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दस ग्राम पंचायत नहीं हुई एससी के लिए आरक्षित
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10 ग्राम पंचायतें नहीं हुई एससी के लिए आरक्षित
सरूरपुर। शासन ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण की स्थिति साफ कर दी है। शासन से तय हो गया कि इस बार आरक्षण की व्यवस्था चक्रानुक्रम में ही लागू होगी। अभी तक शासनादेश भले ही जारी न हुआ हो, लेकिन माना जा रहा है कि इस बार ऐसी व्यवस्था बन सकती है, जिसके अनुसार कई गांवों में पहली बार अनुसूचित जाति (एससी) एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रधान चुने जाएंगे।
सरूरपुर विकास खंड में 10 ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जो 1995 से 2015 तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं की गई। इन ग्राम पंचायतों में शासन की ओर से आरक्षण को लेकर संकेत मिलते ही दावेदार सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने मन मुताबिक आरक्षण के लिए विकास भवन का चक्कर लगाना शुरू कर दिया है।
खंड विकास अधिकारी सरूरपुर अमित कुमार ने बताया कि विकास खंड सरूरपुर में कुल 27 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के लिए चुनाव होगा। 2010 एवं 2015 की तरह इस बार भी आरक्षण शून्य होगा या चक्रानुक्रम के अनुसार होगा, इस बात पर संशय बरकरार था। लेकिन स्थिति साफ होने के बाद पंचायती राज विभाग विस्तृत शासनादेश के इंतजार में है। विभागीय जानकारों के अनुसार, आरक्षण तय करते समय यह देखा जाएगा कि कौन से गांवों में 1995 से लेकर 2015 तक कभी भी सीट एससी या ओबीसी नहीं रही। उन्हें इस बार एससी में करने की तैयारी है। जिन गांवों में ओबीसी आरक्षण नहीं रहा, वहां ओबीसी किया जाएगा। जो गांव बचेंगे, वहां आबादी के अनुसार सामान्य तरीके से आरक्षण की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
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ये है आरक्षण का चक्रानुक्रम
चक्रानुक्रम के अनुसार, सबसे पहले एससी महिला, फिर एससी, अगले क्रम पर ओबीसी महिला, ओबीसी, फिर सामान्य महिला एवं सामान्य सीट घोषित की जाती है। सरूरपुर ब्लॉक के गांव मैनापूठी, जसड़ सुलतान नगर, देवली खेड़ा उर्फ जैनपुर, छुर, बुबकपुर, बपारसी, पिठलोकर, पांचली बुजुर्ग, रतौली, मेहरमति में 1995 से 2015 तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण नहीं हुआ। इन ग्राम पंचायतों में एससी महिला के लिए आरक्षण की संभावना बन रही है।
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सरूरपुर। शासन ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण की स्थिति साफ कर दी है। शासन से तय हो गया कि इस बार आरक्षण की व्यवस्था चक्रानुक्रम में ही लागू होगी। अभी तक शासनादेश भले ही जारी न हुआ हो, लेकिन माना जा रहा है कि इस बार ऐसी व्यवस्था बन सकती है, जिसके अनुसार कई गांवों में पहली बार अनुसूचित जाति (एससी) एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रधान चुने जाएंगे।
सरूरपुर विकास खंड में 10 ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जो 1995 से 2015 तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं की गई। इन ग्राम पंचायतों में शासन की ओर से आरक्षण को लेकर संकेत मिलते ही दावेदार सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने मन मुताबिक आरक्षण के लिए विकास भवन का चक्कर लगाना शुरू कर दिया है।
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खंड विकास अधिकारी सरूरपुर अमित कुमार ने बताया कि विकास खंड सरूरपुर में कुल 27 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के लिए चुनाव होगा। 2010 एवं 2015 की तरह इस बार भी आरक्षण शून्य होगा या चक्रानुक्रम के अनुसार होगा, इस बात पर संशय बरकरार था। लेकिन स्थिति साफ होने के बाद पंचायती राज विभाग विस्तृत शासनादेश के इंतजार में है। विभागीय जानकारों के अनुसार, आरक्षण तय करते समय यह देखा जाएगा कि कौन से गांवों में 1995 से लेकर 2015 तक कभी भी सीट एससी या ओबीसी नहीं रही। उन्हें इस बार एससी में करने की तैयारी है। जिन गांवों में ओबीसी आरक्षण नहीं रहा, वहां ओबीसी किया जाएगा। जो गांव बचेंगे, वहां आबादी के अनुसार सामान्य तरीके से आरक्षण की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
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ये है आरक्षण का चक्रानुक्रम
चक्रानुक्रम के अनुसार, सबसे पहले एससी महिला, फिर एससी, अगले क्रम पर ओबीसी महिला, ओबीसी, फिर सामान्य महिला एवं सामान्य सीट घोषित की जाती है। सरूरपुर ब्लॉक के गांव मैनापूठी, जसड़ सुलतान नगर, देवली खेड़ा उर्फ जैनपुर, छुर, बुबकपुर, बपारसी, पिठलोकर, पांचली बुजुर्ग, रतौली, मेहरमति में 1995 से 2015 तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण नहीं हुआ। इन ग्राम पंचायतों में एससी महिला के लिए आरक्षण की संभावना बन रही है।