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Mau News: दो ब्लॉक के तीन गांव टीबी मुक्त, दूसरे चरण मेंं 154 गावों में कवायद जारी
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टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान के तहत जिले को पूरे प्रदेश में नौवां स्थान मिला है। जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि सात माह पहले शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। इस महीने यह रिपोर्ट जारी की गई है। इसके तहत जिले को यह उपलब्धि हासिल हुई है। जिले में अभी तक दो ब्लॉक के तीन गांवों को टीबी मुक्त कराया गया है। अब दूसरे चरण की भी शुरुआत की गई है। दिसंबर में अंतिम रिपोर्ट आने के बाद दूसरे चरण में शामिल गांवों को भी टीबी मुक्त ग्राम पंचायत घोषित किया जाएगा। 2025 तक पूरे देश को टीबी मुक्त करने के लिए शासन स्तर से अनेक प्रकार की योजनाओं का संचालन हो रहा है।
2023 में ग्राम पंचायत को टीबी मुक्त करने की नई कवायद शुरू की गई थी। 2023 में दोहरीघाट ब्लॉक के जमुनीपार और निधिया गांव जबकि मुहम्मदसबाद गोहना ब्लॉक के नरौनी गांव को टीबी मुक्त ग्राम पंचायत का प्रमाण पत्र दिया गया था। वहीं 2024 में अभी तक 154 ग्राम पंचायत टीबी मुक्त के कगार पर हैं। दिसंबर में कुछ अंतिम पहलुओं पर होने वाली जांच की रिपोर्ट आने के बाद इन सभी ग्राम पंचायत को टीबी मुक्त का दर्जा दिया जाएगा। अब 27 मास्टर ट्रेनर अपने ब्लॉक क्षेत्र में ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, पंचायत सहायक टीबी मुक्त ग्राम पंचायत के लिए बुधवार को प्रशिक्षण देंगे।
एक हजार की आबादी पर 30 लोगों की होती हैं जांच
डीपीपीएम जयदेश यादव ने बताया कि टीबी मुक्त ग्राम पंचायत के लिए ग्राम पंचायत में एक हजार की आबादी पर 30 लोगों के टीबी की जांच होती है। 2023 में टीबी मुक्त ग्राम जमुनीपार में 2133 आबादी में से 159 जबकि निधिया में 1185 में से 45 जांच हुई थी। इसमें एक भी टीबी का मरीज नहीं मिला था। वहीं मुहम्मदाबाद गाेहना ब्लॉक के नरौनी गांव में 2084 आबादी की जांच में 159 लोगों की जांच में एक टीबी का मरीज मिला था।
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रानीपुर में सबसे ज्यादा टीबी मरीज
जिले में 4017 मरीज हैं जो कि बीते वर्ष की तुलना में मिले 4480 मरीज से कम है। लेकिन अभी डेढ़ माह का समय शेष है। वर्तमान में सबसे ज्यादा मरीज रानीपुर ब्लाक में मिले हैं, जहां रानीपुर में 210 तो चिरैयाकोट में 110 मरीज हैं। इसके बाद मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक में 290, फतेहपुर मंडाव ब्लॉक में 283, दोहरीघाट में 202, बड़राव में 192, परदहा में 196, कोपागंज में 213 मरीजों की संख्या है। इसमें पुरुष मरीजों की संख्या 2396 तो महिला मरीजों की संख्या 1856 वहीं दो ट्रांसजेंडर मरीज हैं।
2025 तक देश को टीबी मुक्त करने की पहल के क्रम में ग्राम पंचायत पर भी विशेष जोर दिया गया है। कोशिश है कि जिले से दूर दराज क्षेत्र में स्वास्थ्य टीम मिलने वाले संदिग्ध के साथ लक्षण युक्त लोगों की जांच आवश्यक रूप से करें। अभियान के दौरान जहां पर पूर्व में टीबी के मरीज मिले हैं उसे पर भी विशेष फोकस किया गया है। -डॉ. आरके सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी
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2023 में ग्राम पंचायत को टीबी मुक्त करने की नई कवायद शुरू की गई थी। 2023 में दोहरीघाट ब्लॉक के जमुनीपार और निधिया गांव जबकि मुहम्मदसबाद गोहना ब्लॉक के नरौनी गांव को टीबी मुक्त ग्राम पंचायत का प्रमाण पत्र दिया गया था। वहीं 2024 में अभी तक 154 ग्राम पंचायत टीबी मुक्त के कगार पर हैं। दिसंबर में कुछ अंतिम पहलुओं पर होने वाली जांच की रिपोर्ट आने के बाद इन सभी ग्राम पंचायत को टीबी मुक्त का दर्जा दिया जाएगा। अब 27 मास्टर ट्रेनर अपने ब्लॉक क्षेत्र में ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, पंचायत सहायक टीबी मुक्त ग्राम पंचायत के लिए बुधवार को प्रशिक्षण देंगे।
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एक हजार की आबादी पर 30 लोगों की होती हैं जांच
डीपीपीएम जयदेश यादव ने बताया कि टीबी मुक्त ग्राम पंचायत के लिए ग्राम पंचायत में एक हजार की आबादी पर 30 लोगों के टीबी की जांच होती है। 2023 में टीबी मुक्त ग्राम जमुनीपार में 2133 आबादी में से 159 जबकि निधिया में 1185 में से 45 जांच हुई थी। इसमें एक भी टीबी का मरीज नहीं मिला था। वहीं मुहम्मदाबाद गाेहना ब्लॉक के नरौनी गांव में 2084 आबादी की जांच में 159 लोगों की जांच में एक टीबी का मरीज मिला था।
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रानीपुर में सबसे ज्यादा टीबी मरीज
जिले में 4017 मरीज हैं जो कि बीते वर्ष की तुलना में मिले 4480 मरीज से कम है। लेकिन अभी डेढ़ माह का समय शेष है। वर्तमान में सबसे ज्यादा मरीज रानीपुर ब्लाक में मिले हैं, जहां रानीपुर में 210 तो चिरैयाकोट में 110 मरीज हैं। इसके बाद मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक में 290, फतेहपुर मंडाव ब्लॉक में 283, दोहरीघाट में 202, बड़राव में 192, परदहा में 196, कोपागंज में 213 मरीजों की संख्या है। इसमें पुरुष मरीजों की संख्या 2396 तो महिला मरीजों की संख्या 1856 वहीं दो ट्रांसजेंडर मरीज हैं।
2025 तक देश को टीबी मुक्त करने की पहल के क्रम में ग्राम पंचायत पर भी विशेष जोर दिया गया है। कोशिश है कि जिले से दूर दराज क्षेत्र में स्वास्थ्य टीम मिलने वाले संदिग्ध के साथ लक्षण युक्त लोगों की जांच आवश्यक रूप से करें। अभियान के दौरान जहां पर पूर्व में टीबी के मरीज मिले हैं उसे पर भी विशेष फोकस किया गया है। -डॉ. आरके सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी