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परसिया में तटबंध टूटा, दर्जनों गांवों में घुसा पानी
mau news
Updated Fri, 18 Aug 2017 11:48 PM IST
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मधुबन के देवारा क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद विशुनीका पुरा में पानी से घिरी एक मड़ई।
मधुबन। देवरिया जिले में गुरुवार की रात तटबंध टूटने से तहसील क्षेत्र के नुरूल्लाहपुर और परसिया के बीच हाहाकार मच गया। हालांकि टूटे बंधे पर समय रहते देवरिया जिला प्रशासन ने काबू पा लिया। हालांकि देवरांचल के एक दर्जन गांव जलमग्न हो चुके हैं। तटबंध को गंभीरता से लेते हुए मऊ और देवरिया जिले के जिलाधिकारी मधुबन थाने में बैठकर समस्या के समाधान पर चर्चा किए और बांध टूटने से कोई खतरा नहीं बताया। वर्तमान समय में वहां जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। ग्रामीण और उप जिलाधिकारी बरहज परसिया में कैंप किए हैं।
तहसील क्षेत्र के उत्तरी छोर पर घाघरा नदी बहती है। घाघरा नदी में इस साल बाढ़ का पानी खतरे के निशान को पार कर गया है। हालात बाढ़ से दिन प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं। इसी बीच गुरुवार की रात पानी का दबाव बढ़ने के कारण परसिया नुरूल्लाहपुर तटबंध टूट गया। ग्रामीणों को जब इसकी जानकारी हुई, तो लोग पानी को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने लगे। इस बात की सूचना जनपद देवरिया के जिलाधिकारी सुजीत कुमार को मिली, तो उन्होंने मौके का निरीक्षण कर उपजिलाधिकारी बरहज और अन्य कर्मचारियों की तैनाती की। मौके पर मनरेगा के मजदूरों को लगाकर बोरियों में मिट्टी भरकर तटबंध का मरम्मत किया गया। हालांकि रिसाव अब भी जारी है। लोगों की माने तो तटबंध लगभग पांच से छह मीटर की चौड़ाई में टूटा है, जबकि जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने एक से डेढ़ मीटर टूटने की बात कही।
टूटे तटबंध का समय रहते मरम्मत नहीं किया जाता तो देवरिया जनपद के दो गांव परसिया और विशुनपुर के अलावा मऊ जनपद के नुरूल्लाहपुर,कचिला, बखरिया,सिसवा,के दर्जनों पुरवे तबाह हो जाते। इधर लगातार बाढ़ का पानी बढ़ने से नालों के अलावा तीन से आठ फुट तक खेतों में पानी भर गया है। दर्जन भर गांवों और पुरवों का सड़क व लोगों से संपर्क टूट गया है। दूर दराज क्षेत्र में बसे लोगों का घर टापू की शक्ल अख्तियार कर लिया है। चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। 1998 के बाद यह बड़ा जलप्लावन है। पानी की बढ़त इसी तरह रही तो अगले एक दो दिन में सबको बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर लाना पड़ सकता है। इस संबंध में गुरुवार को जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र कुमार ने उप जिलाधिकारी मधुबन और सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता वीरेंद्र पासवान के साथ हाहा नाला से लेकर दुबारी नई बस्ती स्थित बाढ़ चौकी के बीच निरीक्षण कर लोगों का हाल जाना।
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ऊंट के मुंह मे जीरा साबित हो रही है प्रशासन की नावें
