तमसा सूखी तो तरसेंगे पानी को
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नदी के सूखने से तटवर्ती इलाकों में भू गर्भजल स्तर पहले की अपेक्षा काफी नीचे गिर गया है। आज से महज दस साल पहले तक तमसा नदी के आस पास स्थित हजारों हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेतों की सिंचाई का माध्यम एकमात्र तमसा नदी का पानी ही था। लोग इस नदी में स्नान करते और तटों पर बसे मंदिरों में पूजा अर्चना करते थे।
नौसेमर का पौराणिक बारहदुअरिया शिव मंदिर तमसा के किनारे है। यहां पर सावन भर श्रद्धालुुओं का रेला रहता है। लोग नदी में स्नानकर शिव का जलाभिषेक करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां विशेष मेला लगता है। हजारों लोग स्नान करते हैं लेकिन नदी के प्रदूषित होने से लोग इसमें नहाने से परहेज करने लगे हैं। पहले नदी के तटवर्ती इलाकों में तीन से चार मीटर नीचे पानी मिल जाता था लेकिन अब जलस्तर खिसक कर आठ मीटर नीचे चला गया है।
इस बाबत लंबे समय से तमसा के लिए संघर्ष कर रहे गंगा तमसा बचाओ अभियान के संयोजक ज्ञानेंद्र मिश्र कहते हैं कि हमें तमसा को बचाना है। यह हम सभी नागरिकों का पावन कर्तव्य है। तमसा के प्रवाह को अविरल बनाना होगा। लेकिन यह केवल सरकारी मशीनरी के भरोसे नहीं हो सकता। इसके लिए प्रत्येक नागरिक को संकल्प लेना होगा। तमसा बचेगी तभी हमारी संस्कृति बचेगी , पर्यावरण बचेगा और मानव जीवन स्वस्थ्य और सुरक्षित बचेगा । पशु पक्षी बचेंगे।