जिये भी साथ में और दुनिया को अलविदा भी कहा साथ में, कुछ ऐसी है इस रिश्ते की हकीकत
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कहते हैं फिल्में भी हकीकत और कुछ अफसाना होती हैं, तभी तो दशकों पहले आया बॉलीवुड का ये सदाबहार गीत छोड़ेगें न हम तेरा साथ ओ साथी मरते दम तक आज भी लोगों के लबों पर मुस्कान ला ही देता है। और गाहे-बगाहे सामने आने वाली रिश्ते की मिसाल की हकीकत ऐसे गानों की प्रासंगिकता को बनाए रखती है।
ऐसा ही कुछ मऊ जिले में हुआ, जहां साथ जिएंगे साथ मरेंगे की तर्ज पर वृद्ध पति-पत्नी का निधन हो गया। मधुबन नगर पंचायत के वार्ड नं 9 खीरीकोठा में 20 फरवरी की रात करीब दस बजे 80 वर्षीय वृद्ध महिला सरस्वती देवी का निधन हो गया। पत्नी की मौत की जानकारी होने पर एक घण्टे बाद पति की भी मौत हो गई। एक साथ दंपति के मौत की चर्चा पूरे क्षेत्र में होती रही। वही परिजनों ने पूरे गाजे-बाजे के साथ दोनों का अंतिम संस्कार दोहरीघाट स्थित मुक्तिधाम में किया।
गुरूवार की रात दस बजे सुशील कुमार पांडेय की 80 वर्षीय पत्नी सरस्वती देवी के निधन हो गया। जिसके एक घंटे बाद 82 वर्षीय सुशील पांडेय भी शोक सहन नहीं कर पाएं और उनका निधन हो गया। अंतिम संस्कार में एमएलसी लीलावती कुशवाहा, चेयरमैन प्रतिनिधि शंकर मद्धेशिया सहित आस-पास गांव के प्रबुद्ध लोगों के अलावा सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।
मृत दंपत्ति के पुत्र अवधेश कुमार पांडेय ने बताया कि माता पिताजी के आपस के संबंध बड़े ही मधुर थे। दोनों एक दूसरे के बिना नहीं रह पाते थे, इसकी का परिणाम रहा कि पहले मां, बाद में पिता जी ने दुनिया छोड़ दिया। बोले इस उम्र में भी मां पिता जी के लिए खाना आदि बनाने का काम करती थी।
वहीं पिताजी मां की तबियत खराब होने पर खुद अपने हाथों से उसे दवा खिलाने के साथ उसका ख्याल रखते थे। दोनों ने एक साथ जीने के साथ एक साथ दुनिया से कूच भी किया। पड़ोसी डॉ. प्रेमभूषण पांडेय ने बताया कि दिवंगत सुशील पांडेय और सरस्वती से हम लोग जीवन जीना सिखते थे। सुशील जी अपनी पत्नी को फूल भी देते थे, उम्र होने के बाद भी दोनों जिंदादिल का जीवन जीते थे।