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कानून बनने के बाद भी नहीं सुधरे हालात
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Tue, 16 Dec 2014 11:29 PM IST
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देश की राजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर को बिटिया
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कांड ने समूचे देश को उद्वेलित कर दिया। इस घटना के बाद देश भर में
बलात्कार के खिलाफ कड़े कानून की मांग को लेकर आंदोलन हुआ।
कानून बना भी, मगर क्या ऐसी घटनाओं पर विराम लगा। अभी कुछ दिन पहले राजधानी में ही उबर कैब में हुई युवती के साथ बलात्कार की घटना ने एक बार फिर राजधानी की सालभर पुरानी घटना की याद ताजा कर दी।
सवाल उठता है कि ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए आखिर कैसे सख्त कानून की जरूरत है। महिलाएं, युवतियां अथवा स्कूली छात्राओं की सुरक्षा क ैसे हो।
अचरज है कि बिटिया कांड के बाद बलात्कार के मामलों में सख्त कानून के बाद भी चाहे देश की राजधानी दिल्ली हो या छोटा सा जिला मऊ, कहीं भी तो सुरक्षित नहीं है महिलाएं, युवतियां और छात्राएं।
उधर निर्भया को श्रद्धांजलि देने के लिए नगर क्षेत्र के परदहां स्थित राजीव गांधी महिला महाविद्यालय में छात्राओं ने कैडिल जलाई।
कानून बना भी, मगर क्या ऐसी घटनाओं पर विराम लगा। अभी कुछ दिन पहले राजधानी में ही उबर कैब में हुई युवती के साथ बलात्कार की घटना ने एक बार फिर राजधानी की सालभर पुरानी घटना की याद ताजा कर दी।
सवाल उठता है कि ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए आखिर कैसे सख्त कानून की जरूरत है। महिलाएं, युवतियां अथवा स्कूली छात्राओं की सुरक्षा क ैसे हो।
अचरज है कि बिटिया कांड के बाद बलात्कार के मामलों में सख्त कानून के बाद भी चाहे देश की राजधानी दिल्ली हो या छोटा सा जिला मऊ, कहीं भी तो सुरक्षित नहीं है महिलाएं, युवतियां और छात्राएं।
उधर निर्भया को श्रद्धांजलि देने के लिए नगर क्षेत्र के परदहां स्थित राजीव गांधी महिला महाविद्यालय में छात्राओं ने कैडिल जलाई।