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ट्यूबवेल खराब तो कहीं पाइप लाइन क्षतिग्रस्त
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हलधरपुर में बदहाल पड़ा ओवरहेड टैंक।
- फोटो : MAU
मऊ। गर्मी के मौसम में इस बार पेयजल की जरूरत को पूरा कर पाना आसान नहीं होगा। जिले के अधिकतर ओवरहेड टैंक तीस साल की अपनी मियाद पूरी कर चुके हैं। कहीं टैंक तो कहीं ट्यूबवेल खराब है। वहीं कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसकी वजह से अक्सर पेयजल आपूर्ति बाधित होती है। पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग को लेकर दुबारी, रतनपुरा और कसारा में लोग प्रदर्शन भी कर चुके हैं। जलनिगम ने पेयजल परियोजनाओं की मरम्मत के लिए बजट बना कर शासन को भेजा है लेकिन अभी बजट नहीं मिला है।
जिले में पेयजल आपूर्ति के लिए जल निगम की ओर से ग्राम समूह परियोजना के तहत 15 ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। वर्तमान में इसमें से आठ ओवर हेंड टैंक नगर पालिका मऊ और सात ओवरहेड टैंक जल निगम से संचालित होते हैं। जलनिगम की ओर से बनाए गए ओवरहेड टैंक की समय अवधि 30 साल होती है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो कोपागंज ब्लाक के करीब 20 गांवों में जलापूर्ति के लिए कसारा में ओवरहेड टैंक का निर्माण 1977-1978 में हुआ था। मधुबन तहसील मुख्यालय पर 1974-75 में ओवरहेड टैंक का निर्माण हुआ था। 1974-75 में घोसी में बने ओवरहेड टैंक का निर्माण हुआ था। दोहरीघाट ब्लाक के गोठा स्थित ओवर हैड टैंक का निर्माण 1972-73, दुबारी में ओवर हैंड टैंक का निर्माण 1972-73, हलधरपुर में ओवरहेड टैंक का निर्माण 1978-79 में हुआ था। रतनपुरा में ओवरहेड टैंक का निर्माण 1978-79 में हुआ था। ये ओवर हेड टैंक अपनी मियाद पूरी कर चुके हैं। ओवरहेड टैंकों में लगे ट्यूबवेल 30 साल से ज्यादा पुराने है जिससे उनके नलकूप खराब होते रहते हैं। इसके अलावा पाइप लाइन भी जर्जर हो चुकी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो जलनिगम ने बीते वर्ष पुराने हो चुके ओवरहेड टैंक की मोटर, बोरिंग आदि को दुरुस्त करने के लिए 5 करोड़ 20 लाख रुपये का बजट बनाकर शासन को भेजा था। साथ ही विभिन्न योजनाओं के तहत 28 नये ओवरहेड टैंक का निर्माण कराने का भी प्रस्ताव शासन को भेजा है। बजट नहीं मिलने से निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
कोट
ओवरहेड टैंकों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। शासन से हरी झंडी मिलने पर आगे का कार्य शुरू किया जाएगा। फिलहाल जो संसाधन मौजूद हैं, उसी से काम चलाया जा रहा है।-एमए किदवई, अधिशासी अभियंता, जलनिगम
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इनसेट
दुबारी, हलधरपुर, रतनपुरा में सबसे अधिक समस्या
पेयजल परियोजनाओं की मियाद पूरी होने के कारण तकनीकी गड़बड़ी से पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही है। जिले के रतनपुरा, दुबारी, हलधरपुर, कसारा में सबसे अधिक समस्या है। दुबारी में पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से आए जलभराव होता है और उपभोक्ताओं के घरों तक प्रेशर से पानी नहीं पहुंचता है।
इनसेट
नगर में आठ में से चार टैंकों से होती है पेयजल आपूर्ति