मधुबन।दुर्गम स्थान पर बसा देवारा का कई पुरवा में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों की मुश्किलें जहां बढ़ गई हैं। वहीं बाढ़ के पानी से रास्ता डूबने से लोगों का संपर्क स्थानीय बाजार दुबारी,सुग्गिचौरी भैरोपुर आदि बाजारों से टूट गया है। लोंगो को अब नाव ही एक मात्र आने-जाने का साधन बचा है। जबकि प्रशासन द्वारा लगाई गई नावे ऊंट के मुंह मे जीरा साबित हो रही है। जिन घरों में केवल औरते व बच्चे है, उन्हें सबसे बड़ी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। भगत का पूरा,खैरा, नई बांध बस्ती, बिंदटोलिया,बिशुनी का पूरा,बैरकंटा,धुस, मनमन का पूरा समेत एक दर्जन गांवों और पुरवे पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।लोंगो को शौच आदि के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। पटाव पर बने मंडईयो में बाढ़ का पानी घुसने को बेताब है। हालांकि इसे प्रशासन अभी स्थिती ठीक बता रहा है। बावजूद इसके पीड़ितों की दुश्वारियां देख दुबारी की ग्राम प्रधान रंजना सिंह ने गुरूवार को नाव पर खाद्य सामग्री व अन्य दैनिक उपयोगी सामान लेकर अपनी ग्राम सभा के विसुनी का पुरा, नंदजी का पुरा आदि पुरवों में पहुंचकर राहत सामग्री प्रधान ने एक-एक कर दो दर्जन अति गरीब परिवार में चावल, दाल, सरसों का तेल, आलू, प्याज, मिर्चा, मसाला, माचिस, नमक, हल्दी समेत अन्य दैनिक उपयोग का सामान वितरण किया और बाढ़ पीड़ितों को हर सम्भव मदद करने का आश्वासन दी। प्रधान श्रीमती सिंह ने कही कि दैवीय आपदा के रूप में आयी बाढ़ से प्रभावित लोग घबड़ाएं नहीं, सतर्कता बरतने के साथ साहस बनाए रखें और कोई सूचना हो तो फौरी तौर पर मुझे दे या बाढ़ चौकियों पर लिखे नम्बरो पर सूचना दे ताकि किसी भी इमरजेंसी की देखभाल की जा सके।ग्रामप्रधान रंजन सिंह और जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र कुमार ने स्वयंसेवी संगठनों से बाढ़ पीड़ितों के सहयोग के लिए हाथ आगे बढ़ाने के अपील की।प्रधान ने तहसील व जिला प्रशासन से पर्याप्त नाव व बाढ़ चौकी के बजाए बाढ़ प्रभावित गांव में चिकित्सकीय टीम के कैम्प करने की मांग की। बता दें कि ग्रामसभा दुबारी के कई गांव व पुरवे बंधे के उस पार बसें है जो हर आल बाढ़ और आग का कहर झेलने को मजबूर है। राहत सामग्री रमेश बिंद, रामकुमार, रणधीर, धनमतिया देवी, नरेश, रमेश, कोविन्दर, बांसदेव, राजेन्द्र सहित दो दर्जन से अधिक अति निर्धन परिवारों में वितरित किया गया। इस अवसर पर प्रधान प्रतिनिधि अनिल सिंह, राममिलन मौर्य, धीरेन्द्र सिंह, महेश उपाध्याय, बलराम जायसवाल आदि उपस्थित रहे।
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तहसील क्षेत्र के उत्तरी छोर पर घाघरा नदी बहती है। घाघरा नदी में इस साल बाढ़ का पानी खतरे के निशान को पार कर गया है। हालात बाढ़ से दिन प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं। इसी बीच गुरुवार की रात पानी का दबाव बढ़ने के कारण परसिया नुरूल्लाहपुर तटबंध टूट गया। ग्रामीणों को जब इसकी जानकारी हुई, तो लोग पानी को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने लगे। इस बात की सूचना जनपद देवरिया के जिलाधिकारी सुजीत कुमार को मिली, तो उन्होंने मौके का निरीक्षण कर उपजिलाधिकारी बरहज और अन्य कर्मचारियों की तैनाती की। मौके पर मनरेगा के मजदूरों को लगाकर बोरियों में मिट्टी भरकर तटबंध का मरम्मत किया गया। हालांकि रिसाव अब भी जारी है। लोगों की माने तो तटबंध लगभग पांच से छह मीटर की चौड़ाई में टूटा है, जबकि जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने एक से डेढ़ मीटर टूटने की बात कही।
