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कैंट की नारी सब पर भारी
Updated Thu, 08 Mar 2018 02:08 AM IST
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कैंट की नारी सब पर भारी
मेरठ। अधिकारी हों या पॉलिटिशियन, टीचर हों या व्यवसायी। कैंट की नारी सब पर भारी हैं। यहां रक्षा संपदा अधिकारी के रूप में भावना सिंह के हाथों में कमान है तो कैंट बोर्ड की उपाध्यक्ष बीना वाधवा हैं। कैंट में सदस्यों की बात करें तो चार महिलाएं हैं। कैंट के स्कूलों में भी सबसे ज्यादा शिक्षिकाएं और प्राचार्यों की संख्या भी महिलाओं की है।
शिक्षित हों बेटियां
ये सुनिश्चित हो कि सभी बच्चियां स्कूल तक पहुंचे। उनकी शिक्षा पूरी हो। बेटियों को रोजगार परक शिक्षा मिले ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। महिलाओं को शिक्षा के साथ-साथ मेडिकल सुविधाएं मिलें। महिलाएं शिक्षित होंगी तो घर शिक्षित होगा। वे स्वस्थ रहेंगी तो परिवार खुशहाल रहेगा। महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी तभी स्थिति में बदलाव आएगा। - भावना सिंह, रक्षा संपदा अधिकारी
जागरूक होंगे तो मिलेगा अधिकार
समाज में महिलाओं का सबसे ज्यादा योगदान है। सबसे ज्यादा बेटियां आगे बढ़ रही हैं। कोई ऐसा फील्ड नहीं जिसमें बेटियां बेटों से कम हों। लेकिन अभी भी बहुत काम करने की जरूरत है। राजनीति में महिलाओं का हस्तक्षेप बढ़ना चाहिए। रिजर्वेशन हो। समाज में बेटी और बेटी के बीच फर्क खत्म किया जाना बहुत जरूरी है। इसके लिए हर नागरिक को जागरूक होकर काम करना होगा, तभी महिलाओं को बराबरी मिलेगी।
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- बीना वाधवा, कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष
बेटियों की शिक्षा करें निशुल्क
महिला सशक्तिकरण के लिए अभी और कदम उठाने होंगे। अभी महिलाओं को समाज में बराबरी का हक नहीं मिला है। इसके लिए जमीनी स्तर से काम करने की जरूरत है। बेटियों की शिक्षा निशुल्क होनी चाहिए। इससे समाज बदलेगा। शिक्षा के मामले में बेटियों को जात-पात की दृष्टि से नहीं बल्कि सबको एक समान रूप से देखा जाना चाहिए। - मनिका शर्मा, चेयरपर्सन महावीर एजुकेशनल पार्क एंड अशोका एकेडमी
मिले बराबरी का हक
महिलाओं को बराबरी का हक मिलना चाहिए। जब वे हर काम कर सकती हैं तो फिर पीछे क्यों रहे। बेटियों को पढ़ाकर लिखाकर काबिल बनाना चाहिए। - बुशरा कमाल, कैंट बोर्ड सदस्य
रोजगार में आगे आएं
महिलाएं आज हर रोजगार में आगे हैं। बेटियां पढ़ाई में नाम रोशन कर रही हैं। सरकारें भी महिलाओं को लेकर चिंतित हैं। आने वाले समय में महिलाएं किसी से कम नहीं रहेंगी। - मंजू गोयल, कैंट बोर्ड सदस्य
अभी भी भेदभाव है
बेटियों की शिक्षा को लेकर ग्रामीण इलाकों में अभी भी जागरूकता की जरूरत है। महिलाओं को बराबरी का हक नहीं मिल रहा है। अभी भी बेटे-बेटी में लोग भेदभाव करते हैं। - रिनी जैन, कैंट बोर्ड सदस्य
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मेरठ। अधिकारी हों या पॉलिटिशियन, टीचर हों या व्यवसायी। कैंट की नारी सब पर भारी हैं। यहां रक्षा संपदा अधिकारी के रूप में भावना सिंह के हाथों में कमान है तो कैंट बोर्ड की उपाध्यक्ष बीना वाधवा हैं। कैंट में सदस्यों की बात करें तो चार महिलाएं हैं। कैंट के स्कूलों में भी सबसे ज्यादा शिक्षिकाएं और प्राचार्यों की संख्या भी महिलाओं की है।
शिक्षित हों बेटियां
ये सुनिश्चित हो कि सभी बच्चियां स्कूल तक पहुंचे। उनकी शिक्षा पूरी हो। बेटियों को रोजगार परक शिक्षा मिले ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। महिलाओं को शिक्षा के साथ-साथ मेडिकल सुविधाएं मिलें। महिलाएं शिक्षित होंगी तो घर शिक्षित होगा। वे स्वस्थ रहेंगी तो परिवार खुशहाल रहेगा। महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी तभी स्थिति में बदलाव आएगा। - भावना सिंह, रक्षा संपदा अधिकारी
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जागरूक होंगे तो मिलेगा अधिकार
समाज में महिलाओं का सबसे ज्यादा योगदान है। सबसे ज्यादा बेटियां आगे बढ़ रही हैं। कोई ऐसा फील्ड नहीं जिसमें बेटियां बेटों से कम हों। लेकिन अभी भी बहुत काम करने की जरूरत है। राजनीति में महिलाओं का हस्तक्षेप बढ़ना चाहिए। रिजर्वेशन हो। समाज में बेटी और बेटी के बीच फर्क खत्म किया जाना बहुत जरूरी है। इसके लिए हर नागरिक को जागरूक होकर काम करना होगा, तभी महिलाओं को बराबरी मिलेगी।
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- बीना वाधवा, कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष
बेटियों की शिक्षा करें निशुल्क
महिला सशक्तिकरण के लिए अभी और कदम उठाने होंगे। अभी महिलाओं को समाज में बराबरी का हक नहीं मिला है। इसके लिए जमीनी स्तर से काम करने की जरूरत है। बेटियों की शिक्षा निशुल्क होनी चाहिए। इससे समाज बदलेगा। शिक्षा के मामले में बेटियों को जात-पात की दृष्टि से नहीं बल्कि सबको एक समान रूप से देखा जाना चाहिए। - मनिका शर्मा, चेयरपर्सन महावीर एजुकेशनल पार्क एंड अशोका एकेडमी
मिले बराबरी का हक
महिलाओं को बराबरी का हक मिलना चाहिए। जब वे हर काम कर सकती हैं तो फिर पीछे क्यों रहे। बेटियों को पढ़ाकर लिखाकर काबिल बनाना चाहिए। - बुशरा कमाल, कैंट बोर्ड सदस्य
रोजगार में आगे आएं
महिलाएं आज हर रोजगार में आगे हैं। बेटियां पढ़ाई में नाम रोशन कर रही हैं। सरकारें भी महिलाओं को लेकर चिंतित हैं। आने वाले समय में महिलाएं किसी से कम नहीं रहेंगी। - मंजू गोयल, कैंट बोर्ड सदस्य
अभी भी भेदभाव है
बेटियों की शिक्षा को लेकर ग्रामीण इलाकों में अभी भी जागरूकता की जरूरत है। महिलाओं को बराबरी का हक नहीं मिल रहा है। अभी भी बेटे-बेटी में लोग भेदभाव करते हैं। - रिनी जैन, कैंट बोर्ड सदस्य