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Mau News: बंद कताई मिल की छत गिरने से दो बच्चों की मौत

Mon, 12 May 2025 12:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 12 May 2025 12:18 AM IST
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Two children died due to collapse of the roof of a closed spinning mill
हलधरपुर थाना क्षेत्र के बिलौझा स्थित 40 साल से बंद कताई मिल परिसर में रविवार को चार किशोर आम बीनने गए थे। चारों पर जर्जर मिल भवन की छत का एक हिस्सा और दीवार गिर गई। मलबे के नीचे दबने से दो किशोरों की मौत हो गई और दो किशोर बच गए। हादसे की सूचना मिलते ही एडीएम, एएसपी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने तीन बुल्डाेजर से जर्जर भवन को ध्वस्त करा दिया। एएसपी महेश सिंह अत्री ने बताया कि हादसे में बिलौझा निवासी शिवम (10) और निहाल (10) की मौत हुई है। शिवम और निहाल अपने दो अन्य दोस्तों के साथ बकरी चराते हुए रतनपुरा-भीमपुरा मार्ग पर चार दशक से बंद सुबसा कताई मिल परिसर में आम बीनने चले गए थे। जर्जर मिल भवन की की छत और दीवार ढहने से शिवम और निहाल मलबे के नीचे दब गए। सूचना मिलते ही हलधरपुर थाने की टीम तीन बुल्डोजर के साथ मौके पर पहुंचकर रेसक्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। टीम ने सबसे पहले शिवम काे मलबे से निकालपुर रतनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। निहाल को मलबे से निकालने में टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। करीब तीस मिनट के बाद उसका शव बाहर निकाला गया।
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बाल बाल बच गए अरुण और लड्डू

रतनपुरा। पिता शिवशंकर ने बताया कि शिवम दो भाई और एक बहन में दूसरे नंबर पर था। वहीं निहाल दो भाइयों में सबसे बड़ा है। उसका छोटा भाई अरुण भी अपने भाई के साथ आम बीनने के लिए मिल परिसर के अंदर गया था। लेकिन अरुण और लड्डू बाल बाल बच गए। घटना के बाद गांव में सन्नाटा पसरा गया। गांव के लोगों ने बताया कि मिल के खंडहर में अक्सर बच्चे खेलते थे। लोग जानवरों को चराने के लिए जाते थे। छाया देखकर लोग बैठते भी थे।
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बोेले प्रधान- गांव से बाहर था भवन, इसलिए ढहाने के लिए नहीं भेजे प्रस्ताव
मऊ। हादसे के बाद अमर उजाला की टीम जर्जर भवन से जिला प्रशासन को अवगत कराने के संबंध में भेजे गए प्रस्ताव के बारे ग्राम पंचायत सचिव संतोष कुमार से जानकारी लेने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि रविवार का अवकाश है तो इसलिए उन्हें घटना की जानकारी नहीं है। प्रस्ताव पर भी उन्होंने कुछ नहीं कहा। वहीं ग्राम प्रधान ओमनरायण ने कहा कि जर्जर भवन गांव से बाहर है, इसलिए भवन को ढहाने के लिए प्रस्ताव प्रशासन को नहीं भेजा।
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1978 की बनी थी मिल
रतनपुरा। ग्राम प्रधान के मुताबिक, बिलौझा ग्राम पंचायत में सन् 1978 में कानपुर से एक व्यापारी आया था। उसने यहां मानव संसाधन को देखते हुए सुबसा कताई मिल की स्थापना की थी। शुरू में मिल खूब चली। मिल में लगभग दो ढाई सौ लोग काम करते थे। साम्यवादी आंदोलनकारी के चलते 40 साल पहले व्यवसायी ने मिल बंद कर दिया।
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