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Mau News: चालकों की कमी से जूझ रहा रोडवेज, चार-चार दिनों तक लगातार चला रहे बस, झपकी आने से हो रहे हादसे
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रोशन सिंह
मऊ। परिवहन निगम के पास चालकों की कमी से जूझ रहा है। मऊ डिपो में 35 चालक कम हैं। महाकुंभ में तीन से चार दिन लगातार बस चलाने से चालकों की नींद पूरी नहीं पा रही है। थकान के चलते उन्हें झपकी आने से बसें दुर्घटनाग्रस्त हो रही हैं। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान 12 जनवरी से 28 फरवरी तक सभी चालक और परिचालकों की छुट्टी रद्द कर दी गई है। महाकुंभ में अनुमान से अधिक भीड़ होने से एक माह से प्रयागराज जाने वाले सभी राजमार्गों पर जाम लग रहा है। इसके चलते रोडवेज बस चालकों को तीन से चार दिनों तक आराम का मौका नहीं मिल रहा है। कुछ चालकों ने अपना नाम नहीं लिखने की शर्त पर अमर उजाला को अपनी पीड़ा बताई। उन्होंने कहा कि 370 किमी चलने के बाद उन्हें आराम की जरूरत होती है। लेकिन बीते एक माह से 450 किमी चलने के बाद केवल खाना खाने का समय मिलता है। नहाने और खाना खाने के तुरंत बाद ड्यूटी पर निकल जाते हैं। सबसे अधिक परेशानी उन्हें जाम में फंसने से होती है। प्रयागराज जाते और आते समय मुंगराबादशाहपुर, सहसो चौराहा और जौनपुर में दो से तीन घंटे जाम में फंसे रहते हैं। बस धीरे-धीरे रेंगती है, इसके चलते वो आराम नहीं कर पाते हैं न ही चाय पी पाते हैं। जाम से निकलने के बाद यदि कुछ देर के लिए चाय नाश्ता के लिए बस रोकते भी हैं तो यात्री जल्दी चलने के लिए दबाव बना देते हैं। चालकों की कमी होते हुए भी रोडवेज बसों का निरंतर संचालन के लिए सभी ने प्रोत्साहन राशि की मांग की है, इससे आगे भी ऐसी परिस्थितियों में मनोबल बना रहे। मऊ डिपो में परिवहन निगम की 54 बसें हैं, जिसे चलाने के लिए 82 चालक हैं। इनमें से 10 नियमित और 72 संविदा चालक हैं। जून 2024 से लगातार संविदा चालकों की भर्ती निकालना और रोजगार मेले पहुंचकर चालक के लिए युवाओं का चयन करना भी रोडवेज बहुत लाभ नहीं मिला। 30 से अधिक चालकों को ट्रेनिंग के लिए भेजा गया, लेकिन कुछ न कुछ गलतियों के चलते छंटनी हो गई।
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केस 1
मऊ कोतवाली क्षेत्र के मुंशीपुरा ओवरब्रिज पर 16 फरवरी की रात करीब 10:20 बजे बलिया और डा. आंबेडकर नगर डिपो की रोडवेज बसों की आमने सामने टक्कर हो गई। दुर्घटना का कारण चालकों को झपकी आना बताया गया। इसमें दोनों बसों के करीब 10 यात्री घायल हो गए थे। कुछ का इलाज जिला अस्पताल और कुछ ने प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया।
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केस दो
दोहरीघाट डिपो की रोडवेज बस श्रद्धालुओं को लेकर प्रयागराज महाकुंभ गई थी। 21 फरवरी की देर शाम प्रयागराज से श्रद्धालुओं को लेकर दोहरीघाट के लिए रवाना हुई। बस में 50 श्रद्धालु थे। 22 फरवरी को सुबह तड़के चार बजे बस दोहरीघाट के रामनगर पुलिस बूथ के पास पहुंची थी, कि चालक को झपकी आ गई। बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। बस में सवार रामनाथ शर्मा (70), अनिकिरा (29) निवासी गोरखपुर, कंचन (50) निवासी खलिलाबाद संतकबीरनगर, शिवजोर साहनी (65), चंपा देवी (45), कलिपा (52) निवासी सीतामढ़ी बिहार के श्रद्धालु घायल हो गए।
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केस तीन
22 फरवरी का रात रोडवेज बस यात्रियों को लेकर आजमगढ़ जा रही थी। अभी नगर कोतवाली क्षेत्र के मुंशीपुरा ओवरब्रिज पर पहुंची थी कि चालक को झपकी आने लगी। इतने में यात्रियों ने बस रोकवाई और सभी को नीचे उतारने के साथ ही चालक को आराम करने को कहा। फिर सभी रोडवेज बस स्टेशन वापस लौटे और दूसरी बस से गंतव्य के लिए रवाना हुए।
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कोट -
