{"_id":"59077b624f1c1b5b35440fec","slug":"1-5-years-wait-create-problem-for-farmers","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेढ़ साल का इंतजार, किसानों का सब्र टूटने के कगार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेढ़ साल का इंतजार, किसानों का सब्र टूटने के कगार
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Tue, 02 May 2017 11:02 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डेढ़ साल के इंतजार के बाद अब किसानों के सब्र का बांध टूटने को है। एमडीए को बोर्ड बैठक में हुए निर्णय केबाद तीन योजनाओं के किसानों को प्रतिकर राशि के बदले भूखंड देने थे, पर अभी तक काम नहीं हुआ है। अब अंतिम समय में फिर से बुलंदशहर प्रकरण में राह ठिठकी है, जिस पर किसानों ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है। किसानों का कहना है कि यह बहानेबाजी है और अब किसान आरपार की लड़ाई की तैयारी में हैं।
यह चल रहा है विवाद
प्रतिकर की मांग को लेकर लोहियानगर, गंगानगर तथा वेदव्यासपुरी योजना के लिए जमीन देने वाले किसानों ने आंदोलन किया। किसानों का कहना था कि शताब्दीनगर की तर्ज पर उन्हें भी मुआवजा दिया जाए। लगातार आंदोलन के बाद इस पर सहमति बनी। 11 नवंबर 2015 को एमडीए बोर्ड बैठक में परिचालन प्रस्ताव के माध्यम से यह प्रस्ताव मंजूर हो चुका है। प्रस्ताव था कि एमडीए के पास इतना पैसा नहीं है। ऐसे में किसानों को उनकी रकम के बदले भूखंड दिए जाएंगे। बावजूद इसके अभी तक इस पर अमल नहीं हुआ है। किसान कई बार इस बाबत विरोध जता चुके हैं। किसान एमडीए की योजनाओं में काम भी बंद करा चुकेहैं। एमडीए अधिकारियों ने बार-बार बात की तो किसानों ने काम शुरू कराए। लेकिन अब फिर से किसान इन्हें बंद कराने पर आमादा है।
यह है किसानों का विरोध
किसानों का कहना है कि अब तक उनके प्रस्ताव पर काम नहीं हुआ। अब एमडीए अधिकारी बुलंदशहर के अरनिया हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में किसानों को दिए मुआवजा प्रकरण को बैरियर बना रहे हैं। वह मामला हाईकोर्ट में है। किसानों केमुताबिक उस प्रकरण से एमडीए का कोई संबंध नहीं है। किसानों की सारी फाइलें पूरी हो चुकी हैं तो एमडीए अब यह अड़ंगा जगा रहा है।
विज्ञापन
आंदोलन का ऐलान
किसानों ने सात मई तक का अल्टीमेटम देते हुए एलान कि है कि इस तारीख तक यदि एमडीए ने सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो एमडीए परिसर में पशु लाकर बांध दिए जाएंगे। महिला किसान यहीं पर चूल्हा सुलगा देंगी। गंगानगर संघर्ष समिति ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि वह योजनाआें में चल रहा काम बंद करा देंगे। गंगानगर में बिजलीघर तथा फ्लैट निर्माण चल रहा है। वेदव्यासपुरी में आईटी पार्क, जोनल पार्क, मिनी स्टेडियम जैसे काम चल हैं। लोहियानगर में फ्लैट बन रहे हैं।
विज्ञापन
यह चल रहा है विवाद
प्रतिकर की मांग को लेकर लोहियानगर, गंगानगर तथा वेदव्यासपुरी योजना के लिए जमीन देने वाले किसानों ने आंदोलन किया। किसानों का कहना था कि शताब्दीनगर की तर्ज पर उन्हें भी मुआवजा दिया जाए। लगातार आंदोलन के बाद इस पर सहमति बनी। 11 नवंबर 2015 को एमडीए बोर्ड बैठक में परिचालन प्रस्ताव के माध्यम से यह प्रस्ताव मंजूर हो चुका है। प्रस्ताव था कि एमडीए के पास इतना पैसा नहीं है। ऐसे में किसानों को उनकी रकम के बदले भूखंड दिए जाएंगे। बावजूद इसके अभी तक इस पर अमल नहीं हुआ है। किसान कई बार इस बाबत विरोध जता चुके हैं। किसान एमडीए की योजनाओं में काम भी बंद करा चुकेहैं। एमडीए अधिकारियों ने बार-बार बात की तो किसानों ने काम शुरू कराए। लेकिन अब फिर से किसान इन्हें बंद कराने पर आमादा है।
विज्ञापन
यह है किसानों का विरोध
किसानों का कहना है कि अब तक उनके प्रस्ताव पर काम नहीं हुआ। अब एमडीए अधिकारी बुलंदशहर के अरनिया हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में किसानों को दिए मुआवजा प्रकरण को बैरियर बना रहे हैं। वह मामला हाईकोर्ट में है। किसानों केमुताबिक उस प्रकरण से एमडीए का कोई संबंध नहीं है। किसानों की सारी फाइलें पूरी हो चुकी हैं तो एमडीए अब यह अड़ंगा जगा रहा है।
विज्ञापन
आंदोलन का ऐलान
किसानों ने सात मई तक का अल्टीमेटम देते हुए एलान कि है कि इस तारीख तक यदि एमडीए ने सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो एमडीए परिसर में पशु लाकर बांध दिए जाएंगे। महिला किसान यहीं पर चूल्हा सुलगा देंगी। गंगानगर संघर्ष समिति ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि वह योजनाआें में चल रहा काम बंद करा देंगे। गंगानगर में बिजलीघर तथा फ्लैट निर्माण चल रहा है। वेदव्यासपुरी में आईटी पार्क, जोनल पार्क, मिनी स्टेडियम जैसे काम चल हैं। लोहियानगर में फ्लैट बन रहे हैं।