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Mau News: 50 से कम छात्र संख्या वाले 341 स्कूलों के विलय के मामले में शिक्षक संगठन लामबंद

Mon, 23 Jun 2025 12:17 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 23 Jun 2025 12:17 AM IST
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Teachers' unions mobilized against the merger of 341 schools with less than 50 students
मऊ। जिले में 50 से कम छात्र संख्या वाले 341 परिषदीय स्कूलों को आसपास के स्कूलों में मर्ज करने के खिलाफ शिक्षक संगठन लामबंद हो गए हैं। शिक्षक संगठन के नेताओं का का कहना है स्कूलों को विलय करने से छात्रों की दूर बढ़ेगी। विद्यार्थियों के नामांकन का ग्राफ घटेगा, क्योंकि दूर के स्कूल में पढ़ाने के लिए अभिभावक तैयार नहीं होंगे।
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जिले में 757 प्राथमिक, 159 उच्च प्राथमिक, 292 कंपोजिट विद्यालय हैं। शासन की तरफ से 50 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों के बच्चों को नजदीक के स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। विभाग की तरफ से जिले में 50 से कम छात्र संख्या वाले 341 परिषदीय विद्यालयों को नजदीक के विद्यालयों में विलय करने की योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए आला अधिकारी पूरा जोर लगाए हुए हैं। एक जुलाई से पूर्व ही प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसी बीच परिषदीय विद्यालयों के विलय (पेयरिंग) के विरोध करने की प्रक्रिया गति पकड़ रही है। इस संबंध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष कृष्णानंद राय का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता में शिक्षा होना चाहिए। यदि ऐसे विद्यालय बंद कर दिए जाएंगे तो पिछड़े क्षेत्रों के बच्चों को जरूरी शिक्षा से वंचित होना पड़ेगा। यह निर्णय छात्र व शिक्षक किसी के हित में नहीं है। विद्यालयों में 50 से कम छात्र संख्या है, तो शिक्षकों की समस्या का समाधान किया जाए। नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों को समय दिया जाए। विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अंजनी कुमार सिंह का कहना है कि कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का नजदीक के विद्यालय में मर्ज किए जाने से बच्चों को अपने घर से दूर प्राथमिक शिक्षा के लिए जाना पड़ेगा। इसका सीधा असर यह होगा कि स्कूल में ड्रॉप आउट दर बढ़ेगी। बड़ी संख्या मेें बालिकाएं स्कूल छोड़ने को विवश होंगी। सरकार को इस पर पुनर्विचार करके इसे वापस लेना चाहिए। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. रामविलास भारती का कहना है कि इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्र में नौनिहालों को शिक्षा से वंचित रहना पड़ेगा। उनका यह भी कहना था कि आरटीई एक्ट का भी उल्लंघन है। अगर सरकारी स्कूलों में नामांकन घट रहा है तो इसका समाधान शिक्षक और संसाधन बढ़ाकर किया जाए, न कि स्कूलों का विलय कर। शिक्षकों के खाली पदों को भरा जाए।
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सरकारी स्कूलों के एक किमी की परीधी में निजी स्कूल की मान्यता नहीं
प्राथमिक विद्यालयों की एक किलोमीटर की परिधि में किसी भी निजी स्कूल को मान्यता न देने का प्रावधान है। फिर भी विभागीय अधिकारी नियमों का उल्लंघन करते हुए परिषदीय विद्यालयों के एक किलोमीटर की परिधि में ही निजी स्कूलों को मान्यता दिए हैं। सरकार पहले अभियान चलाकर गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को बंद कराए। उसके बाद परिषदीय स्कूलों के एक किलोमीटर की परिधि में दिए गए सभी नियम विरुद्ध मान्यता को वापस ले। अन्यथा संगठन आंदोलन करने को बाध्य होगा।
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