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Mau News: परिषदीय विद्यालयों के बच्चों का होगा सतत मूल्यांकन
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जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति का आकलन अब केवल वार्षिक या अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सतत रूप से चलता रहेगा।
प्रत्येक माह की रिपोर्ट स्कूल शिक्षक खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तक भेजेंगे, जिसे आगे राज्य परियोजना कार्यालय को प्रेषित किया जाएगा।
यह व्यवस्था जुलाई के दूसरे चरण में स्कूल चलो अभियान के बाद प्रभावी होगी। इसके लिए सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी कर दिया गया है।
जिले में 1208 परिषदीय विद्यालयों में लगभग 1.30 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इन सभी स्कूलों में सतत एवं समग्र मूल्यांकन (सीसीई) व्यवस्था को प्रभावी किया गया है। इसमें विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी समझ, रचनात्मकता, व्यावहारिक ज्ञान और विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
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अधिकारियों के अनुसार, इस नई व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों पर परीक्षा का दबाव कम करना और उनकी सीखने की क्षमता का आकलन करना है। परिषद के निर्देशों के अनुसार शिक्षकों को पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान विद्यार्थियों की प्रगति पर नजर रखनी होगी।
केवल लिखित परीक्षा के अंक ही नहीं, बल्कि दैनिक कक्षा गतिविधियों, मौखिक प्रस्तुति और व्यावहारिक कार्यों को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा।
सतत एवं समग्र मूल्यांकन के तहत विद्यार्थियों से मौखिक प्रश्नोत्तरी, कार्यपत्रक, परियोजना कार्य, समूह गतिविधियां, कक्षा में सहभागिता, रचनात्मक कार्य और सीखने की क्षमता का भी आकलन किया जाएगा।
नगर शिक्षा अधिकारी रजित लाल रत्नाकर ने बताया कि नई व्यवस्था से बच्चों की पढ़ने-लिखने के साथ-साथ बौद्धिक क्षमताओं का भी आकलन किया जा सकेगा। सभी परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया गया है।
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प्रत्येक माह की रिपोर्ट स्कूल शिक्षक खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तक भेजेंगे, जिसे आगे राज्य परियोजना कार्यालय को प्रेषित किया जाएगा।
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यह व्यवस्था जुलाई के दूसरे चरण में स्कूल चलो अभियान के बाद प्रभावी होगी। इसके लिए सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी कर दिया गया है।
जिले में 1208 परिषदीय विद्यालयों में लगभग 1.30 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इन सभी स्कूलों में सतत एवं समग्र मूल्यांकन (सीसीई) व्यवस्था को प्रभावी किया गया है। इसमें विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी समझ, रचनात्मकता, व्यावहारिक ज्ञान और विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
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अधिकारियों के अनुसार, इस नई व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों पर परीक्षा का दबाव कम करना और उनकी सीखने की क्षमता का आकलन करना है। परिषद के निर्देशों के अनुसार शिक्षकों को पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान विद्यार्थियों की प्रगति पर नजर रखनी होगी।
केवल लिखित परीक्षा के अंक ही नहीं, बल्कि दैनिक कक्षा गतिविधियों, मौखिक प्रस्तुति और व्यावहारिक कार्यों को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा।
सतत एवं समग्र मूल्यांकन के तहत विद्यार्थियों से मौखिक प्रश्नोत्तरी, कार्यपत्रक, परियोजना कार्य, समूह गतिविधियां, कक्षा में सहभागिता, रचनात्मक कार्य और सीखने की क्षमता का भी आकलन किया जाएगा।
नगर शिक्षा अधिकारी रजित लाल रत्नाकर ने बताया कि नई व्यवस्था से बच्चों की पढ़ने-लिखने के साथ-साथ बौद्धिक क्षमताओं का भी आकलन किया जा सकेगा। सभी परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया गया है।