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फर्जी रजिस्ट्री अब एआईजी स्टांप कर सकेंगे रद्द
Updated Fri, 23 Mar 2018 01:44 AM IST
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फर्जी रजिस्ट्री अब एआईजी स्टांप कर सकेंगे रद्द
मेरठ। जालसाजी से हड़पी जमीनों की फर्जी रजिस्ट्री अब सहायक महानिरीक्षक (एआईजी) स्टांप रद्द करने के साथ एफआईआर भी दर्ज करा सकेंगे। मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने शासनादेश का हवाला देते हुए सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि जालसाजी के आधार पर कराए गए बैनामों की जांच शिकायत मिलते ही शुरू कर दी जाए।
शासनादेश से होगा काम
मंडलायुक्त ने बताया कि जमीनों पर फर्जी ढंग से कब्जे या किसी की जमीन किसी दूसरे के द्वारा बेचने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कई मामलों में शिकायतकर्ता अकेली महिला है और दबंग उसकी जमीन की लगातार रजिस्ट्री करा रहे हैं। लेकिन कोई अंकुश नहीं लग रहा है। मंडलायुक्त ने 13 अगस्त 2013 को तत्कालीन प्रमुख सचिव कर एवं निबंधन अनुभाग बीएम मीना द्वारा जारी शासनादेश का हवाला दिया। इसके मुताबिक जमीन के विवाद में सरकारी तंत्र ही पीड़ित को दीवानी न्यायालय जाने की सलाह देता है। जबकि यह वर्ग ठीक से अपनी पैरवी भी नहीं कर पाता। अत: एआईजी स्टांप जांच कर ऐसे प्रकरणों में कार्रवाई करें।
दो माह में पूरी करें जांच
एआईजी दो माह में जांच पूरी कर ऐसे प्रकरणों में रजिस्ट्री रद्द कर दें। दोषियों पर एफआईआर कराएं। दो माह में निस्तारण न होने पर उन पर भी एक्शन होगा। रजिस्ट्री रद्द होने के बाद यह संपत्ति पूर्व की तरह हो जाएगी। इस जांच के दौरान एआईजी दो बार पक्षकार को समन जारी करेेंगे। यदि वे इन दो तारीखों पर उपस्थित नहीं होते हैं तो एक पक्षीय आदेश जारी कर दिया जाएगा।
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मॉनीटरिंग कमेटी बनेगी
जिला और कमिश्नरी स्तर पर इसकी मॉनीटरिंग कमेटी बनेगी। पीड़ित यहां अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए पीड़ित को अदालत से अपना वाद वापस लेना होगा। जिनका वाद नहीं है उन्हें तो कोई परेशानी है ही नहीं।
शहर के कई बिल्डर रडार पर
इस शासनादेश और मंडलायुक्त के निर्देश के बाद शहर के कई बड़े बिल्डरों पर कार्रवाई हो सकती है। कई बिल्डरों ने सरकारी जमीनों के बैनामों के साथ निजी लोगों की जमीनें भी कब्जा कर बेची हैं। ये सब इस जांच में रडार पर होंगे। ऐसे बैनामे निरस्त होने के साथ इन पर केस भी दर्ज हो सकते हैं।
सख्ती से करें अमल
ऐसा कुछ हो कि हम फर्जी बैनामों के मामलों में पीड़ितों को जल्द न्याय दिला सकें। ऐसे में वर्ष 2013 का शासनादेश मिला जिसे हाईकोर्ट आंध्रप्रदेश के यनला मल्लेश्वरी बनाम अनंथलू सायमा केस को आधार बनाकर जारी किया गया था। इसके आधार पर एआईजी फर्जी रजिस्ट्री को अपने ही स्तर पर जांच कर रद्द कर सकेंगे। मैंने सभी जिलाधिकारी से कहा है कि इस पर सख्ती से अमल करें। -डॉ. प्रभात कुमार आयुक्त मेरठ मंडल
खास बातें:
