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Mau News: चिकित्सकों और स्वास्थ्यर्मियों पर नजर रखेगी टीम
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मऊ। अस्पतालों में हो रही मनमानी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग अस्पताल में तैनात चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों पर नजर रखेगा। शासन ने अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को टीम गठित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही हर माह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। रिपोर्ट में दोषी डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।
जनपद में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के अलावा 10 सीचएची, 40 पीएचसी हैं। यहां पर सरकार की तरफ से मात्र एक रुपये की पर्ची पर नि:शुल्क इलाज और जांच दवाइयां भी उपलब्ध कराई जा रही है। तमाम दिशा निर्देश को ताक पर रखकर सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सक कमीशन की लालच में अपने प्रतिनिधि रखे हुए है। यह डाक्टरों के केबिन में नंबर लगाने का कार्य करते हैं। यही नहीं बाहर खड़े रहकर गतिविधियों पर नजर रखतेे हैं। सूत्रों की मानें तो मरीज जब डाक्टर को दिखाने जाता है तो वह बेहतर इलाज का हवाला देते हुए मरीज को निजी नर्सिंग होम और पैथालाजी पर भेज देते हैं। यही नहीं निजी अस्पतालों के एंबुलेंस भी डाक्टरों के संपर्क में रहते है। यह अस्पताल के इधर उधर मंडराते रहते हैं। गंभीर मरीज होने पर मौके पर पहुंच जाता है। डाक्टर के रेफर करने के बाद ही मरीज को लेकर वह सीधे निजी अस्पताल में पहुंच जाता है। सरकारी अस्पताल में सभी रोगों की नि:शुल्क जांच की सुविधा है। इसके बावजूद डाक्टर बेहतर रिपोर्ट न आने का हवाला देकर बाहर की भेज देते हैं। अब मंडल स्तर पर टीम गठित कर सरकारी अस्पतालों पर नजर रखी जाएगी।
कोट
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जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी में तैनात चिकित्सकों पर अधीक्षक सहित प्रभारी चिकित्साधिकारियों द्वारा नजर रखी जाती है। इस मामले में शासन से एडवाइजरी मिली नहीं है। एडवाइजरी मिलते ही शासनादेश का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा।
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डॉ. राहुल सिंह
सीएमओ
मऊ
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जनपद में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के अलावा 10 सीचएची, 40 पीएचसी हैं। यहां पर सरकार की तरफ से मात्र एक रुपये की पर्ची पर नि:शुल्क इलाज और जांच दवाइयां भी उपलब्ध कराई जा रही है। तमाम दिशा निर्देश को ताक पर रखकर सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सक कमीशन की लालच में अपने प्रतिनिधि रखे हुए है। यह डाक्टरों के केबिन में नंबर लगाने का कार्य करते हैं। यही नहीं बाहर खड़े रहकर गतिविधियों पर नजर रखतेे हैं। सूत्रों की मानें तो मरीज जब डाक्टर को दिखाने जाता है तो वह बेहतर इलाज का हवाला देते हुए मरीज को निजी नर्सिंग होम और पैथालाजी पर भेज देते हैं। यही नहीं निजी अस्पतालों के एंबुलेंस भी डाक्टरों के संपर्क में रहते है। यह अस्पताल के इधर उधर मंडराते रहते हैं। गंभीर मरीज होने पर मौके पर पहुंच जाता है। डाक्टर के रेफर करने के बाद ही मरीज को लेकर वह सीधे निजी अस्पताल में पहुंच जाता है। सरकारी अस्पताल में सभी रोगों की नि:शुल्क जांच की सुविधा है। इसके बावजूद डाक्टर बेहतर रिपोर्ट न आने का हवाला देकर बाहर की भेज देते हैं। अब मंडल स्तर पर टीम गठित कर सरकारी अस्पतालों पर नजर रखी जाएगी।
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कोट
जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी में तैनात चिकित्सकों पर अधीक्षक सहित प्रभारी चिकित्साधिकारियों द्वारा नजर रखी जाती है। इस मामले में शासन से एडवाइजरी मिली नहीं है। एडवाइजरी मिलते ही शासनादेश का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा।
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डॉ. राहुल सिंह
सीएमओ
मऊ