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कूड़ा उठाने के लिए 10 करोड़ खर्च, फिर भी शहर गंदा

Sat, 22 Aug 2020 02:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2020 02:21 AM IST
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10 crore spent for garbage, yet the city is dirty
कूड़ा उठाने के लिए 10 करोड़ खर्च, फिर भी शहर गंदा
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मेरठ। नगर निगम ने कूड़ा उठाने के लिए 10 करोड़ रुपये खर्च कर वाहन खरीदे, उसके बाद भी शहर से गंदगी खत्म नहीं हो पाई। डोर टू डोर कूड़ा उठाने की योजना पूरी तरह परवान नहीं चढ़ सकी। अभी भी चालकों के अभाव में 50 से ज्यादा कूड़ा गाड़ियां वाहन डिपो में खड़ी हैं। नालों में खड़ी घास और पेड़ नाला सफाई के दावों की पोल खोल रहे हैं। गांवड़ी में लगे कूड़ा निस्तारण प्लांट पर 150 मीट्रिक टन कूड़े के लिए हर माह करीब 5 लाख रुपये खर्च किये जा रहे हैं। सही सोच, योजना और इच्छाशक्ति के अभाव में राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में शहर की रैंकिंग 41वीं आई है। जो सबसे गंदे 10 शहरों में सातवें स्थान पर है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से 180 कूड़ा वाहन खरीदे गए थे। इन वाहनों में करीब 120 वाहन ही संचालित हो रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि तीनों वाहन डिपो को करीब 60 चालकों की जरूरत है। सूरजकुंड वाहन डिपो पर 13, दिल्ली रोड पर 21 और कंकरखेड़ा पर 11 कूड़ा वाहन खड़े हैं। सूरजकुंड डिपो को 24, दिल्ली रोड डिपो को 21 और कंकरखेड़ा डिपो को 15 चालकों की जरूरत है। चालकों के अभाव में करीब चार करोड़ कीमत के कूड़ा वाहन खड़े खड़े खराब हो रहे हैं।
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नालों में उगी घास, पेड़ खड़े
नगर निगम शहर के नालों की सफाई पर हर साल करीब 2 करोड़ रुपये खर्च करता है। इस साल भी डेढ़ करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। अमर उजाला टीम ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 का परिणाम आने के बाद शुक्रवार को सफाई और नालों का हाल जाना तो नजारा अजीब था। थापर नगर नाले में न केवल घास जमी मिली बल्कि पेड़ भी खड़े थे। बच्चा पार्क स्थित नाले की पुलिया गंदगी और पॉलिथीन से अटी मिली। इसके अलावा सुभाष नगर और पूर्वा शेखलाल का नाला भी सिल्ट से अटा मिला।
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कूड़ाघरों में लगे कूड़े के ढेर
गलियों और कॉलोनियों से निकलने वाला कचरा कूड़ाघरों तक पहुंचता है। कई बार नहीं उठने की स्थिति में कूड़ा सड़क तक आ जाता है। हालांकि शुक्रवार को बच्चा पार्क और मेघदूत पुलिया वाले कूड़ाघरों से वाहन कूड़ा उठाते मिले।
पॉलिथीन मुक्त अभियान में खर्च हो गए 80 लाख
शहर को पॉलिथीन मुक्त बनाने के लिए नगर निगम अब तक 80 लाख रुपये खर्च कर चुका है। इसके बाद भी दुकानों से लेकर रेहड़ी, पटरी और ठेलियों पर सारा सामान पॉलिथीन में दिया जा रहा है। नगर निगम प्रवर्तन दल पॉलिथीन जब्त करने में लगा है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है।

नहीं हो रहा कूड़ा निस्तारण:
नगर निगम ने शहर से रोजाना निकलने वाले 900 मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण के लिए कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक गांवड़ी में एक मशीन ही लगाई है। यहां 150 मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारण के लिए नगर निगम हर माह करीब 5 लाख दे रहा है। 8 माह से चल रहे प्लांट पर अब तक करीब 40 लाख रुपया खर्च हो चुका है। मंगतपुरम और लोहियानगर में अभी तक प्लांट नहीं लग सके हैं।
शहर साफ करने के लिए ये करने होंगे काम:
- डोर टू डोर कूड़ा उठाने के साथ यूजर चार्ज वसूलना होगा
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत पर्याप्त प्लांट लगाकर कूड़ा निस्तारण करना होगा
- गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग एकत्र करना होगा
- सभी नालों को एसटीपी से जोड़ना होगा
- कूड़ा फैलाने और जलाने वाले पर जुर्माना लगाना होगा।
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