नगर में नगर पालिका की ओर से पहले आठ ओवरहेड टैंकों से जलापूर्ति की जाती थी। बीते दो साल से चार ओवरहेड टैंकों में लगे ट्यूबवेल खराब हो गए हैं। इसके चलते वर्तमान में चार ओवरहेड टैंकों से नगर के 42 वार्डों में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। नगर पालिका के जलकर प्रभारी पीएन मिश्रा ने बताया कि चारों ओवरहेड टैंक के ट्यूबवेल दुरुस्त करने का प्रस्ताव बनाकर जल निगम को भेजा गया है।
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जिले में पेयजल आपूर्ति के लिए जल निगम की ओर से ग्राम समूह परियोजना के तहत 15 ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। वर्तमान में इसमें से आठ ओवर हेंड टैंक नगर पालिका मऊ और सात ओवरहेड टैंक जल निगम से संचालित होते हैं। जलनिगम की ओर से बनाए गए ओवरहेड टैंक की समय अवधि 30 साल होती है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो कोपागंज ब्लाक के करीब 20 गांवों में जलापूर्ति के लिए कसारा में ओवरहेड टैंक का निर्माण 1977-1978 में हुआ था। मधुबन तहसील मुख्यालय पर 1974-75 में ओवरहेड टैंक का निर्माण हुआ था। 1974-75 में घोसी में बने ओवरहेड टैंक का निर्माण हुआ था। दोहरीघाट ब्लाक के गोठा स्थित ओवर हैड टैंक का निर्माण 1972-73, दुबारी में ओवर हैंड टैंक का निर्माण 1972-73, हलधरपुर में ओवरहेड टैंक का निर्माण 1978-79 में हुआ था। रतनपुरा में ओवरहेड टैंक का निर्माण 1978-79 में हुआ था। ये ओवर हेड टैंक अपनी मियाद पूरी कर चुके हैं। ओवरहेड टैंकों में लगे ट्यूबवेल 30 साल से ज्यादा पुराने है जिससे उनके नलकूप खराब होते रहते हैं। इसके अलावा पाइप लाइन भी जर्जर हो चुकी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो जलनिगम ने बीते वर्ष पुराने हो चुके ओवरहेड टैंक की मोटर, बोरिंग आदि को दुरुस्त करने के लिए 5 करोड़ 20 लाख रुपये का बजट बनाकर शासन को भेजा था। साथ ही विभिन्न योजनाओं के तहत 28 नये ओवरहेड टैंक का निर्माण कराने का भी प्रस्ताव शासन को भेजा है। बजट नहीं मिलने से निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
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ओवरहेड टैंकों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। शासन से हरी झंडी मिलने पर आगे का कार्य शुरू किया जाएगा। फिलहाल जो संसाधन मौजूद हैं, उसी से काम चलाया जा रहा है।-एमए किदवई, अधिशासी अभियंता, जलनिगम
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दुबारी, हलधरपुर, रतनपुरा में सबसे अधिक समस्या
पेयजल परियोजनाओं की मियाद पूरी होने के कारण तकनीकी गड़बड़ी से पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही है। जिले के रतनपुरा, दुबारी, हलधरपुर, कसारा में सबसे अधिक समस्या है। दुबारी में पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से आए जलभराव होता है और उपभोक्ताओं के घरों तक प्रेशर से पानी नहीं पहुंचता है।
इनसेट
नगर में आठ में से चार टैंकों से होती है पेयजल आपूर्ति
नगर में नगर पालिका की ओर से पहले आठ ओवरहेड टैंकों से जलापूर्ति की जाती थी। बीते दो साल से चार ओवरहेड टैंकों में लगे ट्यूबवेल खराब हो गए हैं। इसके चलते वर्तमान में चार ओवरहेड टैंकों से नगर के 42 वार्डों में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। नगर पालिका के जलकर प्रभारी पीएन मिश्रा ने बताया कि चारों ओवरहेड टैंक के ट्यूबवेल दुरुस्त करने का प्रस्ताव बनाकर जल निगम को भेजा गया है।