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Mau News: भंडारण न होने से आश्रय स्थलों में गोवंश के चारे का संकट

Thu, 16 Apr 2026 01:01 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2026 01:01 AM IST
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There is a crisis of fodder for cattle in shelters due to lack of storage.
गो-आश्रय स्थलों में मवेशियों के चारे का संकट आने वाले दिनों में बढ़ सकता है। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है और आगामी चुनावों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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यदि गेहूं की कटाई के इस सीजन में भूसे का भंडारण नहीं किया गया, तो पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था पटरी से उतर सकती है। गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्था गो संरक्षण समिति के जिम्मे होती है, जिसमें ग्राम प्रधान अध्यक्ष और ग्राम विकास अधिकारी सचिव होते हैं।
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नियमानुसार, पशुओं के चारे और देखभाल की मूल जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होती है। आमतौर पर प्रधान अपनी साख या व्यक्तिगत पूंजी से साल भर के भूसे का अग्रिम स्टॉक जमा कर लेते हैं, जिसका भुगतान बाद में उन्हें मिलता रहता है।
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ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। अभी तक न तो चुनाव की घोषणा की गई है और न ही आरक्षण स्पष्ट है। ऐसे में प्रधान इस उहापोह में हैं कि यदि सीट आरक्षित हो गई या वे चुनाव हार गए, तो भूसा भंडारण में खर्च किए गए लाखों रुपये उन्हें वापस मिलेंगे या नहीं।
भूसा खरीदने के लिए अप्रैल और मई माह सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। इसके बाद भूसे के दामों में आमतौर पर इजाफा हो जाता है। वर्तमान में दाम कम होने और उपलब्धता आसान होने के बावजूद खरीदारी नहीं हो रही है, जिससे आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।

बाद में टेंडर प्रक्रिया या सरकारी खरीद के भरोसे पर्याप्त स्टॉक जुटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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स्थिति एक नजर में
कुल गो-आश्रय स्थल : 38
संरक्षित गोवंश : 3053
प्रतिदिन भूसे की खपत : 611 किलो
मानक : प्रति मवेशी 4 से 5 किलो

गो-आश्रय स्थलों पर भूसे की उपलब्धता के लिए ब्लॉक स्तर पर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वर्तमान में सभी आश्रय स्थलों पर भूसा उपलब्ध है। भंडारण के लिए जल्द ही सभी आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। -डॉ. सीपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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