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Mau News: जिला अस्पताल में 24 लाख के तीन वेंटिलेटर तीन सालों से खुले ही नहीं

Tue, 23 Jul 2024 01:28 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jul 2024 01:28 AM IST
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Three ventilators worth Rs 24 lakh have not been opened in the district hospital for three years.
मऊ। जिला अस्पताल में इलाज को लेकर संसाधनों की कमी नहीं हैं। लेकिन मानव संसाधन तो कहीं जगह के अभाव में लाखों की मशीन बीते कई सालों से अपनी पैकिंग के डिब्बे से बाहर तक नहीं निकली हैं। इसके अलावा एनसीडी क्लीनिक की मशीन, ब्लड बैंक की और ट्रॉमा विंग के चार वेंटिलेटर शामिल हैं। जिला अस्पताल में 24 लाख रुपये के तीन वेंटिलेटर तीन सालों से खुले ही नहीं हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सड़क हादसे में गंभीर मरीजों को उठाना पड़ रहा है, जो वेंटिलेटर या प्लाज्मा ब्लड न मिलने के चलते उन्हें निजी अस्पताल की ओर रुख करना पड़ता है। इस दौरान कई मरीज इलाज के लिए ले जाते-जाते रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
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अगर मशीनों के शोपीस बनने की बात की जाए तो जिला अस्पताल में गैर संचारी बीमारियों (नॉन कम्यूनिकेबल डिजिज) में आई बायो कैमेस्ट्री एनेलाइजर, सेल काउंटर, इलेक्ट्रॉनिक आईवी मशीन बीते पांच साल से अपने डिब्बे से बाहर ही नहीं निकल सकी हैं। जबकि इन मशीनों को एनसीडी क्लीनिक के लिए भेजा गया था। इससे संचारी बीमारी वाले मरीजों को जिला अस्पताल में अलग से जांच की सुविधा मिल सके लेकिन पांच साल में बड़े कमरे के अभाव में इन मशीनों की पैकिंग खुली ही नहीं है। इसमें एक दो मशीन की जानकारी अब जिम्मेदारों को भी नहीं हैं। जबकि इन मशीनों की कीमत लाखों में हैं। ऐसे में एनसीडी क्लीनिक में पहुंचने वाले मरीजों का उपचार राम भरोसे ही चल रहा है।
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तीन वेंटिलेटर टेक्नीशियन के अभाव में बेकार पड़े

जिले मे कोरोना की पहली लहर में जिला अस्पताल में आए तीन वेंटिलेटर तीन साल बीतने के बाद भी अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। इसके पीछे टेक्नीशियन की कमी है। लेकिन विषम परिस्थिति में भी तीन वर्ष में टेक्नीशियन की तैनाती न हो पाना ही जिम्मेदारों की गंभीरता पर प्रश्न चिह्न जता रहा है। 100 बेड का जिला अस्पताल खुद वेंटिलेटर पर अंतिम सांसें गिन रहा है। मरीजों को सुविधा के नाम पर हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। फिर भी नतीजा सिफर है। जबकि जिले में कोरोना की पहली लहर के दौरान अप्रैल 2020 में 24 लाख रुपये की लागत से तीन वेंटिलेटर खरीदे गए थे, इसमें दो पोर्टेबल थे। वेंटिलेटर आने से पहले जिला अस्पताल में इसको लेकर डॉक्टरों तथा स्वास्थ्य कर्मियों की ट्रेनिंग भी हुई थी। बावजूद आज तक इन तीनों वेंटिलेटर में एक भी शुरू नहीं हो सका। इसके पीछे टेक्नीशियन की तैनाती न होना बताया जाता है।
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मशीन और उपकरण आ गए पर लाइसेंस ही नहीं मिला

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कंपोनेंट यूनिट नहीं शुरू हो सकी है। जबकि दो साल पहले तत्कालीन एमएलसी और वर्तमान कैबिनेट मंत्री एके शर्मा की ओर से एक करोड़ से ज्यादा की लागत से उपकरण मंगाए गए हैं, लेकिन यूनिट शुरू होने के लिए 12 बिंदुओं पर जांच होनी थी। लेकिन इसमें दो प्रमुख बिंदु जिसमें तकनीकी सहायक की कमी और कंपोनेंट यूनिट चालू करने के लिए लैब में 50 स्वायर फिट की अतिरिक्त जगह होनी चाहिए। जो कि इस लैब में नहीं है। ऐसे में अब तक जांच पूरी न होने से लाइसेंस ही नहीं मिला है। 22 जून 2022 को कैबिनेट मंत्री की ओर से यूनिट का उद्घाटन भी किया जा चुका है।
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