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UP News: बाढ़ का दंश झेल रहा यूपी का यह गांव, पाइप का सहारे पार कर रहे नदी; सुविधाओं की खुली पोल

Fri, 30 Aug 2024 01:47 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मऊ।
अमर उजाला नेटवर्क, मऊ। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 30 Aug 2024 01:47 PM IST
सार

Mau News: सरयू नदी बढ़ जाने से ग्रामीणों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। किसी परिजन के बीमार हो जाने पर उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए परेशानियां होती हैं। बच्चों को कंधे पर बिठाकर स्कूल ले जाया जाता है। इसको लेकर प्रशासन और प्रधान से शिकायतें की गईं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, ऐसा स्थानीय लोगों का आरोप है।

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village of UP facing brunt of floods in mau people crossing the river help of pipes lack of facilities exposed
बाढ़ के पानी में पाइप बनी सहारा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मऊ के दुबारी में बाढ़ ग्रस्त इलाकों में लगातार प्रशासन द्वारा सरयू नदी के पानी से घिरे लोगों को सुविधाएं मुहैया कराने का दावा किया जा रहा है। लेकिन इस दावे पर दुबारी ग्राम पंचायत के हरीलाल का पुरवा के लोगों ने सवाल उठा दिया।

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दरअसल, जब ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंची संवाद टीम को लोगों ने बताया कि पुरवा को जोड़ने वाला कच्चा मार्ग का करीब पंद्रह फीट हिस्सा चार दिन पहले नदी के तेज प्रवाह में कटकर समा गया है। बावजूद अब तक मधुबन तहसील का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा न ही गांव का प्रधान। 
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इस बीच टीम को पुरवे से महज 200 मीटर दूर बनी बाढ़ चौकी पर ही कोई मौजूद नहीं मिला। वहीं गांव में नाव की सुविधा होने के बाद कटाव से बहे रास्ते में पुरवे में पेयजल आपूर्ति के लिए बिछाए नलजल की पाइप लाइन से कुछ युवकों को पार करते दिखे। वहीं गांव की महिलाएं बुजुर्ग खेत में चार से पांच फीट तक भरे पानी के बीच से आते दिखे।

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दिक्कतें झेल रहे ग्रामीण
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान एक महिला जब खेत में लगे पानी से अपने नवजात बेटी को लेकर जाती दिखी पूजा से उसके पुरवे में एक नाव की सुविधा होने के बाद ऐसा करने की बात पर सवाल किया गया। जिस पर पूजा भारती ने बताया कि दो सौ से ज्यादा घर होने के बाद भी यहां केवल एक नाव की सुविधा है।

बताया कि उसकी एक साल की बच्ची को उल्टी दस्त होने पर वह काफी देर तक नाव का इंतजार करता रहा। उसके बाद वह इस पानी के बीच से गुजरी और अपनी बेटी को डॉक्टर के यहां लेकर पहुंची।

वहीं गांव के मोतीलाल ने बताया कि उसकी नातिन की तबियत खराब होने पर वह मजबूरन वे उसे कंधे पर बैठाकर पानी के बीच से अस्पताल लेकर गए थे। गांव के बब्बन, हरीलाल, शैलेंद्र, रामप्यारे ने बताया कि चार दिन पहले यह मार्ग नदी के तेज प्रवाह में कट गया। लेकिन इसके बाद भी न तो बड़का साहब लोग आईना, न ही गांव का प्रधान।

गांव के कुछ युवकों ने बताया कि बच्चें, बुजुर्ग तो खेत में लगे पानी, जिसकी गहराई चार से पांच फीट तक है, उसके बीच से आवाजाही कर रहे हैं, लेकिन जो तैराक युवक या किशोर हैं, वह कटे हुए हिस्से को पार कर आवाजाही कर रहे हैं। इस दौरान कटे हुए हिस्से के बीच से गुजरी नलजल की पाइप लाइन उनके लिए इसमें सहायक बन रही है।

village of UP facing brunt of floods in mau people crossing the river help of pipes lack of facilities exposed
बाढ़ के पानी में पाइप बनी सहारा। - फोटो : अमर उजाला

थर्माकोल से बना दी नाव
हरीलाल पुरवा निवासी बब्बन ने बताया कि पुरवे की आबादी के सापेक्ष कम से कम वहां तीन नाव होनी चाहिए थी, लेकिन एक नाव जिसकी क्षमता भी पांच से छह हैं, ऐसे में उनके द्वारा थर्माकोल और बांस से एक नाव बनाया है। लेकिन इस नाव पर केवल दो लोग ही एक बार में आवाजाही कर पा रहे है। उधर मधुबन तहसील के एसडीएम अखिलेश यादव का दावा है कि बाढ़ग्रस्त इलाकों में 90 नावें चल रही हैं जबकि 170 नावें अतिरिक्त है, जिन्हें सुरक्षित रखा गया है।

लेखपाल, पशु चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, सुरक्षाकर्मी, लेकिन चारों गायब
टीम को पुरवा से महज 200 मीटर दूर पर बाढ़ चौकी तो बनी हुई मिली, लेकिन इस दौरान चार विभागों का कोई भी कर्मी वहां मौजूद नहीं मिला। जबकि नियमानुसार बाढ़ चौकी पर राजस्व विभाग से क्षेत्रीय लेखपाल, पशुपालन विभाग से एक पशु चिकित्सक, स्वास्थ्य विभाग से एक स्वास्थ्यकर्मी और सुरक्षा को लेकर एक पुलिसकर्मी की तैनाती होनी चाहिए। तीन घंटे से अधिक समय तक मौजूद रही अमर उजाला टीम को बाढ़ चौकी पर इसमें से कोई मौजूद नहीं मिला।

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