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अध्ययन अंग्रेजी में लेकिन चिंतन हिंदी में है

Thu, 14 Sep 2017 11:27 PM IST
Updated Thu, 14 Sep 2017 11:27 PM IST
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अध्ययन अंग्रेजी में लेकिन चिंतन हिंदी में है
भारतीयों के चिंतन की भाषा है हिंदी
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मेरठ।
सीसीएसयू के हिंदी विभाग में बृहस्पतिवार को हिंदी दिवस के अवसर पर जनसंचार की भाषा हिंदी विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने हिंदी पर विचार रखे। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विवि के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा हिंदी हमारे आर्थिक विकास और तकनीक को बढ़ाने में अहम साबित हो सकती है। अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देना आत्मघाती कदम है, जिससे दीर्घकालिक क्षमताओं पर असर पड़ेगा। ज्ञान के मार्ग को सरल बनाने के लिए मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा अध्ययन अंग्रेजी में हो सकता है लेकिन भारतीयों के चिंतन की भाषा हिंदी ही है। हम हिंदी में सोचते हैं। अंग्रेजी की उपयोगी किताबों को तेजी से हिंदी में अनुवाद होना चाहिए। हिंदी पाठ्यक्रमों में अनुवाद को रखा जाना चाहिए। शोध पत्रिकाओं को अनुवाद हिंदी में उपलब्ध होना चाहिए। हिंदी के शिक्षक और विद्यार्थियों को यह भार उठाना पड़ेगा। डीन आर्ट्स प्रो. बीर सिंह ने कहा कि हिंदी निरंतर प्रगति कर रही है। इसके लिए ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। अतिथि और वरिष्ठ कवि रामगोपाल भारतीय ने कहा हिंदी पहले राष्ट्रभाषा बने और बाद में यूएनओ की भाषा बने। विश्व बाजार में हिंदी छाई हुई है। हिंदी फिल्म अभिनेता हिंदी भाषी फिल्मों से धन और यश कमाते हैं, लेकिन सामान्य बातचीत में अंग्रेजी का प्रयोग करते हैं। यह गुलाम मानसिकता का प्रभाव है। बैंकों में सूचना पट हिंदी में होते हैं, लेकिन कामकाज अंग्रेजी में होता है। विषय वक्ता डॉ. प्रज्ञा पाठक ने कहा हिंदी को हम किंतु और परंतु के साथ क्यों स्वीकार करते हैं। आजादी के समय हिंदी भारतीयता की पहचान बन सकती तो अब क्यों नहीं। हिंदी की जगह हमारे दिल में होनी चाहिए। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां हिंदी के अनुकूल हैं। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गजेंद्र सिंह ने कहा हिंदी का जन्म उसी दिन हो जाता है जिस दिन बच्चा जन्म लेता है। राजनीतिक खींचतान का असर हिंदी पर पड़ा है। डॉ. ईश्वर चंद गंभीर ने कहा हिंदी पहनो, हिंदी ओढ़ो, इस भाषा से सबको जोड़ो। इस मौके पर आशुभाषण और स्वरचित कविता प्रतियोगिता भी हुई। आशुभाषण में संजय, ममता, नितिन, दीक्षित, शुभम, आंचल, आदित्य, विपिन गौरव ने भाग लिया। स्वरचित कविता प्रतियोगिता में शुभम, आंचल, कविता, आकांक्षा, आदित्य, प्रीति, विपिन, गौरव, कपिल, पूजा, नितिन ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंजू ने किया। कार्यक्रम में प्रो. पीके मिश्रा, डॉ. विजय जायसवाल, डॉ. प्रवीण कटारिया, आरती राणा आदि मौजूद रहे। उधर, पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी भवन में विचार गोष्ठी हुई। साहित्यकार डॉ. ज्ञानेश दत्त हारीत ने कहा हिंदी को व्यावसायिक और जीविका के साधनों से जोड़ने की आवश्यकता है। गजलकार ओंकार गुलशन ने कहा अनोखा हुनर हमने सीखा है यारों, सुनाते हैं हिंदी में उर्दू की बातें। प्रशांत दीक्षित, सचिन शाश्वत, डॉ. मीनाक्षी शास्त्री, डॉ. कृष्ण कुमार, डॉ. रामगोपाल भारतीय, राजकुमार शर्मा ने भी विचार रखे।
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मुख्य बातें
सीसीएसयू के हिंदी विभाग में विचार गोष्ठी का आयोजन


सीडीए में हिंदी पखवाड़ा शुरू
मेरठ। रक्षा लेखा नियंत्रक (पेंशन संवितरण) छावनी में बृहस्पतिवार को हिंदी पखवाड़े का उद्घाटन हुआ। सहायक निदेशक कुंअर पाल ने अधिकारियों का स्वागत किया। वरिष्ठ लेखा परीक्षक बिजेंद्र सिंह ने सरस्वती वंदना की। अधिकारियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम कविता पाठ, भजन, गीत में भाग लिया। वाद-विवाद प्रतियोगिता में नसीम अहम सिद्दीकी ने पहला, नकुल गुप्ता ने दूसरा, कृष्णपाल ने तीसरा पुरस्कार जीता। कार्यक्रम में कर्मचारी रामनिवास मीना और नरेंद्र सिंह का अहम योगदान रहा।
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