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टूटे तटबंध का समय रहते मरम्मत नहीं किया जाता तो देवरिया जनपद के दो गांव परसिया और विशुनपुर के अलावा मऊ जनपद के नुरूल्लाहपुर,कचिला, बखरिया,सिसवा,के दर्जनों पुरवे तबाह हो जाते। इधर लगातार बाढ़ का पानी बढ़ने से नालों के अलावा तीन से आठ फुट तक खेतों में पानी भर गया है। दर्जन भर गांवों और पुरवों का सड़क व लोगों से संपर्क टूट गया है। दूर दराज क्षेत्र में बसे लोगों का घर टापू की शक्ल अख्तियार कर लिया है। चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। 1998 के बाद यह बड़ा जलप्लावन है। पानी की बढ़त इसी तरह रही तो अगले एक दो दिन में सबको बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर लाना पड़ सकता है। इस संबंध में गुरुवार को जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र कुमार ने उप जिलाधिकारी मधुबन और सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता वीरेंद्र पासवान के साथ हाहा नाला से लेकर दुबारी नई बस्ती स्थित बाढ़ चौकी के बीच निरीक्षण कर लोगों का हाल जाना।
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ऊंट के मुंह मे जीरा साबित हो रही है प्रशासन की नावें
मधुबन।दुर्गम स्थान पर बसा देवारा का कई पुरवा में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों की मुश्किलें जहां बढ़ गई हैं। वहीं बाढ़ के पानी से रास्ता डूबने से लोगों का संपर्क स्थानीय बाजार दुबारी,सुग्गिचौरी भैरोपुर आदि बाजारों से टूट गया है। लोंगो को अब नाव ही एक मात्र आने-जाने का साधन बचा है। जबकि प्रशासन द्वारा लगाई गई नावे ऊंट के मुंह मे जीरा साबित हो रही है। जिन घरों में केवल औरते व बच्चे है, उन्हें सबसे बड़ी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। भगत का पूरा,खैरा, नई बांध बस्ती, बिंदटोलिया,बिशुनी का पूरा,बैरकंटा,धुस, मनमन का पूरा समेत एक दर्जन गांवों और पुरवे पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।लोंगो को शौच आदि के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। पटाव पर बने मंडईयो में बाढ़ का पानी घुसने को बेताब है। हालांकि इसे प्रशासन अभी स्थिती ठीक बता रहा है। बावजूद इसके पीड़ितों की दुश्वारियां देख दुबारी की ग्राम प्रधान रंजना सिंह ने गुरूवार को नाव पर खाद्य सामग्री व अन्य दैनिक उपयोगी सामान लेकर अपनी ग्राम सभा के विसुनी का पुरा, नंदजी का पुरा आदि पुरवों में पहुंचकर राहत सामग्री प्रधान ने एक-एक कर दो दर्जन अति गरीब परिवार में चावल, दाल, सरसों का तेल, आलू, प्याज, मिर्चा, मसाला, माचिस, नमक, हल्दी समेत अन्य दैनिक उपयोग का सामान वितरण किया और बाढ़ पीड़ितों को हर सम्भव मदद करने का आश्वासन दी। प्रधान श्रीमती सिंह ने कही कि दैवीय आपदा के रूप में आयी बाढ़ से प्रभावित लोग घबड़ाएं नहीं, सतर्कता बरतने के साथ साहस बनाए रखें और कोई सूचना हो तो फौरी तौर पर मुझे दे या बाढ़ चौकियों पर लिखे नम्बरो पर सूचना दे ताकि किसी भी इमरजेंसी की देखभाल की जा सके।ग्रामप्रधान रंजन सिंह और जिलाधिकारी ऋषिरेंद्र कुमार ने स्वयंसेवी संगठनों से बाढ़ पीड़ितों के सहयोग के लिए हाथ आगे बढ़ाने के अपील की।प्रधान ने तहसील व जिला प्रशासन से पर्याप्त नाव व बाढ़ चौकी के बजाए बाढ़ प्रभावित गांव में चिकित्सकीय टीम के कैम्प करने की मांग की। बता दें कि ग्रामसभा दुबारी के कई गांव व पुरवे बंधे के उस पार बसें है जो हर आल बाढ़ और आग का कहर झेलने को मजबूर है। राहत सामग्री रमेश बिंद, रामकुमार, रणधीर, धनमतिया देवी, नरेश, रमेश, कोविन्दर, बांसदेव, राजेन्द्र सहित दो दर्जन से अधिक अति निर्धन परिवारों में वितरित किया गया। इस अवसर पर प्रधान प्रतिनिधि अनिल सिंह, राममिलन मौर्य, धीरेन्द्र सिंह, महेश उपाध्याय, बलराम जायसवाल आदि उपस्थित रहे।