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मनाया गया समर्थ नारी समर्थ भारत का प्रथम स्थापना दिवस

Fri, 05 Mar 2021 11:25 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 05 Mar 2021 11:25 PM IST
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The first foundation day of Samarth Nari Samarth India was celebrated
नगर के फातिमा तिराहा स्थित एक सदस्य के घर समर्थ नारी समर्थ भारत संस्था के स्थापना दिवस कार्यक्रम - फोटो : MAU
मऊ। जिला मुख्यालय स्थित सहादतपुरा मुहल्ले में एक अस्पताल के परिसर में शुक्रवार को समर्थ नारी समर्थ भारत का प्रथम स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन की जिला संयोजिका विनीता पांडेय ने किया। इस दौरान संगठन की महिलाओं ने अपने विचारों को रखा। कार्यक्रम का समापन खेलकूद से किया गया।
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प्रथम स्थापना दिवस पर संगठन से जुड़ी महिलाओं ने इस बार कार्यक्रमों को और भी बेहतर तरीके से करने का संकल्प लिया। साथ ही संगठन की मजबूती पर बल दिया गया। चर्चाओं में एक बात सामने आई कि संगठन के कार्यो में क्या नयापन लाया जाए। ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं संगठन से जुड़कर समर्थवान बनें। अपने संबोधन में जिला संयोजिका विनीता पांडेय ने कहा कि समर्थ नारी समर्थ भारत का स्थापना दिवस है, और इस अवसर पर सभी समर्थ नारियां एक दूसरे को समर्थवान बनाने का कार्य करें। जिला महासचिव नूपुर अग्रवाल ने कहाकि हमें मिलजुल कर इस अभियान को तभी पूर्णरुपेण तभी सफल बना सकते हैं, जब सभी महिलाएं समर्थवान होगी। कोषाध्यक्ष कंचन द्विवेदी ने कहा कि किसी भी संगठन को सफल बनाने के लिए सभी का एकजुट होना आवश्यक है। मीडिया प्रभारी प्रीतु लता पांडेय ने कहा पुरानी किंवदंती है, कि महिला ही महिला की शत्रु होती हैं , लेकिन समर्थ नारी समर्थ भारत की महिलाओं ने इसे मृथक साबित किया है।
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चिकित्सा संयोजिका डॉ. नम्रता श्रीवास्तव ने कहा हमारा संगठन उस पेड़ की तरह होनी चाहिए जो हर विधा से उपयोगी हो। क्रीड़ा संयोजिका पूजा राय ने कहा हम अपने कार्यो से लोगों की मनोदशा बदल सकते है। नीलम सर्राफ ने कहा अपनी अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए जो सही राह दिखाती हैं ।डाक्टर उत्तरा सिंह ने कहा हमारा आत्मबल ही समर्थ बनाने का पहला पायदान है । आभा त्रिपाठी ने कहा समर्थ होने के साथ-साथ शिक्षित होना भी आवश्यक है। पूनम पांडेय ने स्वदेशी उत्पादों पर बल दिया। विना गुप्ता,मीना अग्रवाल,कृष्णा खंडेवाल,ममता सक्सेना,सुनीता पांडेय, अनुभूति द्विवेदी, नीलम तिवारी, ज्योति खंडेवाल,प्रियंका खंडेवाल आदि महिलाओं ने भी अपने अपने विचारों को व्यक्त किया।
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