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गढ़वा कोट के ऐतिहासिक महत्व का रहस्य अभी भी बरकार

Sun, 04 Jul 2021 10:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jul 2021 10:45 PM IST
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The mystery of the historical importance of Garhwa Kot still remains
मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के भतड़ी चकभटड़ी और माहपुर गांव के सीमा पर स्थित गढ़वा कोट का रहस्य अभी भी बरकरार है। आठ माह पूर्व वहां खुदाई के दौरान प्राचीन कालीन तांबा सिक्के और बुद्ध प्रतिमाओं के मिलने के बाद वहां खुदाई बंद कर इस स्थल संरक्षित कर दिया गया है। पुरातत्व विभाग ने आगे की जांच के लिए सभी प्रकार की खुदाई पर रोक लगा दिया है लेकिन आठ महीने बाद भी इस स्थान के पौराणिक, ऐतिहासिक, और धार्मिक महत्व की जानकारी के लिए कोई भी कार्यवाही नहीं शुरू हो सकी है।
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तहसील क्षेत्र के माहपुर गांव स्थित गढ़वा कोट आठ महीने पूर्व उस समय चर्चा में आया जब सिक्स लेन एक्सप्रेस वे सड़क निर्माण के लिए वहां से मिट्टी निकाली जा रही थी। खुदाई में वहां प्राचीन कालीन तांबा सिक्के, मिट्टी के बर्तन, भगवान बुद्ध की प्रतिमा आदि मिली थी। खुदाई में पाए गए सिक्के को ग्रामीणों ने लूट लिया था लेकिन प्रशासन की सख्ती के बाद सभी सिक्के वापस मिल गए।
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उक्त स्थल से पुराने सिक्के और बुद्ध की खंडित प्रतिमा मिलने की जानकारी के बाद सारनाथ स्थित पुरातत्व विभाग टीम ने उक्त स्थल की का निरीक्षण किया और वहां से मिले सामग्रियों की जांच किया। जांच टीम ने बताया कि उक्त सभी सामान लगभग 2 हजार से 22 सौ वर्ष पुराना प्रतीत हो रहा है। लेकिन इसके बारे में सही जानकारी और खुदाई और जांच के बाद ही पता चल सकेगा। उस दौरान कई लोगों ने इस स्थान को राजभर राजाओं की रियासत बताया तो वहां बुद्ध की प्रतिमा मिलने के बाद बुद्ध धर्म की अनुयायी बुद्धकर भीम ज्योति समिति से जुड़े लोगों ने इसे बौद्ध कालीन बताते हुए उसके संरक्षण की मांग किया था।
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पुरातत्व विभाग की टीम ने आगे की खुदाई पर रोक लगाते हुए जल्द ही खुदाई कर जांच करने की बात कही थी लेकिन लगभग आठ महीने बाद भी यहां पर किसी भी प्रकार की खुदाई अथवा जांच नहीं हो सकी है। इस स्थल को लेकर तमाम प्रकार के दावे किए जा रहे हैं। इसे राजभर रियासत के समय 66 बीघा स्थल को राजभर रियासत की भूमि बताया जाता है तो वही बुद्ध प्रतिमा मिलने के बाद इस स्थल को बौद्ध कालीन बताया जा रहा है। सवाल है कि इतनी प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहर की जानकारी के बाद भी अभी तक शासन प्रशासन से इसके संरक्षण या जांच के लिए कोई पुख्ता कदम क्यों नहीं उठाया जा सका है।
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