{"_id":"6571ffb08f336f6ffe020f2e","slug":"three-guilty-in-threatening-case-released-after-giving-instructions-mau-news-c-295-1-mau1001-5967-2023-12-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: धमकी देने के मामले में तीन दोषी, हिदायत देकर छोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: धमकी देने के मामले में तीन दोषी, हिदायत देकर छोड़ा
विज्ञापन
मऊ। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट राजवीर सिंह ने धमकी देने के मामले में नामजद तीन आरोपियों को सुनवाई के बाद दोषी पाया। इसके बाद सभी को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए एक वर्ष तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए रिहा कर दिया। मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार, वादी मुकदमा की 15 वर्षीय नाबालिग पौत्री को 14 अगस्त 16 को आरोपीगण शादी के लिए भगा ले गए। इस दौरान आरोपीगण ने गाली और धमकी दी। पुलिस ने मामले की एफआईआर दर्ज कर बाद विवेचना हलधरपुर थाना क्षेत्र के जमदरा गांव निवासी शिववचन और जीवधन पुत्रगण सागर तथा सुमन पत्नी शिववचन के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया।
कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक विमल कुमार श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार मिश्रा और रामचंद्र चौहान ने कुल सात गवाहों को पेशकर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। विशेष न्यायाधीश ने आरोपीगण शिववचन, सुमन और जीवधन को दोषी पाया। सभी को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए एक वर्ष तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए रिहा कर दिया। इसके साथ ही पाक्सो एक्ट में उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
अभियोजन के अनुसार, वादी मुकदमा की 15 वर्षीय नाबालिग पौत्री को 14 अगस्त 16 को आरोपीगण शादी के लिए भगा ले गए। इस दौरान आरोपीगण ने गाली और धमकी दी। पुलिस ने मामले की एफआईआर दर्ज कर बाद विवेचना हलधरपुर थाना क्षेत्र के जमदरा गांव निवासी शिववचन और जीवधन पुत्रगण सागर तथा सुमन पत्नी शिववचन के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया।
विज्ञापन
कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक विमल कुमार श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार मिश्रा और रामचंद्र चौहान ने कुल सात गवाहों को पेशकर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। विशेष न्यायाधीश ने आरोपीगण शिववचन, सुमन और जीवधन को दोषी पाया। सभी को परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए एक वर्ष तक सदाचार बनाए रखने की हिदायत देते हुए रिहा कर दिया। इसके साथ ही पाक्सो एक्ट में उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
विज्ञापन