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Mau News: इस महीने के अंत में शुरू होगा दोहरीघाट-मधुबन मार्ग का चौड़ीकरण
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दोहरीघाट-मधुबन मार्ग का चौड़ीकरण मार्च माह के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है। हाईकोर्ट से पेंच समाप्त होने के बाद निर्माण खंड इसपर तेजी से काम कर रहा है। विभाग ने पेड़ों को काटने और विद्युत पोल को हटाने के लिए वन और विद्युत विभाग को पत्र लिखा है।
टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाकर ठेकेदार ने फरवरी 2025 में हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। तीन जिलों को जोड़ने वाली 22 किमी लंबी सड़क के लिए 62 करोड़ रुपये स्वीकृत है। सड़क के चौड़ीकरण होने से हादसों में कमी आएगी और आवागमन सुगम होगा।
वर्तमान ने में सड़क जगह जगह से टूट गई है। मधुबन-दोहरीघाट मार्ग मऊ, गोरखपुर और बलिया जिले को जोड़ती है। सड़क की बदहाली को देखते हुए चौड़ीकरण के लिए निर्माण खंड ने शासन को प्रस्ताव भेजा था।
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स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पैरवी से सड़क के नवीनीकरण और सात मीटर चौड़ा करने के लिए 62 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। जनवरी 2025 में ठेकेदारों के सामने टेंडर खोला गया था। जिसमें कार्यदायी संस्था अमनोल एसोसिएट को टेंडर मिला था।
तत्कालीन अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार पर टेंडर में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कुछ ठेकेदारों ने शासन स्तर पर शिकायत की थी। वहां से जांच के बाद संलिप्तता पाए जाने पर प्रमोद कुमार निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिए गए।
ठेकेदार ने इसे आधार बनाकर सड़क निर्माण पर हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर पूरी धनराशि वापस लौटानी पड़ी थी। लगभग एक वर्ष तक ठेकेदार और विभाग के बीच कोर्ट में विवाद चला।
विभाग से लंबी वार्ता और शासन के हस्तक्षेप के बाद ठेकेदार ने स्टे वापस ले लिया। अब अनमोल एसोसिएट के साथ एक अन्य कार्यदायी संस्था भी काम कराएगी। चौड़ीकरण से पहले सड़क किनारे से पेड़ों की कटाई होगी और बिजली के पोल स्थानांतरित किए जाएंगे।
पुुरानी गिट्टी से सड़क बनाने की शिकायत पर हुई थी जांच
दोहरीघाट-मधुबन मार्ग के निर्माण को लेकर वर्ष 2013 में भी सवाल उठे थे। 16 अप्रैल 2013 को सपा नेता राजेंद्र मिश्र ने तत्कालीन लोक निर्माण विभाग मंत्री शिवपाल यादव से मुलाकात कर दरगाह से मधुबन तक पुरानी गिट्टी को तोड़कर उसी को फिर से लगा कर सड़क बनाए जाने की शिकायत की थी। शिवपाल यादव के आदेश पर विभाग के प्रमुख सचिव ने टीम गठित की थी।
ठेकेदार ने हाईकोर्ट से स्टे वापस ले लिया है। काम पुराने टेंडर पर ही होगा। सारी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं, जल्द ही पेड़ों की कटाई और बिजली के पोल स्थानांतरित किए जाएंगे। इसके लिए दोनों विभागों को पत्र लिखा गया है। - राकेश कुमार, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड मऊ
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टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाकर ठेकेदार ने फरवरी 2025 में हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। तीन जिलों को जोड़ने वाली 22 किमी लंबी सड़क के लिए 62 करोड़ रुपये स्वीकृत है। सड़क के चौड़ीकरण होने से हादसों में कमी आएगी और आवागमन सुगम होगा।
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वर्तमान ने में सड़क जगह जगह से टूट गई है। मधुबन-दोहरीघाट मार्ग मऊ, गोरखपुर और बलिया जिले को जोड़ती है। सड़क की बदहाली को देखते हुए चौड़ीकरण के लिए निर्माण खंड ने शासन को प्रस्ताव भेजा था।
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स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पैरवी से सड़क के नवीनीकरण और सात मीटर चौड़ा करने के लिए 62 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। जनवरी 2025 में ठेकेदारों के सामने टेंडर खोला गया था। जिसमें कार्यदायी संस्था अमनोल एसोसिएट को टेंडर मिला था।
तत्कालीन अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार पर टेंडर में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कुछ ठेकेदारों ने शासन स्तर पर शिकायत की थी। वहां से जांच के बाद संलिप्तता पाए जाने पर प्रमोद कुमार निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिए गए।
ठेकेदार ने इसे आधार बनाकर सड़क निर्माण पर हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर पूरी धनराशि वापस लौटानी पड़ी थी। लगभग एक वर्ष तक ठेकेदार और विभाग के बीच कोर्ट में विवाद चला।
विभाग से लंबी वार्ता और शासन के हस्तक्षेप के बाद ठेकेदार ने स्टे वापस ले लिया। अब अनमोल एसोसिएट के साथ एक अन्य कार्यदायी संस्था भी काम कराएगी। चौड़ीकरण से पहले सड़क किनारे से पेड़ों की कटाई होगी और बिजली के पोल स्थानांतरित किए जाएंगे।
पुुरानी गिट्टी से सड़क बनाने की शिकायत पर हुई थी जांच
दोहरीघाट-मधुबन मार्ग के निर्माण को लेकर वर्ष 2013 में भी सवाल उठे थे। 16 अप्रैल 2013 को सपा नेता राजेंद्र मिश्र ने तत्कालीन लोक निर्माण विभाग मंत्री शिवपाल यादव से मुलाकात कर दरगाह से मधुबन तक पुरानी गिट्टी को तोड़कर उसी को फिर से लगा कर सड़क बनाए जाने की शिकायत की थी। शिवपाल यादव के आदेश पर विभाग के प्रमुख सचिव ने टीम गठित की थी।
ठेकेदार ने हाईकोर्ट से स्टे वापस ले लिया है। काम पुराने टेंडर पर ही होगा। सारी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं, जल्द ही पेड़ों की कटाई और बिजली के पोल स्थानांतरित किए जाएंगे। इसके लिए दोनों विभागों को पत्र लिखा गया है। - राकेश कुमार, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड मऊ