घोसी। मुहर्रम का चांद दिखते ही नगर में इस्तकबाले अजा की मजलिसें शुरू हो गईं। अजाखाने गुलजार हो गए और वहां ‘या हुसैन’ की दर्दभरी सदाएं गूंज उठीं। शिया समुदाय ने स्याह लिबास पहन लिए जबकि महिलाओं ने चूड़ियां तोड़ दीं। अब दो माह 10 दिनों तक गमे हुसैन मनाया जाएगा। उधर, पहली मुहर्रम रविवार को अजाख़ाना ए जैनबिया से अलम का जुलूस निकलेगा जिसमें दस्ता ए मासूमिया नौहाख्वानी करेगी। नगर के बड़ागांव में शनिवार को मुहर्रम का चांद नजर आते शिया समुदाय में गमे हुसैन से जुड़ गया। इमाम हुसैन के ग़म में उनकी नम हो गईं। चारों तरफ ‘या हुसैन’ की दर्दभरी सदाएं बुलंद होती रहीं। महिलाओं ने अपने बूंदे, बालियां और चूड़ियों को शहीदाने कर्बला के ग़म में त्याग दिया। घरों पर स्याह परचम लहराने लगे और लोगों ने स्याह लिबास पहन लिए। अजाखाने गुलजार हो गए। बड़े बूढ़े, बच्चे और तमाम लोग इमाम बारगाह के लिए निकल पड़े। सदर इमाम बारगाह पर अंजुमन सज्जादिया के नौहाख्वान शमीम हैदर ने नौहा पढ़ा। मुहल्ले के नीमतले इमाम चौक पर नजरे इमाम हुसैन कराई गई और हाजी ग़जनफर अब्बास के नौहे ‘फलक पे चांद मुहर्रम का जब नजर आया, सफ़र में याद मुसाफिर को अपना घर आया’ ने लोगों की आंखें नम कर दीं। सदर इमाम बारगाह, अजाख़ाना ए अबुतालिब, अब्बासी बीबी के फाटक, जाफरी अजाख़ाना, रौजा अब्बास अलमदार एवं अन्य स्थानों पर नौहा व मातम कर शहजादी बिन्ते रसूल इमाम हुसैन की मां को उनके लाल का पुरसा दिया गया। इस दौरान मजहर हुसैन, गुलाम हैदर, तफहीम हैदर, अहमद औन, लुकमान हैदर, जौहर अली, नफीस असग़र, तनवीर अब्बास, बाकर रजा, अजहर हुसैन उपस्थित रहे।