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Mau News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से टीबी की जांच एक साल से ठप
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देश के कुछ जिलों में हालही में मेक इन इंडिया के एआई एप को ट्रायल के तौर पर लांच किया गया था। जिसमें प्रदेश के आठ जिलों में मऊ भी शामिल था। दावा किया गया था आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिये मात्र चंद मिनट में ही टीबी की जांच कर उसकी रिपोर्ट मिल जाएगी और उसी समय मरीज का उपचार शुरू कर दिया जाएगा। एप को लांच करने के लिए स्वास्थकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया गया था। देश के कुछ जिलों में एप को ट्रायल के तौर पर लांच किया गया था। लेकिन अब एआई से जांच नहीं हो पा रही है। एप मरीजों की जांच में अनुपयोगी साबित हो रहा है।
मऊ स्थित टीबी क्लीनिक में एआई से पहले टीबी के मरीजों की पहचान एक्सरे, माइक्रोस्कोपी, स्पूटम की जांच, सीबी नाट, ट्रूनॉट से टीबी मरीज की जांच से होती थी। लेकिन एप के लांच होने के बाद से दावा किया गया था कि मरीज को इन सभी जांच प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। एप के संचालन के लिए सिर्फ डिजिटल एक्सरे का होना अनिवार्य था। एआई की जांच में कहा गया था कि टीबी के मरीज की एक्सरे रिपोर्ट को एप से स्कैन कर उसी दौरान एप मरीज की पहचान कर लेगा। टीबी की पहचान होने के बाद मरीज का पंजीकरण निक्षय पोर्टल पर किया जाएगा और सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाएं दी जाएंगी। एआई का एप से महज दो माह तक काम हुआ। जबकि अब एक साल से काम पूरी तरह बंद हो गया है। अब फिर पुरानी पद्धति से ही जांच हो रही है। विभाग के सूत्रों की माने तो एआई से जांच की रिपोर्ट ही सही नहीं आ रही थी। चिकित्सक सहित मरीज भी उस जांच को लेकर संदेह करते थे।
3728 है टीबी के मरीजों की संख्या
2713 को मिल रहा निक्षय पोषण योजना का लाभ
22 सेंटर पर हो रही टीबी की जांच
127 नए मरीज मिले टीबी खोज अभियान के दौरान
जनपद में एआई से टीबी मरीजों की जांच का बीते साल शुरू किया गया था। अब वह जांच बंद हो गई है। अब पहले की तरह एक्सरे, माइक्रोस्कोपी, स्पूटम की जांच, सीबी नाट, ट्रूनाट से टीबी मरीज की जांच से हो रही है।-डॉ. आरके सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी।
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मऊ स्थित टीबी क्लीनिक में एआई से पहले टीबी के मरीजों की पहचान एक्सरे, माइक्रोस्कोपी, स्पूटम की जांच, सीबी नाट, ट्रूनॉट से टीबी मरीज की जांच से होती थी। लेकिन एप के लांच होने के बाद से दावा किया गया था कि मरीज को इन सभी जांच प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। एप के संचालन के लिए सिर्फ डिजिटल एक्सरे का होना अनिवार्य था। एआई की जांच में कहा गया था कि टीबी के मरीज की एक्सरे रिपोर्ट को एप से स्कैन कर उसी दौरान एप मरीज की पहचान कर लेगा। टीबी की पहचान होने के बाद मरीज का पंजीकरण निक्षय पोर्टल पर किया जाएगा और सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाएं दी जाएंगी। एआई का एप से महज दो माह तक काम हुआ। जबकि अब एक साल से काम पूरी तरह बंद हो गया है। अब फिर पुरानी पद्धति से ही जांच हो रही है। विभाग के सूत्रों की माने तो एआई से जांच की रिपोर्ट ही सही नहीं आ रही थी। चिकित्सक सहित मरीज भी उस जांच को लेकर संदेह करते थे।
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3728 है टीबी के मरीजों की संख्या
2713 को मिल रहा निक्षय पोषण योजना का लाभ
22 सेंटर पर हो रही टीबी की जांच
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जनपद में एआई से टीबी मरीजों की जांच का बीते साल शुरू किया गया था। अब वह जांच बंद हो गई है। अब पहले की तरह एक्सरे, माइक्रोस्कोपी, स्पूटम की जांच, सीबी नाट, ट्रूनाट से टीबी मरीज की जांच से हो रही है।-डॉ. आरके सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी।
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