मऊ। छुट्टा पशुओं को पकड़ कर पशु आश्रय स्थलों तक पहुंचाए जाने का शासन का आदेश हवाई साबित हो रहा है। नगर के मुख्य मार्ग सहित विभिन्न वार्डो में इन्हें घूमते हुए देखा जा सकता है। इनके आपस में भिड़ते रहने से अक्सर सड़क पर भगदड़ की स्थित बन रही है। इनकी जद में आकर कई लोग घायल हो चुके हैं। जबकि इनके बीच सड़क पर खड़ा हो जाने से यातायात व्यवस्था भी बाधित हो रही है। ऐसे में मुख्य मार्ग पर चलना खतरे से खाली नहीं है। उधर, अधिकारी इन पशुओं को गो आश्रय स्थल पर भेजे जाने की बात कह कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। नगरपालिका क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग, गाजीपुर तिराहा, जिला अस्पताल मार्ग, आजमगढ़ मोड़, रोडवेज बस स्टैंड, बाल निकेतन, चौक, मिर्जाहादीपुरा, ब्रह्मस्थान, भीटी, मुुंशीपुरा सहित विभिन्न प्रमुख स्थानों पर छुट्टा पशुुओं का सड़कों पर जमघट आम बात है। इनके इस तरह घूमने से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। हालांकि इन छुट्टा पशुओं को पकड़ कर रखने के लिए नगर क्षेेत्र में पशु आश्रय स्थल बनाए गए हैं। 26 पशु आश्रय स्थलों में 3987 छुट्टा पशु रखे गए हैं। लेकिन बावजूद इसके पशु सड़कों और गलियों में टहल रहे हैं। कभी यह लोगों के सामान पर हमला बोलते हैं तो कभी आपस में ही भिड़ जाते हैं। नतीजा यह है कि इनकी जद में आकर कई लोग चोटिल हो चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी नगर पालिका प्रशासन हरकत में नहीं आया है। इन्हें पकड़ कर गो आश्रय स्थल तक भेजने का काम कागज पर ही है। हालत यह है कि जिन पशुओं को आश्रय स्थल में रखा गया है उनके लिए भी चारे पानी की व्यवस्था दयनीय है। ऐसे में यहां से निकल भागे पशु बाजारों में घूमते हुए मिल जाएंगे। लोग बताते हैं कि इन पशुओं के कानों में टैग भी लगे होते हैं। लेकिन अधिकारियोें को इससे मतलब नहीं कि आखिर पशु आश्रय स्थल से वहां तक कैसे पहुंच जा रहे हैं। अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि नगर पालिका क्षेत्र मेें समय-समय पर छुट्टा पशुओं के पकड़ने का अभियान चलाया जाता है। ज्यादा पशु होने की स्थिति में उन्हें अन्य गो आश्रय स्थलों में भेजा जाता है।