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बाल निकेतन फ्लाइ ओवर पर कौन बोल रहा है झूठ

Wed, 20 Oct 2021 10:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 20 Oct 2021 10:18 PM IST
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Who is lying on Bal Niketan flyover
मऊ। शहर के सबसे व्यस्ततम स्थान बाल निकेतन रेलवे क्रॉसिंग पर फ्लाई ओवर निर्माण अफसरशाही के चलते विलंबित हो रहा है। सेतु निगम के अधिकारी ओवर ब्रिज निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदार बता रहे हैं। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि कौन से विभाग के अधिकारी झूठ बोल रहे हैं।
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जिलाधिकारी और डीआरएम की संयुक्त बैठक में लिए गए निर्णय के बाद शासन से सहमति पत्र मिलने में 20 महीने का समय लगा। रेलवे ने पुल का ड्राफ्ट स्वीकृत करने में नौ महीने लगा दिया। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद होने वाली देरी लोगों की समझ से परे है। सेतु निगम के अफसर संबंधित जमीनों की भू अध्यप्ति की कापी सहित संशोधित आगणन (रिपोर्ट) मांग रहे हैं। फ्लाई ओवर का नक्शा पास होकर सेतु निगम के पास पड़ा है। संशोधित आगणन (रिपोर्ट) की शासन से मंजूरी मिलने के बाद फ्लाई ओवर का निर्माण शुरू करेगा। मालूम हो कि फ्लाई ओवर की लागत 95 करोड़ है।
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बाल निकेतन क्रॉसिंग पर ट्रेनों के आवागमन पर 24 घंटे में कम से कम लगभग 36 बार फाटक बंद किया जाता है। फाटक बंद होने के बाद दोनों तरफ सैकड़ों वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इस संबंध में लोकदल के प्रदेश सचिव किसान नेता देवप्रकाश राय ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके मांग की किया कि जिला प्रशासन और रेलवे को बाल निकेतन पर फ्लाई ओवर अथवा अंडरब्रिज बनाने का आदेश दिया जाए। चार मई 2018 को उच्च न्यायालय के आदेश पर डेढ़ महीने बाद 26 जून 2018 को डीएम और डीआरएम की हुई बैठक में फ्लाई ओवर बनाने की सहमति के साथ शासन और रेलवे के उच्चाधिकारियों से स्वीकृति लेने की कवायद शुरू की गई।
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दो जुलाई 2018 को तत्कालीन जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने प्रमुख सचिव लोक निर्माण को संस्तुति के लिए पत्र भेजा। ओवरब्रिज निर्माण की जद में आने वाले 296 अतिक्रमण कारियों को हटाने की सूचना दी तथा फ्लाई ओवर निर्माण में 95 करोड़ का आगणन बनाकर शासन को भेजा गया। शासन में यह प्रकरण 20 महीनों तक लंबित रहा।
20 महीने बाद आठ अप्रैल 2020 को प्रमुख सचिव लोक निर्माण नितिन रमेश गोकर्ण ने बाल निकेतन पर फ्लाई ओवर के लिए सहमति पत्र जारी किया। सेतु निगम द्वारा बनाए गए ड्राफ्ट में आपत्ति जताते हुए रेलवे के इंजीनियरों के संशोधन के सुझाव पर सेतु निगम ने दस दस महीने लगा दिए गए। किसान नेता देवप्रकाश राय का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी ही एक दूसरे पर टालमटोल कर रहे हैं। सत्ता से जुड़े नेताओं और अधिकारियों को जनहित से जुड़े इस गंभीर मामले के निदान के लिए संवेदना बरतते हुए आगे आना चाहिए।
आजमगढ़ में यूपी सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक आरएस राय ने बताया कि फ्लाई ओवर की जद में आने वाली जमीनों के अध्यप्ति की फोटो कापी सहित संशोधित आगणन (रिपोर्ट) लोक निर्माण विभाग से नहीं मिली है। संशोधित आगणन (रिपोर्ट) मिलने के बाद मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद फ्लाई ओवर का निर्माण शुरू किया जाएगा।

वहीं लोक निर्माण विभाग के अधीशासी अभियंता जितेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि विभाग की ओर से फलाई ओवर संबंधी समस्त कागजात सेतु निगम के अधिकारियों को दे दिए गए हैं।
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