आयुक्त ने शासनादेश का हवाला देते हुए सभी जिलाधिकारियों को लिखा पत्र
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मेरठ। जालसाजी से हड़पी जमीनों की फर्जी रजिस्ट्री अब सहायक महानिरीक्षक (एआईजी) स्टांप रद्द करने के साथ एफआईआर भी दर्ज करा सकेंगे। मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने शासनादेश का हवाला देते हुए सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि जालसाजी के आधार पर कराए गए बैनामों की जांच शिकायत मिलते ही शुरू कर दी जाए।
शासनादेश से होगा काम
मंडलायुक्त ने बताया कि जमीनों पर फर्जी ढंग से कब्जे या किसी की जमीन किसी दूसरे के द्वारा बेचने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कई मामलों में शिकायतकर्ता अकेली महिला है और दबंग उसकी जमीन की लगातार रजिस्ट्री करा रहे हैं। लेकिन कोई अंकुश नहीं लग रहा है। मंडलायुक्त ने 13 अगस्त 2013 को तत्कालीन प्रमुख सचिव कर एवं निबंधन अनुभाग बीएम मीना द्वारा जारी शासनादेश का हवाला दिया। इसके मुताबिक जमीन के विवाद में सरकारी तंत्र ही पीड़ित को दीवानी न्यायालय जाने की सलाह देता है। जबकि यह वर्ग ठीक से अपनी पैरवी भी नहीं कर पाता। अत: एआईजी स्टांप जांच कर ऐसे प्रकरणों में कार्रवाई करें।
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दो माह में पूरी करें जांच
एआईजी दो माह में जांच पूरी कर ऐसे प्रकरणों में रजिस्ट्री रद्द कर दें। दोषियों पर एफआईआर कराएं। दो माह में निस्तारण न होने पर उन पर भी एक्शन होगा। रजिस्ट्री रद्द होने के बाद यह संपत्ति पूर्व की तरह हो जाएगी। इस जांच के दौरान एआईजी दो बार पक्षकार को समन जारी करेेंगे। यदि वे इन दो तारीखों पर उपस्थित नहीं होते हैं तो एक पक्षीय आदेश जारी कर दिया जाएगा।
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मॉनीटरिंग कमेटी बनेगी
जिला और कमिश्नरी स्तर पर इसकी मॉनीटरिंग कमेटी बनेगी। पीड़ित यहां अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए पीड़ित को अदालत से अपना वाद वापस लेना होगा। जिनका वाद नहीं है उन्हें तो कोई परेशानी है ही नहीं।
शहर के कई बिल्डर रडार पर
इस शासनादेश और मंडलायुक्त के निर्देश के बाद शहर के कई बड़े बिल्डरों पर कार्रवाई हो सकती है। कई बिल्डरों ने सरकारी जमीनों के बैनामों के साथ निजी लोगों की जमीनें भी कब्जा कर बेची हैं। ये सब इस जांच में रडार पर होंगे। ऐसे बैनामे निरस्त होने के साथ इन पर केस भी दर्ज हो सकते हैं।
सख्ती से करें अमल
ऐसा कुछ हो कि हम फर्जी बैनामों के मामलों में पीड़ितों को जल्द न्याय दिला सकें। ऐसे में वर्ष 2013 का शासनादेश मिला जिसे हाईकोर्ट आंध्रप्रदेश के यनला मल्लेश्वरी बनाम अनंथलू सायमा केस को आधार बनाकर जारी किया गया था। इसके आधार पर एआईजी फर्जी रजिस्ट्री को अपने ही स्तर पर जांच कर रद्द कर सकेंगे। मैंने सभी जिलाधिकारी से कहा है कि इस पर सख्ती से अमल करें। -डॉ. प्रभात कुमार आयुक्त मेरठ मंडल
खास बातें:
आयुक्त ने शासनादेश का हवाला देते हुए सभी जिलाधिकारियों को लिखा पत्र