{"_id":"68af4ed2e42abde919041dd5","slug":"the-ancient-sita-kund-is-in-a-bad-condition-the-pond-is-filled-with-water-hyacinth-mau-news-c-295-1-svns1028-132754-2025-08-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: प्राचीन सीता कुंड बदहाल, पोखरा जलकुंभी से पटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: प्राचीन सीता कुंड बदहाल, पोखरा जलकुंभी से पटा
विज्ञापन
जलकुंभी से पटा प्राचीन ऐतिहासिक पोखरी सीताकुंड।संवाद
घोसी। स्थानीय तहसील मुख्यालय से सटे दक्षिण स्थित प्राचीन और पौराणिक सीताकुंड पोखरा प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते बदहाल है। पूरा तालाब जलकुंभी से पटा हुआ है। प्रत्येक वर्ष सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। लेकिन तालाब को मूल रूप में नहीं लाया जा सका। अतिक्रमण से पौराणिक तालाब का अस्तित्व खतरे में है।
मान्यता है कि भगवान श्रीराम के मिथिला से माता सीता एवं लक्षण के साथ अयोध्या आते समय इस सीताकुंड पोखरे पर विश्राम किया था। साथ ही माता सीता ने स्नान किया था। मान्यता है कि पोखरे में स्नान करने से चर्म रोग दूर होता है। स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रत्येक वर्ष साफ सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी सीताकुंड जलकुंभी से पटा रहता है। विभागीय लापरवाही से अतिक्रमण के चलते तालाब का क्षेत्रफल सिमटता जा रहा हेै। पोखरे की सुंदरीकरण के लिए तत्कालीन कैबिनेट मंत्री और पूर्व राज्यपाल फागू चौहान ने वर्ष 2010-11 में पर्यटन स्थल के रूप में लाखों रुपये मुहैया कराया था। लेकिन साफ सफाई करने के बाद उसी हालत में छोड़ दिया गया। लगभग 15 वर्ष पूर्व नगर पंचायत से नाले का निर्माण कराया गया। जिसके माध्यम से लोगों के घरों का गंदे पानी पोखरे में गिरता है। गंदे पानी के चलते लोगों के खुजली जैसे धर्म रोग की बीमारी का समाधान होना अब केवल कहावत की बात रह गई है।
दो करोड़ 21 लाख आवंटित, पर काम अभी तक शुरू नहीं हो सका
कैबिनेट मंत्री एके शर्मा ने पर्यटन स्थल के रूप में इसे विकसित करने के लिए दो करोड़ 21 लाख रुपये आवंटित किया, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हो सका। इस बाबत अधिशासी अधिकारी अनिल कुमार का कहना है कि प्राचीन सीताकुंड पोखरे की सफाई की जाती है। सुंदरीकरण का कार्य पर्यटन विभाग की ओर से किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मान्यता है कि भगवान श्रीराम के मिथिला से माता सीता एवं लक्षण के साथ अयोध्या आते समय इस सीताकुंड पोखरे पर विश्राम किया था। साथ ही माता सीता ने स्नान किया था। मान्यता है कि पोखरे में स्नान करने से चर्म रोग दूर होता है। स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रत्येक वर्ष साफ सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी सीताकुंड जलकुंभी से पटा रहता है। विभागीय लापरवाही से अतिक्रमण के चलते तालाब का क्षेत्रफल सिमटता जा रहा हेै। पोखरे की सुंदरीकरण के लिए तत्कालीन कैबिनेट मंत्री और पूर्व राज्यपाल फागू चौहान ने वर्ष 2010-11 में पर्यटन स्थल के रूप में लाखों रुपये मुहैया कराया था। लेकिन साफ सफाई करने के बाद उसी हालत में छोड़ दिया गया। लगभग 15 वर्ष पूर्व नगर पंचायत से नाले का निर्माण कराया गया। जिसके माध्यम से लोगों के घरों का गंदे पानी पोखरे में गिरता है। गंदे पानी के चलते लोगों के खुजली जैसे धर्म रोग की बीमारी का समाधान होना अब केवल कहावत की बात रह गई है।
विज्ञापन
दो करोड़ 21 लाख आवंटित, पर काम अभी तक शुरू नहीं हो सका
कैबिनेट मंत्री एके शर्मा ने पर्यटन स्थल के रूप में इसे विकसित करने के लिए दो करोड़ 21 लाख रुपये आवंटित किया, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं हो सका। इस बाबत अधिशासी अधिकारी अनिल कुमार का कहना है कि प्राचीन सीताकुंड पोखरे की सफाई की जाती है। सुंदरीकरण का कार्य पर्यटन विभाग की ओर से किया जा रहा है।
विज्ञापन