{"_id":"6ab413b42aa0f3b1f2012afa","slug":"the-method-of-teaching-science-and-mathematics-will-change-mau-news-c-295-1-svns1028-152457-2026-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: विज्ञान और गणित की पढ़ाई का तरीका बदलेगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: विज्ञान और गणित की पढ़ाई का तरीका बदलेगा
विज्ञापन
जिले के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को केवल किताबों तक सीमित शिक्षा नहीं दी जाएगी, बल्कि वैज्ञानिक अवधारणाओं को प्रयोगों के माध्यम से समझ सकेंगे। शासन की पहल पर सरकारी विद्यालयों के छठवीं से आठवीं कक्षा के बच्चों को विज्ञान और गणित की किट के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी। प्रयोगात्मक शिक्षा से छात्र विषयों को लंबे समय तक याद रख सकेंगे। शिक्षकों को भी उपकरणों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जिले में 757 प्राथमिक, 159 उच्च प्राथमिक, 292 कंपोजिट विद्यालयों में लगभग 1.25 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। सरकार की तरफ से मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन, स्कूल कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और डिजिटल मॉनिटरिंग सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की कवायद तेजी से चल रही है। प्रथम चरण में उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में विज्ञान और गणित की किट के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी। किट में टेलिस्कोप, परखनली, चुंबक, थर्मामीटर, कंपास और प्रिज्म समेत विभिन्न उपकरण शामिल हैं। इनकी मदद से बच्चे विषयों को व्यावहारिक रूप से समझ सकेंगे।
विज्ञान और गणित की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित न रहकर प्रयोग आधारित होगी। शिक्षक उपकरणों की मदद से बच्चों को पढ़ाएंगे, जिससे कक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ेगी और विषयों को समझना आसान होगा। अधिकारियों की मानें ताे बच्चे स्वयं उपकरणों का उपयोग करेंगे, जिससे उनकी समझ बेहतर होगी। प्रयोगात्मक शिक्षा से छात्र विषयों को लंबे समय तक याद रख सकेंगे। शिक्षकों को भी उपकरणों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि किट का प्रभावी ढंग से उपयोग हो सके। विज्ञान और गणित किट की उपलब्धता से पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक और छात्र केंद्रित बनाने में मदद मिलेगी, इससे विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ने के साथ नवाचार की संभावनाएं भी विकसित होंगी।
विज्ञापन
इस बाबत जिला समन्वयक प्रशिक्षण डीपी यादव का कहना है कि जिले के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान और गणित की किट के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी। शासन से किट मिलते ही विद्यालयों को भेज दी जाएगी।
विज्ञापन
जिले में 757 प्राथमिक, 159 उच्च प्राथमिक, 292 कंपोजिट विद्यालयों में लगभग 1.25 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। सरकार की तरफ से मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन, स्कूल कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और डिजिटल मॉनिटरिंग सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की कवायद तेजी से चल रही है। प्रथम चरण में उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में विज्ञान और गणित की किट के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी। किट में टेलिस्कोप, परखनली, चुंबक, थर्मामीटर, कंपास और प्रिज्म समेत विभिन्न उपकरण शामिल हैं। इनकी मदद से बच्चे विषयों को व्यावहारिक रूप से समझ सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञान और गणित की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित न रहकर प्रयोग आधारित होगी। शिक्षक उपकरणों की मदद से बच्चों को पढ़ाएंगे, जिससे कक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ेगी और विषयों को समझना आसान होगा। अधिकारियों की मानें ताे बच्चे स्वयं उपकरणों का उपयोग करेंगे, जिससे उनकी समझ बेहतर होगी। प्रयोगात्मक शिक्षा से छात्र विषयों को लंबे समय तक याद रख सकेंगे। शिक्षकों को भी उपकरणों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि किट का प्रभावी ढंग से उपयोग हो सके। विज्ञान और गणित किट की उपलब्धता से पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक और छात्र केंद्रित बनाने में मदद मिलेगी, इससे विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ने के साथ नवाचार की संभावनाएं भी विकसित होंगी।
विज्ञापन
इस बाबत जिला समन्वयक प्रशिक्षण डीपी यादव का कहना है कि जिले के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान और गणित की किट के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी। शासन से किट मिलते ही विद्यालयों को भेज दी जाएगी।