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राहुल ने चाय की ली चुस्की
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Sun, 11 Sep 2016 11:30 PM IST
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी
- फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने का कोई भी मौका नहीं चूकना चाहते हैं। रविवार को राहुल का काफिला अतरारी चुंगी चौराहे के समीप में एक चाय की दूकान के पास अचानक रुकता है।
राहुल बस से उतरते हैं और सीधे चाय की दूकान में घुस जाते हैं। चाय वाले से पूछते हैं, भइया कैसे हो? परिवार के लोग ठीक हैं? बच्चे स्कूल जाते हैं? चाय वाला जवाब दे रहा होता है कि तभी राहुल सवाल दागते हैं, रोज कितना कमा लेते हो? एक चाय वाला दो साल से देश का प्रधानमंत्री है।
दो साल में आपकी जिंदगी में क्या बदलाव आया? सवालों की झड़ी से चाय बेचने वाले दिनेश चंद मद्धेशिया सिर्फ इतना ही कहते हैं कि चाय बेचकर बड़ी मुश्किल से परिवार का गुजारा हो पा रहा है। गर परिवार में कोई बीमार पड़ गया तो इलाज के लिए कर्ज लेने की नौबत आ जाती है। इतना सुनते ही राहुल कहते हैं, मोदी जी के राज में तो चाय वाला भी दुखी है। कहां गए अच्छे दिन? सभी वादे चुनावी जुमले निकल गए।
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राहुल करीब 15 मिनट इस दूकान पर रहे। चाय की चुस्कियों के बीच एक समोसा और एक पीस जलेबी खाई। उसके बाद पैसे दूकानदार को पैसे दिए और बस में बैठ गए। इसके बाद राहुल का काफिला मऊ शहर की ओर बढ़ जाता है।
भीड़ छंटती है तो मीडिया के कुछ लोग दिनेश की दूकान पर पहुंचते हैं और यह जानने की कोशिश करते हैं कि क्या पहले से यहां राहुल का आना तय था। दिनेश कहते हैं, मुझे तो यह भी नहीं मालूम था कि राहुल मेरे गांव से होते हुए जाएंगे। वे मेरी दूकान पर आए, उनसे मिलकर अच्छा लगा। उन्हें सामने देखकर कुछ देर तक मैं स्तब्ध था। चाय पीने के दौरान ही उन्होंने पूछा, क्या तुम्हारे बैंक खाते में मोदी जी ने 15 लाख रुपये भिजवा दिए?
राहुल बस से उतरते हैं और सीधे चाय की दूकान में घुस जाते हैं। चाय वाले से पूछते हैं, भइया कैसे हो? परिवार के लोग ठीक हैं? बच्चे स्कूल जाते हैं? चाय वाला जवाब दे रहा होता है कि तभी राहुल सवाल दागते हैं, रोज कितना कमा लेते हो? एक चाय वाला दो साल से देश का प्रधानमंत्री है।
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दो साल में आपकी जिंदगी में क्या बदलाव आया? सवालों की झड़ी से चाय बेचने वाले दिनेश चंद मद्धेशिया सिर्फ इतना ही कहते हैं कि चाय बेचकर बड़ी मुश्किल से परिवार का गुजारा हो पा रहा है। गर परिवार में कोई बीमार पड़ गया तो इलाज के लिए कर्ज लेने की नौबत आ जाती है। इतना सुनते ही राहुल कहते हैं, मोदी जी के राज में तो चाय वाला भी दुखी है। कहां गए अच्छे दिन? सभी वादे चुनावी जुमले निकल गए।
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राहुल करीब 15 मिनट इस दूकान पर रहे। चाय की चुस्कियों के बीच एक समोसा और एक पीस जलेबी खाई। उसके बाद पैसे दूकानदार को पैसे दिए और बस में बैठ गए। इसके बाद राहुल का काफिला मऊ शहर की ओर बढ़ जाता है।
भीड़ छंटती है तो मीडिया के कुछ लोग दिनेश की दूकान पर पहुंचते हैं और यह जानने की कोशिश करते हैं कि क्या पहले से यहां राहुल का आना तय था। दिनेश कहते हैं, मुझे तो यह भी नहीं मालूम था कि राहुल मेरे गांव से होते हुए जाएंगे। वे मेरी दूकान पर आए, उनसे मिलकर अच्छा लगा। उन्हें सामने देखकर कुछ देर तक मैं स्तब्ध था। चाय पीने के दौरान ही उन्होंने पूछा, क्या तुम्हारे बैंक खाते में मोदी जी ने 15 लाख रुपये भिजवा दिए?