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मऊ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया जा रहा पढ़ाने का प्रशिक्षण, चलेंगे प्री प्राइमरी स्कूल
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मऊ। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर अब प्ले स्कूल आंगनबाड़ी केंद्रों में शुरू किए जाएंगे। शासन के आदेश पर इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर संचालित होने वाले इस स्कूल का नाम प्री-प्राइमरी स्कूल होगा। इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को अपडेट कर वहां स्कूल की तरह व्यवस्था दी जाएगी, ताकि बच्चों का वहां मन लगे, इसके लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के साथ बेसिक शिक्षा विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्री प्राइमरी स्कूल को शुरू करने के लिए जिले के सभी नौ ब्लाकों पर दो-दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। नए शिक्षा सत्र से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को शिक्षा दी जाएगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश कुमार ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दी जाने वाली ट्रेनिंग में बच्चे को पढ़ाने के तरीके, प्री-प्राइमरी कक्षाओं के महत्व और संचालन के बारे में बताया जा रहा है। अर्ली चाइल्ड केयर एजूकेशन (ईसीसीई) के तहत टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मैटेरियल) बनाने की भी जानकारी दी जा रही है।
बच्चों को दी जाएगी रोचक तरीके से शिक्षा
मऊ। जिले के 2587 आंगनबाड़ी केंद्रों में दो लाख 46 हजार 146 बच्चे पंजीकृत हैं। नई व्यवस्था में खास तौर पर छह वर्ष तक के उन बच्चों को बच्चों को शामिल किया जाएगा, जो स्कूल नहीं जाते हैं। इन बच्चों को रोचक तरीके से शिक्षा दी जाएगी। बच्चों की आयु के अनुरूप उनकी गतिविधियों क्षमताओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इस दौरान उन्हें पिक्चर चार्ट, एक्टीविटी शीट, प्लास्टिक बॉल, फ्रूट टॉय, वेजिटेबल टॉय, डोमेस्टिक एनिमल टॉय, समुद्री जानवरों का खिलौना, फेस मास्क, अल्फाबेट सेट्स देकर बच्चों को रोचक तरीके से शिक्षित किया जाएगा।
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प्री प्राइमरी की तर्ज पर आंगनबाड़ी केद्रों के संचालित होने से बच्चों में बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक व रचनात्मक विकास होगा। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें अब प्राइमरी की नर्सरी तैयार करनी है। नौनिहालों की बुनियादी शिक्षा मजबूत हो, इसके लिए जल्द ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन शुरू होगा।
- राधेश्याम पाल, सदर सीडीपीओ
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प्री प्राइमरी स्कूल को शुरू करने के लिए जिले के सभी नौ ब्लाकों पर दो-दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। नए शिक्षा सत्र से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को शिक्षा दी जाएगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश कुमार ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दी जाने वाली ट्रेनिंग में बच्चे को पढ़ाने के तरीके, प्री-प्राइमरी कक्षाओं के महत्व और संचालन के बारे में बताया जा रहा है। अर्ली चाइल्ड केयर एजूकेशन (ईसीसीई) के तहत टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मैटेरियल) बनाने की भी जानकारी दी जा रही है।
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बच्चों को दी जाएगी रोचक तरीके से शिक्षा
मऊ। जिले के 2587 आंगनबाड़ी केंद्रों में दो लाख 46 हजार 146 बच्चे पंजीकृत हैं। नई व्यवस्था में खास तौर पर छह वर्ष तक के उन बच्चों को बच्चों को शामिल किया जाएगा, जो स्कूल नहीं जाते हैं। इन बच्चों को रोचक तरीके से शिक्षा दी जाएगी। बच्चों की आयु के अनुरूप उनकी गतिविधियों क्षमताओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इस दौरान उन्हें पिक्चर चार्ट, एक्टीविटी शीट, प्लास्टिक बॉल, फ्रूट टॉय, वेजिटेबल टॉय, डोमेस्टिक एनिमल टॉय, समुद्री जानवरों का खिलौना, फेस मास्क, अल्फाबेट सेट्स देकर बच्चों को रोचक तरीके से शिक्षित किया जाएगा।
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प्री प्राइमरी की तर्ज पर आंगनबाड़ी केद्रों के संचालित होने से बच्चों में बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक व रचनात्मक विकास होगा। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें अब प्राइमरी की नर्सरी तैयार करनी है। नौनिहालों की बुनियादी शिक्षा मजबूत हो, इसके लिए जल्द ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन शुरू होगा।
- राधेश्याम पाल, सदर सीडीपीओ