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Mau News: ऑर्थोसर्जन और टेक्निशियन की कमी से शो पीस बना ट्रामा सेंटर
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जिले में पच्चीस लाख की आबादी के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2017 में करोड़ों की लागत से ट्रामा सेंटर का निर्माण कराया गया है लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से ट्रामा सेंटर किसी काम नहीं आ रहा है।
अस्पताल में सीएमएस सहित दो आर्थोसर्जन की तैनाती की गई है, बावजूद गंभीर मरीजों के उपचार की सुविधा नदारद है। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का आलम यह है कि छह वर्ष पूर्व लगाई गई सीआर्म मशीन खराब पड़ी है। आर्थोसर्जन हड्डी रोग से सामान्य प्रभावित मरीजों को परामर्श तो दे देते हैं लेकिन बड़ा ऑरेशन करने की स्थिति में बीएचयू ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया जाता है। जिम्मेदार स्टाफ कमी और बड़े ऑपरेशन में लगने वाले सामान न होने की बात कहकर अपने दायित्वों की खानापूर्ति करते दिख रहे हैं।
कोविडल काल के दौरान ट्रामा सेंटर को कोविड जांच के रूप में प्रयोग किया जा रहा था। ट्रामा सेंटर के अधिकतर कमरों में ताला लटका रहता है। इसके चलते गंभीर रूप से आने वाले मरीजों का उपचार जिला अस्पताल के पुराने हड्डी कक्ष में किया जा रहा है। ट्रामा सेंटर बनने के बाद कभी मेजर ऑपरेशन नहीं हो सका है। यहां आने वाले मरीजों का केवल प्लास्टर ही चढ़ाया जा रहा है।
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क्या है सीआर्म मशीन
मऊ। सीआर्म मशीन हड्डी से जुड़े आपरेशन के काम में आती है। इस मशीन से डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान हड्डी या शरीर के भीतर स्क्रीन पर देख पाते हैं। इसके जरिए छोटे से बड़ा ऑपरेशन किया जा सकता है। सीआर्म मशीन द्वारा कमर, कुल्हे और शरीर के अन्य जटिल आर्थोपेडिक सर्जरी आसानी से हो जाती है।
डॉ. एपी गुप्ता, सीएमएस जिला अस्पताल टेक्निशियन की कमी के चलते सीआर्म मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। वहीं, अस्पताल में एक ही ऑर्थोसर्जन है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों का उपचार उनके द्वारा किया जा रहा है।
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अस्पताल में सीएमएस सहित दो आर्थोसर्जन की तैनाती की गई है, बावजूद गंभीर मरीजों के उपचार की सुविधा नदारद है। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का आलम यह है कि छह वर्ष पूर्व लगाई गई सीआर्म मशीन खराब पड़ी है। आर्थोसर्जन हड्डी रोग से सामान्य प्रभावित मरीजों को परामर्श तो दे देते हैं लेकिन बड़ा ऑरेशन करने की स्थिति में बीएचयू ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया जाता है। जिम्मेदार स्टाफ कमी और बड़े ऑपरेशन में लगने वाले सामान न होने की बात कहकर अपने दायित्वों की खानापूर्ति करते दिख रहे हैं।
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कोविडल काल के दौरान ट्रामा सेंटर को कोविड जांच के रूप में प्रयोग किया जा रहा था। ट्रामा सेंटर के अधिकतर कमरों में ताला लटका रहता है। इसके चलते गंभीर रूप से आने वाले मरीजों का उपचार जिला अस्पताल के पुराने हड्डी कक्ष में किया जा रहा है। ट्रामा सेंटर बनने के बाद कभी मेजर ऑपरेशन नहीं हो सका है। यहां आने वाले मरीजों का केवल प्लास्टर ही चढ़ाया जा रहा है।
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क्या है सीआर्म मशीन
मऊ। सीआर्म मशीन हड्डी से जुड़े आपरेशन के काम में आती है। इस मशीन से डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान हड्डी या शरीर के भीतर स्क्रीन पर देख पाते हैं। इसके जरिए छोटे से बड़ा ऑपरेशन किया जा सकता है। सीआर्म मशीन द्वारा कमर, कुल्हे और शरीर के अन्य जटिल आर्थोपेडिक सर्जरी आसानी से हो जाती है।
डॉ. एपी गुप्ता, सीएमएस जिला अस्पताल टेक्निशियन की कमी के चलते सीआर्म मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है। वहीं, अस्पताल में एक ही ऑर्थोसर्जन है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों का उपचार उनके द्वारा किया जा रहा है।