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Mau News: पांच साल पहले बना ऑक्सीजन टैंक का केवल तीन बार ही हुआ उपयोग

Tue, 14 Oct 2025 12:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 14 Oct 2025 12:03 AM IST
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The oxygen tank, made five years ago, was used only three times.
जिला अस्पताल में मौजूद आक्सीजन प्लांट।संवाद
मऊ। 24 घंटे ऑक्सीजन आपूर्ति को लेकर जिला अस्पताल में पांच साल पहले वर्ष 2020 में लाखों की लागत से ऑक्सीजन प्लांट बनाया गया था। बजट के अभाव में अब तक पांच साल में केवल तीन बार ही भरा जा सका है। एक बार भरने के बाद इससे केवल एक महीने तक ही आपूर्ति हो सकती है। ऐसे में केवल तीन महीने ही इस प्लांट से ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई। इसके पीछे अस्पताल प्रबंधन बजट का अभाव बता रहा है, उधर इस प्लांट से दोगुनी राशि में हर महीने सिलिंडर की आपूर्ति जिला अस्पताल में हो रही है, जो इस बजट से अधिक है।
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बतातें चले कि अभी जिला महिला अस्पताल, टड़ियाव अस्पताल के अलावा परदहां सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट की व्यवस्था है। लेकिन जिला अस्पताल में व्यवस्था न होने पर 2020 में यहां ट्रॉमा सेंटर के पास ऑक्सीजन टैंक बनाया गया। उद्देश्य था कि हर महीने ऑक्सीजन सिलिंडर यहीं से भरे जाएं। लेकिन बीते पांच साल में यहां टैंक तीन बार भरा गया। आंकड़ों को देखें तो 24 दिसंबर 2023 को, नौ मई 2025 फिर अगस्त 2025 को इसे भरा गया। सीएमएस डॉ धनंजय कुमार ने बताया कि एक बार टैंक को भरने में एक लाख 60 हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन बजट के अभाव में इसे नियमित नहीं भरा जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन एक तरफ बजट की कमी कह रहा है, दूसरी तरफ हर महीने ऑक्सीजन को लेकर हर महीने सैकड़ों सिलिंडर की खरीदी हो रही है।
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एक बार पुुल होने पर एक माह चलता है टैंक
सीएमएस ने बताया कि एक बार टैंक फुल होने के बाद इससे आपूर्ति एक महीने तक ही हो पाता है। ऐसे में एक महीने बाद दोबारा वार्ड में ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर बड़ी संख्या में सिलिंडर की खरीदी की जाती है। आंकड़ों को देखे तो इस साल में बीते अगस्त माह में 179 ऑक्सीजन सिलेंडर जबकि सितंबर में 361 सिलिंडर खरीदे गए। इस पर हर महीने एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च होता है।
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आईसीयू वार्ड शुरू, सांस के मरीजों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी
जिला अस्पताल में एक जुलाई को डॉक्टर्स डे पर दो बेड का आईसीयू वार्ड शुरू किया गया है। अब तक 140 से ज्यादा मरीज भर्ती हो चुके हैं, इसमें 60 फीसदी सांस के मरीज हैं। इन मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति बेहद अनिवार्य है। सूत्रों की मानें तो टैंक के खाली होने पर फोर्स से ऑक्सीजन आपूर्ति को लेकर एक बार तीन सिलिंडर लगाए जाते हैं। वहीं जुलाई, अगस्त और सितंबर में सबसे ज़्यादा सिलिंडर की खपत होती है।क्योंकि इन तीन महीनों में सबसे अधिक सांस और हृदय के मरीज अस्पताल में भर्ती होते हैं।
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