{"_id":"5b308c2147faa31ead223ff7ef18f8cf","slug":"take-the-credit-forward-work-behind-the-water-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रेय लेने में आगे, काम में पीछे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रेय लेने में आगे, काम में पीछे
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Tue, 02 Jun 2015 12:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सौ बेड के जिला महिला अस्पताल को स्वीकृत कराने और निर्माण का श्रेय सभी राजनैतिक पार्टियों ने लिया। लेकिन कार्य पूरा किसी ने करवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। निर्माण का कार्य अधर में लटका है।
पुराने जिला अस्पताल परिसर में ही प्रस्तावित महिला अस्पताल के लिए शासन ने 20 करोड़ की धनराशि दो साल पूर्व स्वीकृत की। निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को दी गई है। कुछ माह पूर्व छोटेमोटे भवनों को गिराकर काम शुरू करने की कवायद की गई। लेकिन काम में तेजी नहीं आई। स्थिति जस की तस बनी हुई है।
वर्ष 2010 में मऊ के दौरे पर आए अखिलेश यादव ने यहां पर जिला महिला अस्पताल खोलने का आश्वासन दिया। इसके बाद महिला अस्पताल के लिए श्रेय लेने के लिए राजनैतिक दलों में होड़ मच गई।
विज्ञापन
मायावती शासन काल में 29 जनवरी 2011 को तत्कालीन बसपा सांसद दारा सिंह चौहान और राज्यसभा सदस्य सालिम अंसारी के संयुक्त प्रयास से 30 बेड के महिला अस्पताल जर्जर परित्यक्त भवन में शिफ्ट करा दिया गया।
सपा सरकार बनने पर वर्ष 2013 में शासन ने यहां पर न केवल 100 बेड वाले जिला महिला अस्पताल के निर्माण को मंजूरी दी, अपितु 20 करोड़ रुपये भी स्वीकृत कर दिए।
विशेषज्ञों की टीम ने अस्पताल निर्माण के लिए नरई बंाध स्थित जिला अस्पताल परिसर और पुराने जिला अस्पताल परिसर का निरीक्षण करने के बाद पुराना जिला अस्पताल परिसर में महिला अस्पताल के लिए चार मंजिला भवन निर्माण को मंजूरी दी थी।
निर्माण के लिए प्रस्तावित भू भाग में पड़ने वाले जिला विकलांग अधिकारी कार्यालय, वाहन गैराज, मरीजों के परिवार वालों के लिए बने टीन शेड का रैन बसेरा,जनरेटर रूम आदि को निर्माण एजेंसी ने जनवरी में ही गिरावा दिया। निर्माण एजेंसी के इस काम से लगा कि महिला अस्पताल का निर्माण अब शीघ्र ही हो जाएगा लेकिन तोड़ फोड़ के बाद काम ठप हो गया।
विज्ञापन
पुराने जिला अस्पताल परिसर में ही प्रस्तावित महिला अस्पताल के लिए शासन ने 20 करोड़ की धनराशि दो साल पूर्व स्वीकृत की। निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को दी गई है। कुछ माह पूर्व छोटेमोटे भवनों को गिराकर काम शुरू करने की कवायद की गई। लेकिन काम में तेजी नहीं आई। स्थिति जस की तस बनी हुई है।
विज्ञापन
वर्ष 2010 में मऊ के दौरे पर आए अखिलेश यादव ने यहां पर जिला महिला अस्पताल खोलने का आश्वासन दिया। इसके बाद महिला अस्पताल के लिए श्रेय लेने के लिए राजनैतिक दलों में होड़ मच गई।
विज्ञापन
मायावती शासन काल में 29 जनवरी 2011 को तत्कालीन बसपा सांसद दारा सिंह चौहान और राज्यसभा सदस्य सालिम अंसारी के संयुक्त प्रयास से 30 बेड के महिला अस्पताल जर्जर परित्यक्त भवन में शिफ्ट करा दिया गया।
सपा सरकार बनने पर वर्ष 2013 में शासन ने यहां पर न केवल 100 बेड वाले जिला महिला अस्पताल के निर्माण को मंजूरी दी, अपितु 20 करोड़ रुपये भी स्वीकृत कर दिए।
विशेषज्ञों की टीम ने अस्पताल निर्माण के लिए नरई बंाध स्थित जिला अस्पताल परिसर और पुराने जिला अस्पताल परिसर का निरीक्षण करने के बाद पुराना जिला अस्पताल परिसर में महिला अस्पताल के लिए चार मंजिला भवन निर्माण को मंजूरी दी थी।
निर्माण के लिए प्रस्तावित भू भाग में पड़ने वाले जिला विकलांग अधिकारी कार्यालय, वाहन गैराज, मरीजों के परिवार वालों के लिए बने टीन शेड का रैन बसेरा,जनरेटर रूम आदि को निर्माण एजेंसी ने जनवरी में ही गिरावा दिया। निर्माण एजेंसी के इस काम से लगा कि महिला अस्पताल का निर्माण अब शीघ्र ही हो जाएगा लेकिन तोड़ फोड़ के बाद काम ठप हो गया।