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इंतजार हुआ लंबा: अंडरपास का निर्माण से लंबा खिचा आमान परिवर्तन कार्य
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मऊ। मार्च-अप्रैल 2022 तक आमान परविर्तन का कार्य पूरा होने की उम्मीद संजोए लोगों को अभी ओर एक लंबा समय इंतजार करना होगा। दरअसल आमान परिवर्तन के निर्माण के दौरान इंदारा से दोहरीघाट के बीच आठ रेलवे क्रासिंग पर अंडरपास का निर्माण किया जाना है। इन स्थानों पर जलस्तर ज्यादा होने के से रेलवे को सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है। रेलवे इन स्थानों पर बिछाई गई रेलवे लाइन को अब दो मीटर ऊंचा करने की तैयारी करने में जुटा है। ऐसे में अगले साल के अप्रैल तक कार्य का पूरा होने दावा मुमकिन होता नजर नहीं आ रहा है। अभी तक केवल 70 फीसदी ही कार्य पूरा हो सका है। ऐसे में आमान परिवर्तन का पूरा होने में अभी छह माह का समय ओर लगने की संभावना है।
रेल बजट 2014 में इंदारा-दोहरीघाट तक छोटी रेल लाइन को बदलकर बड़ी लाइन में बदलने के लिए आमान परिवर्तन की स्वीकृति मिली। 35 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग के लिए 165 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ। लोगों की उम्मीदों को उस समय पंख लगा, जब 20 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने इंदारा जंक्शन पर आमान परिवर्तन की आधारशिला रखी । जहां शिलान्यास कार्यक्रम में तत्कालीन रेल राज्यमंत्री ने आगामी बजट में इस रेलमार्ग पर काम शुरू होने की बात कहते हुए इसके पूरा होने पर लंबी दूरी की ट्रेनें चलने का दावा किया था।
तात्कालिक पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजीव मिश्रा ने बताया था कि आमान परिवर्तन का यह कार्य वर्ष 2018 में पूरा होने की बात कही थी। इन दावे के इतर शिलान्यास होने के करीब दो वर्ष बाद इस पर कार्य शुरू किया गया।एक फरवरी 2018 को केंद्र सरकार द्वारा पेश बजट में आमान परिवर्तन के लिए 100 करोड़ रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की गई थी। साथ ही रेलवे को यह कार्य इंदारा-दोहरीघाट अमान परिवर्तन कार्य वर्ष 2019 में पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन समय सीमा के करीब तीन वर्ष का बीतने के बाद भी 70 फीसदी तक कार्य पूरा हो सका है। ऐसे में रेलवे द्वारा अप्रैल 2022 तक शेष कार्य पूरा होने की संभावना जता रहे थे।
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आमान परिवर्तन के एक्सईएन पंकज पांडेय ने बताया कि कार्य 70 फीसदी के करीब पुरा हो चुका है। आमान परिवर्तन कार्य के दौरान नए बदलाव के तहत कुछ फाटकों पर वाटर लेबल ज्यादा होने की स्थिति में यहां रेलवे लाइन को ऊंचा करने की योजना है।
रेल बस बंद होने से थी नाराजगी
कोपागंज (मऊ)। रेलवे द्वारा एक फरवरी 2018 को इस रेलमार्ग पर संचालित होने वाले रेलबस का संचालन बंद कर आमान परिवर्तन का कार्य नवंबर 2018 में शुरू कर दिया गया। इंदारा से दोहरीघाट के बीच चलने वाली यह रेल बस प्रतिदिन दिन में चार चक्कर लगाती थी। इस दौरान इसमें कोपागंज, घोसी, दोहरीघाट ब्लाक के 100 गांवों से प्रतिदिन 200 से ज्यादा लोग यात्रा करते थे। मामूली टिकट दस रुपया होने के चलते इस रूट के लोगों की रेल बस पहली पंसद हुआ करती थी। रेल बस का संचालन बंद होने से लोगों में काफी नाराजगी थी, इसको लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन भी हुआ। बस का संचालन बंद होने से अब इन ब्लाकों के लोगों को आवागमन के लिए बस, निजी वाहन पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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रेल बजट 2014 में इंदारा-दोहरीघाट तक छोटी रेल लाइन को बदलकर बड़ी लाइन में बदलने के लिए आमान परिवर्तन की स्वीकृति मिली। 35 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग के लिए 165 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ। लोगों की उम्मीदों को उस समय पंख लगा, जब 20 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने इंदारा जंक्शन पर आमान परिवर्तन की आधारशिला रखी । जहां शिलान्यास कार्यक्रम में तत्कालीन रेल राज्यमंत्री ने आगामी बजट में इस रेलमार्ग पर काम शुरू होने की बात कहते हुए इसके पूरा होने पर लंबी दूरी की ट्रेनें चलने का दावा किया था।
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तात्कालिक पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजीव मिश्रा ने बताया था कि आमान परिवर्तन का यह कार्य वर्ष 2018 में पूरा होने की बात कही थी। इन दावे के इतर शिलान्यास होने के करीब दो वर्ष बाद इस पर कार्य शुरू किया गया।एक फरवरी 2018 को केंद्र सरकार द्वारा पेश बजट में आमान परिवर्तन के लिए 100 करोड़ रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की गई थी। साथ ही रेलवे को यह कार्य इंदारा-दोहरीघाट अमान परिवर्तन कार्य वर्ष 2019 में पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन समय सीमा के करीब तीन वर्ष का बीतने के बाद भी 70 फीसदी तक कार्य पूरा हो सका है। ऐसे में रेलवे द्वारा अप्रैल 2022 तक शेष कार्य पूरा होने की संभावना जता रहे थे।
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आमान परिवर्तन के एक्सईएन पंकज पांडेय ने बताया कि कार्य 70 फीसदी के करीब पुरा हो चुका है। आमान परिवर्तन कार्य के दौरान नए बदलाव के तहत कुछ फाटकों पर वाटर लेबल ज्यादा होने की स्थिति में यहां रेलवे लाइन को ऊंचा करने की योजना है।
रेल बस बंद होने से थी नाराजगी
कोपागंज (मऊ)। रेलवे द्वारा एक फरवरी 2018 को इस रेलमार्ग पर संचालित होने वाले रेलबस का संचालन बंद कर आमान परिवर्तन का कार्य नवंबर 2018 में शुरू कर दिया गया। इंदारा से दोहरीघाट के बीच चलने वाली यह रेल बस प्रतिदिन दिन में चार चक्कर लगाती थी। इस दौरान इसमें कोपागंज, घोसी, दोहरीघाट ब्लाक के 100 गांवों से प्रतिदिन 200 से ज्यादा लोग यात्रा करते थे। मामूली टिकट दस रुपया होने के चलते इस रूट के लोगों की रेल बस पहली पंसद हुआ करती थी। रेल बस का संचालन बंद होने से लोगों में काफी नाराजगी थी, इसको लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन भी हुआ। बस का संचालन बंद होने से अब इन ब्लाकों के लोगों को आवागमन के लिए बस, निजी वाहन पर निर्भर रहना पड़ रहा है।