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नौकरी करने बाहर नहीं जाएंगे, अपने शहर में कमाएंगे

Sat, 23 May 2020 09:06 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 23 May 2020 09:06 PM IST
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Will not go out to work, earn in his city
घोसी। पैदल, निजी वाहनों, ट्रेनों तथा बसों से घर आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। लॉकडाउन में देश के विभिन्न प्रांतों में फंसे हुए थे। काम धंधा ठप हो गया। न तो सरकारी मदद और न ही कंपनी प्रबंधन की तरफ से सहायता मिली। तब यह लोग थक हारकर पैदल ही घर को चल पड़े। उनकी आपबीत सुनकर हर किसी की आंखें भर जा रही थीं। कामगारों का कहना है कि अब दूसरे राज्यों में नौकरी करने नहीं जाएंगे। शहर में ही रोजगार कर परिवार का भरण पोषण करेंगे।
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प्रवासी मजदूरों के काफी घोसी नगर के बड़ागांव मल्लाह टोला निवासी भोला निषाद ने बताया कि हरियाणा के फरीदाबाद में चिलिंग प्लांट में काम करता था। लॉकडाउन में काम बंद हो गया, वेतन भी नहीं मिला और जो पैसा था खत्म हो गया। कई दिनों तक भूखों रहना पड़ा। पैदल ही घर को निकल पड़ा। बाद में सरकारी मदद से बस से घर पहुंचा। अब गैर प्रांत नौकरी करने नहीं जाएंगे। शहर में ही रोजगार कर परिवार का भरण पोषण करेंगे।
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बड़ागांव निवासी नरसिंह निषाद ने बताया कि फरीदाबाद में एक कंपनी में काम करता था। लॉकडाउन में न तो कंपनी से और न ही कोई सरकारी मदद मिली। थकहारकर पैदल ही घर को निकल पड़े। तपती सड़क पर पैदल ही चलना पड़ा। फिर बाद में सरकार की तरफ से ट्रेन, बस की सुविधा मिली तो घर पहुंचे। बताया कि जितना मेहनत वहां करता था अब उतनी मेहनत से अपने शहर में ही रोजगार करने की सोच रहा हूं।
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नगर के बड़गांव निवासी राजकिशोर निषाद ने बताया कि गुजरात के सूरत में एक टेक्सटाइल कंपनी में काम करता था। लॉकडाउन के बाद मजदूरी बंद हो गई। कंपनी मालिक ने भी कोई दया नहीं दिखाई। एक-एक पैैसे को मोहताज हो गए। कई दिनों तक पानी पीकर गुजारा किया। खाने के लाले पड़ गए। दलालों ने भाड़ा ले लिया। उधार मांगकर घर आए। अब दुबारा बाहर काम करने नहीं जाएंगे।

नगर के बड़ागांव मल्लाह टोला निवासी अर्जुन निषाद ने बताया कि गुजरात में टेक्स्टाइल कंपनी में काम करता था। लॉकडाउन में कार्य बंद हो गया। दो माह तक तो किसी तरह से काम चलाया। उधार लेकर घर आया हूं। भविष्य की चिंता सता रही है।
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