{"_id":"69542284f75a4972b50e5145","slug":"the-riverfront-being-built-at-a-cost-of-rs-2065-crore-is-being-drained-by-sewage-and-waste-from-six-drains-into-the-tamsa-river-mau-news-c-295-1-svns1029-138576-2025-12-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: 20.65 करोड़ से बन रहा रिवर फ्रंट पर तमसा नदी में गिर रहा छह नालों का पानी और कचरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: 20.65 करोड़ से बन रहा रिवर फ्रंट पर तमसा नदी में गिर रहा छह नालों का पानी और कचरा
विज्ञापन
नगर के मड़ईयाघाट पर तमसा में गिरता नाले का गंदा पानी,कचड़ा रोकने के लिए लगाई गई जाली।
नगर में तमसा नदी के तट पर सुंदरता बढ़ाने के लिए गायघाट और बच्चन घाट पर 20.65 करोड़ रुपये से रिवर फ्रंट बनाया जा रहा है। नदी में प्रतिदिन छह नालों से गंदा पानी और कचरा गिरता है। कई वर्षों से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की बात हो रही है। प्रतिदिन शहर का करीब 25 लाख लीटर पानी गिरता है।
तमसा नदी को मर्यादा पुरुषोत्तम राम से जुड़े होने के कारण हिंदू जनमानस में अत्यंत महत्व प्रदान किया गया है। प्रमुख स्नान व धार्मिक पर्वों पर नगर के हनुमान घाट, मड़इयाघाट, बमघाट, सत्तीघाट, ढेकुलियाघाट सहित विभिन्न घाटों पर लोग नदी में स्नान कर पूजन अर्चन करते हैं।
वर्तमान समय में नगर के छह स्थान विसर्जन घाट, मड़ईयाघाट, ढेकुलियाघाट, औरंगाबाद, हट्ठीमदारी, बम घाट पर नाले से शहर का गंदा पानी और कचरा नदी में गिरता है। प्रदूषण और गंदगी के कारण लोग अब नदी में स्नान करने से भी कतराने लगे हैं।
विज्ञापन
नालों का पानी गिरने से नदी का पानी काला होता जा रहा है। बीते कई वर्षों से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना कोरा साबित हो रही है। वहीं मऊ के गायघाट और बच्चनघाट पर रिवरफ्रंट बनाकर घाटों के सुंदरीकरण का कार्य चल रहा है।
जिससे लोगों को अच्छा माहौल मिल सके। समाजसेवी छोटेलाल गांधी ने कहा कि जब तमसा ही स्वच्छ नही है तो रिवरफ्रंट का क्या महत्व है। पहले तो इसको स्वच्छ करने की जरूरत है।
लोहे की जाली से प्रदूषण रोक रही नगर पालिका
तमसा नदी में प्रदूषण को रोकने के लिए नगर पालिका द्वारा 6 नालाें पर लोहे की जाली लगाई गई है लेकिन पानी की धार के चलते दूसरे स्थान से कूड़ा और गंदा पानी नदी में जा रहा है। इसके साथ ही कई स्थानों पर तो गंदा पानी नदी में छोटे स्थानों से भी जा रहा है।
श्रमदान कर शहरवासी भी कर चुके हैं नदी की सफाई
नगर स्थित तमसा नदी की सफाई के लिए कई बार अभियान चलाया गया।जिसमें शहरवासियों ने नदी में उतरकर सफाई किया। लेकिन कुछ दिनों तक साफ रहने के बाद फिर नदी में गंदगी फैल जाती है।
प्रतिदिन शहर का करीब 25 लाख लीटर पानी नदी में गिरता है। शहर के नालों के पानी को नदी में जाने से पहले स्वच्छ करने के लिए बायोरेमेडिएशन कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एसटीपी के लिए नगर पालिका द्वारा जलनिगम नगरीय को सरवां और बख्तावरगंज में जमीन चिह्नित कराई गई है। जल निगम नगरीय ने एसटीपी के लिए डीपीआर बनाकर भेजा है। जल्द ही सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से नाले का गंदा पानी साफ होकर नदी में जाएगा।
- दिनेश, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
विज्ञापन
तमसा नदी को मर्यादा पुरुषोत्तम राम से जुड़े होने के कारण हिंदू जनमानस में अत्यंत महत्व प्रदान किया गया है। प्रमुख स्नान व धार्मिक पर्वों पर नगर के हनुमान घाट, मड़इयाघाट, बमघाट, सत्तीघाट, ढेकुलियाघाट सहित विभिन्न घाटों पर लोग नदी में स्नान कर पूजन अर्चन करते हैं।
विज्ञापन
वर्तमान समय में नगर के छह स्थान विसर्जन घाट, मड़ईयाघाट, ढेकुलियाघाट, औरंगाबाद, हट्ठीमदारी, बम घाट पर नाले से शहर का गंदा पानी और कचरा नदी में गिरता है। प्रदूषण और गंदगी के कारण लोग अब नदी में स्नान करने से भी कतराने लगे हैं।
विज्ञापन
नालों का पानी गिरने से नदी का पानी काला होता जा रहा है। बीते कई वर्षों से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना कोरा साबित हो रही है। वहीं मऊ के गायघाट और बच्चनघाट पर रिवरफ्रंट बनाकर घाटों के सुंदरीकरण का कार्य चल रहा है।
जिससे लोगों को अच्छा माहौल मिल सके। समाजसेवी छोटेलाल गांधी ने कहा कि जब तमसा ही स्वच्छ नही है तो रिवरफ्रंट का क्या महत्व है। पहले तो इसको स्वच्छ करने की जरूरत है।
लोहे की जाली से प्रदूषण रोक रही नगर पालिका
तमसा नदी में प्रदूषण को रोकने के लिए नगर पालिका द्वारा 6 नालाें पर लोहे की जाली लगाई गई है लेकिन पानी की धार के चलते दूसरे स्थान से कूड़ा और गंदा पानी नदी में जा रहा है। इसके साथ ही कई स्थानों पर तो गंदा पानी नदी में छोटे स्थानों से भी जा रहा है।
श्रमदान कर शहरवासी भी कर चुके हैं नदी की सफाई
नगर स्थित तमसा नदी की सफाई के लिए कई बार अभियान चलाया गया।जिसमें शहरवासियों ने नदी में उतरकर सफाई किया। लेकिन कुछ दिनों तक साफ रहने के बाद फिर नदी में गंदगी फैल जाती है।
प्रतिदिन शहर का करीब 25 लाख लीटर पानी नदी में गिरता है। शहर के नालों के पानी को नदी में जाने से पहले स्वच्छ करने के लिए बायोरेमेडिएशन कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एसटीपी के लिए नगर पालिका द्वारा जलनिगम नगरीय को सरवां और बख्तावरगंज में जमीन चिह्नित कराई गई है। जल निगम नगरीय ने एसटीपी के लिए डीपीआर बनाकर भेजा है। जल्द ही सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से नाले का गंदा पानी साफ होकर नदी में जाएगा।
- दिनेश, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका

नगर के मड़ईयाघाट पर तमसा में गिरता नाले का गंदा पानी,कचड़ा रोकने के लिए लगाई गई जाली।

नगर के मड़ईयाघाट पर तमसा में गिरता नाले का गंदा पानी,कचड़ा रोकने के लिए लगाई गई जाली।