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नारी के सम्मान से ही होगा समाज का उत्थान
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Wed, 07 Jan 2015 10:50 PM IST
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कस्बा के राजगद्दी मैदान में चल रहे सात दिवसीय मानस कथा व प्रवचन के छठवें रात मध्य प्रदेश से पधारी कथा वाचिका उमा देवी तिवारी ने भक्तिमय संगीत प्रवचन के दौरान जटायु कथा प्रसंग की चर्चा कर लोगों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में नारी सम्मान की रक्षा के लिये मानव तो क्या पशु पक्षी भी अपनी जान कुर्बान कर देते थे। कहा कि माता सीता के अपहरण के दौरान जब जटायु ने उनका क्रंदन सुना तो खुद को नहीं रोक सका। रावण से माता सीता की रक्षा के लिये वह रावण से युद्ध कर अपनी जान दे दिया।
उमा तिवारी ने कहा कि आज समाज में हर घर में रावण का वास हो गया है। हम लोग अपनी संस्कृति व सभ्यता भूलते जा रहे हैं। कहा कि पुराने समय से ही भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान के बारे में वेद व पुराणों में व्याख्या किया गया ।
रामचरित मानस में राम व भरत प्रकरण का उद्धरण देते हुए कहा कि भाई से प्रेम करना व उन्हें हर हाल में गले लगाने का मार्गदर्शन प्रभु श्रीराम के आदर्श चरित्र से मिलता है। अंत में जटायु के भक्ति भाव की चर्चा करते हुए कहा कि पक्षी कुल में जन्म लेने के बावजूद भी नारी की अस्मत के लिये अपनी जान कुर्बान कर हमेशा के लिये प्रभु के चरणों में अमर हो गया। हमें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए उसका निवर्हन करना चाहिए, ताकि बेहरत समाज का निर्माण हम सब मिलकर सकें। कथा के दौरान गिरीश गुप्ता अंजनी गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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उमा तिवारी ने कहा कि आज समाज में हर घर में रावण का वास हो गया है। हम लोग अपनी संस्कृति व सभ्यता भूलते जा रहे हैं। कहा कि पुराने समय से ही भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान के बारे में वेद व पुराणों में व्याख्या किया गया ।
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रामचरित मानस में राम व भरत प्रकरण का उद्धरण देते हुए कहा कि भाई से प्रेम करना व उन्हें हर हाल में गले लगाने का मार्गदर्शन प्रभु श्रीराम के आदर्श चरित्र से मिलता है। अंत में जटायु के भक्ति भाव की चर्चा करते हुए कहा कि पक्षी कुल में जन्म लेने के बावजूद भी नारी की अस्मत के लिये अपनी जान कुर्बान कर हमेशा के लिये प्रभु के चरणों में अमर हो गया। हमें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए उसका निवर्हन करना चाहिए, ताकि बेहरत समाज का निर्माण हम सब मिलकर सकें। कथा के दौरान गिरीश गुप्ता अंजनी गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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