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जिले में बिछा है नहरों का जाल, किसान है बेहाल
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मऊ। जिले में नहरों का जाल बिछा है, लेकिन नहरों के सूखा होने से किसानों की समस्या बरकरार रहती है। बरवक्त रबी की फसल की बुआई का कार्य शुरु हो गया है, लेकिन नहर सूखी है। जबकि नियमानुसार 21 दिन बाद से ही फसल की सिंचाई करनी आवश्यक है। शारदा सहाय खंड 32 के साथ साथ दोहरीघाट पंप कैनाल भी किसानों की समस्या को कम करने में विफल है।
करीब 25 लाख आबादी वाले मऊ जिले में तीन लाख किसान है, ये किसान करीब एक लाख 21 हजार हेक्टर जमीन पर खेती किसानी का कार्य करते है। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो इस वर्ष करीब 95 हजार हेक्टेयर जमीन पर किसान रबी की फसल की बुआई का कार्य करेंगे। इसमें वो किसान जिनकी खरीफ की फसल पहले तैयार हो गई और समय से खेत खाली हो गया, वो रबी की फसल की बुआई का कार्य भी कर चुकें है। जो बचे है वो भी तेजी से फसल बुआई में जुटे है।
किसानों को फसल की सिंचाई में दिक्कत न हो इसके लिए जिले में शारदा सहायक खंड 32 की कुल 34 शाखाएं है, इनकी लंबाई 196.83 किमी है। लेकिन कभी भी नहर में समय से पानी नहीं आता, इसके चलते किसानों को इसका लाभ नहीं मिलता है। बरवक्त सिल्ट जमा होने के साथ नहरों में धुल उड़ रही। विभाग में संपर्क करने पर पता चला कि मऊ जिले में शारदा सहाय खंड 32 की शाखा दोहरीघाट, बडराव, कोपागंज, घोसी और रतनपुरा ब्लाकों के करीब 250 गांवों से होकर गुजरती है। इसकी सिंचिंत क्षमता 19 हजार हेक्टेयर की है। इसमें रबी की फसल की सिंचित करने की क्षमता 12730 और खरीफ की 9120 हेक्टेयर है। बीते वर्ष सिल्ट जमा होने और अन्य कारणों से टेल तक पानी नही चढ़ा, इसका परिणाम रहा कि रबी की फसल 5700 हेक्टयर की सिंचिंत हो सकी।
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इस संबंध में बात करने पर अधीशासी अभियंता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि नहरों में जमा सिल्ट को साफ करने के लिए उसे बंद किया गया है। टेंडर हो चुका है, नवंबर माह में सिल्ट की सफाई का कार्य पूरा हो जाएगा। इसके बाद नहर में पानी छोड़ने का कार्य किया जाएगा।
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करीब 25 लाख आबादी वाले मऊ जिले में तीन लाख किसान है, ये किसान करीब एक लाख 21 हजार हेक्टर जमीन पर खेती किसानी का कार्य करते है। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो इस वर्ष करीब 95 हजार हेक्टेयर जमीन पर किसान रबी की फसल की बुआई का कार्य करेंगे। इसमें वो किसान जिनकी खरीफ की फसल पहले तैयार हो गई और समय से खेत खाली हो गया, वो रबी की फसल की बुआई का कार्य भी कर चुकें है। जो बचे है वो भी तेजी से फसल बुआई में जुटे है।
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किसानों को फसल की सिंचाई में दिक्कत न हो इसके लिए जिले में शारदा सहायक खंड 32 की कुल 34 शाखाएं है, इनकी लंबाई 196.83 किमी है। लेकिन कभी भी नहर में समय से पानी नहीं आता, इसके चलते किसानों को इसका लाभ नहीं मिलता है। बरवक्त सिल्ट जमा होने के साथ नहरों में धुल उड़ रही। विभाग में संपर्क करने पर पता चला कि मऊ जिले में शारदा सहाय खंड 32 की शाखा दोहरीघाट, बडराव, कोपागंज, घोसी और रतनपुरा ब्लाकों के करीब 250 गांवों से होकर गुजरती है। इसकी सिंचिंत क्षमता 19 हजार हेक्टेयर की है। इसमें रबी की फसल की सिंचित करने की क्षमता 12730 और खरीफ की 9120 हेक्टेयर है। बीते वर्ष सिल्ट जमा होने और अन्य कारणों से टेल तक पानी नही चढ़ा, इसका परिणाम रहा कि रबी की फसल 5700 हेक्टयर की सिंचिंत हो सकी।
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इस संबंध में बात करने पर अधीशासी अभियंता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि नहरों में जमा सिल्ट को साफ करने के लिए उसे बंद किया गया है। टेंडर हो चुका है, नवंबर माह में सिल्ट की सफाई का कार्य पूरा हो जाएगा। इसके बाद नहर में पानी छोड़ने का कार्य किया जाएगा।