस्सा और चिड़चिड़ाहट बढ़ती है। इसका असर उनके काम पर पड़ता है। परिवार भी प्रभावित होता है। इसी को लेकर डीजीपी के निर्देश पर मंगलवार को यातायात पुलिस कर्मियों की कार्यशाला का आयोजन बेगमपुल स्थित भगवान पैलेस में किया गया। इसमें ट्रैफिक पुलिसकर्मी, कालेजों के मनोवैज्ञानिक, जिला अस्पताल के क्लीनिकल मनोचिकित्सक शामिल हुए। रोड सेफ्टी क्लब के चीफ इंस्पेक्टर सुनील शर्मा ने मंच का संचालन किया। सीओ ट्रैफिक संजीव देसवाल, टीआई सुनील सिंह, टीएसआई नदीम शामिल रहे।
मन में सेवा भाव लेकर ड्यूटी पर जाएं
पीएल शर्मा अस्पताल की क्लीनिकल एडवाइजर डॉक्टर विभा नागर ने कहा लंबी थकान भरी ड्यूटी की वजह से गुस्सा, चिड़चिड़ाहट स्वभाविक है। बेहतर होगा कि तनाव से बचें। ड्यूटी पर जाते वक्त मन में सेवा भाव लेकर जाएं। मेरठ कॉलेज के मनोवैज्ञानिक डॉ. भगत सिंह ने कहा कि काम की थकान से अधिकतर चिड़चिड़ापन भी होता है। अक्सर देखा जाता है कि ड्यूटी के बाद घर जाने पर यदि बच्चा टॉफी मांग लेता है तो उस पर चिल्लाने लगते हैं। बेहतर होगा कि गुस्से को कंट्रोल करें। जब कभी भी गुस्सा आए तो आंखें बंद कर लंबी लंबी सांसे लें। चेहरे पर हाथ रखें। थोड़ा पानी पिएं। इसके अलावा पीएल शर्मा के क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. कमलेंद्र शेखर ने कहा कि ड्यूटी पर जाते वक्त मन में पुलिस वाला होने की इगो होती है। यदि कोई गाड़ी न रोके तो इगो प्रोबलम हो जाती है। इससे बीपी, हार्ट अटैक और कैंसर की समस्या भी हो सकता है। उन्होंने ट्रैफिक कर्मियों को नियमित योग, व्यायाम और विवाद के वक्त अपना ध्यान दूसरी ओर ध्यान डायवर्ट करने की सलाह दी।
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ट्रैफिक बूथ पर रजिस्टर रखवाएंगे
रोड सेफ्टी सोसायटी के अध्यक्ष अमित नागर ने कहा उनकी संस्था द्वारा शहर के प्रत्येक मुख्य चौराहों के बूथ पर एक रजिस्टर रखवा दिया जाएगा। इसमें ड्यूटी के वक्त आने वाली समस्या, संसाधन की दिक्कत आदि के बारे में ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मी दर्ज कर दें। बाद में संस्था इन समस्याओं को संबंधित व्यक्ति या संस्था से बातचीत के माध्यम से हल कराने का प्रयास करेगी।
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नेताओं की धमकी देते हैं लोग
एचसीपी ब्रजेश कुमार ने कहा कि नियम तोड़ने पर वाहनों को पकड़ते हैं तो उन्हें नेताओं की धमकी दी जाती है। सिफारिश आने लगती है। ना मानने पर कुछ लोग तो वर्दी तक उतरवाने की धमकी देते हैं। इस पर एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी ने कहा कि किसी से उलझें नहीं। इस तरह के वाहनों को पुलिस लाइन में खड़ा करवा दें। वहीं एचसीपी विनोद ने कहा कि ई रिक्शा व ऑटो सड़कों पर खड़े होने से जाम लगता है। उन्हें हटाया जाता है तो वे उनसे ही सवाल पूछ लेते हैं बताओ इन्हें कहां खड़ा करें। जिसका उनके पास भी जवाब नहीं होता। एचसीपी ने जाम से निपटने को शहर में पार्किंग स्थल बनाने का सुझाव दिया।
जाम की चार वजह
टीएसआई दीनदयाल दीक्षित ने कहा कि जाम की समस्या से निपटने को पूरा ट्रैफिक महकमा पूरी मेहनत कर रहा है। एंजिल, ट्रैमाें भी सड़कों पर दौड़ रही हैं, लेकिन टीपी नगर, दोनों बस अड्डों का शहर के अंदर होना। पार्किंग स्थल और रिंग रोड का अभाव इसकी चार मुख्य वजह हैं। ये दूर हो जाएं तो जाम की समस्या खत्म हो सकती है।
संयम से काम लें
एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी ने कहा कि पुलिस कर्मी समझाता हैं कि चेकिंग उनका अधिकार है, जबकि कुछ लोग समझते हैं कि चेकिंग होने से उनकी इमेज पर असर होगा। इसी वजह से विवाद होता है। बेहतर होगा कि पुलिस कर्मी संयम से काम लें।