मऊ डिपो में चालकों की कमी है। जितने चालक हैं, सभी पूरे लगन के साथ ड्यूटी कर रहे हैं। हालांकि उनकी छुट्टी रद्द कर दी गई है। स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए उन्हें काम करने को कहा जा रहा है।
- हरिशंकर पांडेय, एआरएम, मऊ
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मऊ। परिवहन निगम के पास चालकों की कमी से जूझ रहा है। मऊ डिपो में 35 चालक कम हैं। महाकुंभ में तीन से चार दिन लगातार बस चलाने से चालकों की नींद पूरी नहीं पा रही है। थकान के चलते उन्हें झपकी आने से बसें दुर्घटनाग्रस्त हो रही हैं। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान 12 जनवरी से 28 फरवरी तक सभी चालक और परिचालकों की छुट्टी रद्द कर दी गई है। महाकुंभ में अनुमान से अधिक भीड़ होने से एक माह से प्रयागराज जाने वाले सभी राजमार्गों पर जाम लग रहा है। इसके चलते रोडवेज बस चालकों को तीन से चार दिनों तक आराम का मौका नहीं मिल रहा है। कुछ चालकों ने अपना नाम नहीं लिखने की शर्त पर अमर उजाला को अपनी पीड़ा बताई। उन्होंने कहा कि 370 किमी चलने के बाद उन्हें आराम की जरूरत होती है। लेकिन बीते एक माह से 450 किमी चलने के बाद केवल खाना खाने का समय मिलता है। नहाने और खाना खाने के तुरंत बाद ड्यूटी पर निकल जाते हैं। सबसे अधिक परेशानी उन्हें जाम में फंसने से होती है। प्रयागराज जाते और आते समय मुंगराबादशाहपुर, सहसो चौराहा और जौनपुर में दो से तीन घंटे जाम में फंसे रहते हैं। बस धीरे-धीरे रेंगती है, इसके चलते वो आराम नहीं कर पाते हैं न ही चाय पी पाते हैं। जाम से निकलने के बाद यदि कुछ देर के लिए चाय नाश्ता के लिए बस रोकते भी हैं तो यात्री जल्दी चलने के लिए दबाव बना देते हैं। चालकों की कमी होते हुए भी रोडवेज बसों का निरंतर संचालन के लिए सभी ने प्रोत्साहन राशि की मांग की है, इससे आगे भी ऐसी परिस्थितियों में मनोबल बना रहे। मऊ डिपो में परिवहन निगम की 54 बसें हैं, जिसे चलाने के लिए 82 चालक हैं। इनमें से 10 नियमित और 72 संविदा चालक हैं। जून 2024 से लगातार संविदा चालकों की भर्ती निकालना और रोजगार मेले पहुंचकर चालक के लिए युवाओं का चयन करना भी रोडवेज बहुत लाभ नहीं मिला। 30 से अधिक चालकों को ट्रेनिंग के लिए भेजा गया, लेकिन कुछ न कुछ गलतियों के चलते छंटनी हो गई।
केस 1
मऊ कोतवाली क्षेत्र के मुंशीपुरा ओवरब्रिज पर 16 फरवरी की रात करीब 10:20 बजे बलिया और डा. आंबेडकर नगर डिपो की रोडवेज बसों की आमने सामने टक्कर हो गई। दुर्घटना का कारण चालकों को झपकी आना बताया गया। इसमें दोनों बसों के करीब 10 यात्री घायल हो गए थे। कुछ का इलाज जिला अस्पताल और कुछ ने प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया।
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केस दो
दोहरीघाट डिपो की रोडवेज बस श्रद्धालुओं को लेकर प्रयागराज महाकुंभ गई थी। 21 फरवरी की देर शाम प्रयागराज से श्रद्धालुओं को लेकर दोहरीघाट के लिए रवाना हुई। बस में 50 श्रद्धालु थे। 22 फरवरी को सुबह तड़के चार बजे बस दोहरीघाट के रामनगर पुलिस बूथ के पास पहुंची थी, कि चालक को झपकी आ गई। बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। बस में सवार रामनाथ शर्मा (70), अनिकिरा (29) निवासी गोरखपुर, कंचन (50) निवासी खलिलाबाद संतकबीरनगर, शिवजोर साहनी (65), चंपा देवी (45), कलिपा (52) निवासी सीतामढ़ी बिहार के श्रद्धालु घायल हो गए।
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केस तीन
22 फरवरी का रात रोडवेज बस यात्रियों को लेकर आजमगढ़ जा रही थी। अभी नगर कोतवाली क्षेत्र के मुंशीपुरा ओवरब्रिज पर पहुंची थी कि चालक को झपकी आने लगी। इतने में यात्रियों ने बस रोकवाई और सभी को नीचे उतारने के साथ ही चालक को आराम करने को कहा। फिर सभी रोडवेज बस स्टेशन वापस लौटे और दूसरी बस से गंतव्य के लिए रवाना हुए।
कोट -
मऊ डिपो में चालकों की कमी है। जितने चालक हैं, सभी पूरे लगन के साथ ड्यूटी कर रहे हैं। हालांकि उनकी छुट्टी रद्द कर दी गई है। स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए उन्हें काम करने को कहा जा रहा है।
- हरिशंकर पांडेय, एआरएम, मऊ