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शिक्षामित्रों की हुई काउंसिलिंग
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Sat, 18 Apr 2015 11:44 PM IST
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जिले के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को शिक्षक पद पर समायोजित करने के क्रम में शनिवार को काउंसिलिंग शुरू हुई। इसके चलते सुबह से ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में गहमागहमी रही।
शिक्षामित्रों और उनके परिवारीजन की यहां पर भारी भीड़ रही। कड़ी धूप के बावजूद विभाग की ओर से काउंटर के पास छाया तथा पेयजल की व्यवस्था न किए जाने से अभ्यर्थियों को परेशानी उठानी पड़ी। वहीं सूची में खामी रहने के चलते शिक्षामित्र इधर उधर भटकते देखे गए।
जिले के परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्रों के दूसरे चरण में शिक्षक पद पर समायोजित करने के तहत लगभग 850 पदों के सापेक्ष शनिवार को काउंसिलिंग शुरू हुई। पहले दिन 628 पदों पर महिलाओं की काउंसिलिंग हुई। इसके लिए छह काउंटर बनाए गए थे।
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बीएसए परिसर में छाया तथा पेयजल की व्यवस्था नहीं रहने से शिक्षामित्रों तथा उनके परिजनों को असुविधा का सामना करना पड़ा। कड़ी कड़ी धूप होने के चलते काउंटर पर काफी देर तक अपनी बारी का प्रतीक्षा करना पड़ रहा था।
वहीं सूची में तकनीकी खामी आने के चलले शिक्षामित्रों को इधर उधर भटकते देखा गया। बीएसए परिसर में सहायता केंद्र बनाया तो गया था लेकिन अभ्यर्थी संतुष्ट नहीं हो रहे थे। बीएसए कार्यालय का गेट बंद किए जाने से शिक्षामित्र व परिजन अंदर नहीं जा पा रहे थे। तलवार लटकने के भय से कोई मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं था।
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शिक्षामित्रों और उनके परिवारीजन की यहां पर भारी भीड़ रही। कड़ी धूप के बावजूद विभाग की ओर से काउंटर के पास छाया तथा पेयजल की व्यवस्था न किए जाने से अभ्यर्थियों को परेशानी उठानी पड़ी। वहीं सूची में खामी रहने के चलते शिक्षामित्र इधर उधर भटकते देखे गए।
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जिले के परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्रों के दूसरे चरण में शिक्षक पद पर समायोजित करने के तहत लगभग 850 पदों के सापेक्ष शनिवार को काउंसिलिंग शुरू हुई। पहले दिन 628 पदों पर महिलाओं की काउंसिलिंग हुई। इसके लिए छह काउंटर बनाए गए थे।
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बीएसए परिसर में छाया तथा पेयजल की व्यवस्था नहीं रहने से शिक्षामित्रों तथा उनके परिजनों को असुविधा का सामना करना पड़ा। कड़ी कड़ी धूप होने के चलते काउंटर पर काफी देर तक अपनी बारी का प्रतीक्षा करना पड़ रहा था।
वहीं सूची में तकनीकी खामी आने के चलले शिक्षामित्रों को इधर उधर भटकते देखा गया। बीएसए परिसर में सहायता केंद्र बनाया तो गया था लेकिन अभ्यर्थी संतुष्ट नहीं हो रहे थे। बीएसए कार्यालय का गेट बंद किए जाने से शिक्षामित्र व परिजन अंदर नहीं जा पा रहे थे। तलवार लटकने के भय से कोई मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं था।