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Mau News: कागजों पर व्यवस्था, वादों के मलबे में दबा विकास
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नगर के सहादतपुरा स्थित हाइडिल कालोनी में जर्जर भवन।संवाद
- फोटो : 1
मऊ। जिले में सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाई गई आवासीय कॉलोनियां अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। रखरखाव के अभाव में ये भवन इतने जर्जर हो चुके हैं कि किसी भी समय बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। विकास और स्मार्ट सिटी के दावों के बीच नगर की प्रमुख सरकारी कॉलोनियों में रहने वाले कर्मचारी और उनके परिवार हर दिन खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। हमारी की टीम ने बृहस्पतिवार नगर की तीन सरकारी कॉलोनियों जिला अस्पताल, हाइडिल और पावर हाउस कॉलोनियों की पड़ताल की तो हकीकत सामने आई। तीनों कॉलोनियां लगभग 100 बीघे में 50 साल पहले बसाईं गई हैं।
जिला अस्पताल कॉलोनी
पहले गाजीपुर तिराहा स्थित जिला अस्पताल परिसर के अंदर पहुंचने अलग-अलग 16 भवनों में 96 क्वार्टर हैं। यहां रहने वाले स्वास्थ्य कर्मचारी सचिन पांडेय और सतीश कुमार ने बताया कि करीब चार दशक पुरानी कॉलोनी की मरम्मत न होने से वर्तमान में ज्यादातर भवन जर्जर हैं। स्थिति यह है कि कई क्वार्टरों की खिड़कियों के शीशे भी टूटे हुए हैं। इसके साथ ही ओवरहेड टैंक और पाइपलाइन पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। इसके कारण कई जगह पाइप लीकेज होने से गंदा पानी आने की परेशानी होती है। वहीं, कई जगह प्लास्टर तक गिर गया है।
हाइडिल कॉलोनी के 50 घरों में भी बदहाल स्थिति
नगर के सहादतपुरा स्थित बिजली निगम की हाइडिल कॉलोनी में 50 से अधिक भवनों की स्थिति भी जस की तस है। यहां रहने वाले सुनील और मुकेश ने बताया कि कई घर ऐसे हैं, जिनके सामने नाली का गंदा पानी बह रहा है। कॉलोनी का रास्ता जर्जर हो गया है। कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं होता है। ओवरहेड टैंक भी तीन दशक से ज्यादा पुराना हो चुका है। नगर पालिका ईओ डॉ. मणिभूषण तिवारी ने बताया कि पावर हाउस और हाइडिल कॉलोनी में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण किया जाता है। अस्पताल कॉलोनी में अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था होती है।
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जिले की सबसे पुरानी कॉलोनी का दर्जा, फिर भी बदहाली
निजामुद्दीनपुरा स्थित पावर हाउस कॉलोनी में 100 से अधिक भवन हैं, जिनमें ज्यादातर जर्जर स्थिति में हैं। दशकों पहले बने इन सरकारी आवासों की मियाद पूरी हो चुकी है। भवनों की दीवारें दरक चुकी हैं और छतों का प्लास्टर आए दिन टूटकर गिरता है। कई कर्मचारी अपने स्तर से थोड़ी-बहुत मरम्मत कराकर किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर इन आवासों के कायाकल्प के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
छह माह में तीन बार ठप हो चुकी है बिजली आपूर्ति
जिला अस्पताल कॉलोनी न केवल अपनी अव्यवस्थाओं से जूझ रही है, बल्कि भारी-भरकम बिल के चलते यहां रहने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के परिवार कई दिन अंधेरे में रात बिता चुके हैं। कारण, 40 लाख से अधिक बकाया होने पर बीते दिनों ही दो दिन बिजली आपूर्ति यहां ठप हो गई थी।
स्ट्रीट लाइट, लेकिन अधिकांश खराब
जिला अस्पताल कॉलोनी में लगे करीब 10 लोहे के खंभे तीन दशक पुराने होने से जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। यहां मार्ग पर लगी लगभग 10 स्ट्रीट लाइट बेहद दूरी पर लगी हैं। इनमें 7 खराब पड़ी हैं। वहीं, पावर हाउस कॉलोनी और हाइडिल कॉलोनी में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था तो है, लेकिन इनमें आधे से अधिक खराब पड़ी हैं। जिला अस्पताल को छोड़ दें तो दोनों कॉलोनियों में कोई सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल होने के चलते यहां पुलिस बूथ बना हुआ है।
कई बार संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर इस जर्जर स्थिति और रोजमर्रा की समस्याओं से अवगत कराया है। इसके बावजूद अब तक मरम्मत और सफाई के नाम पर सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले हैं। शायद प्रशासन किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार कर रहा है, जिसके कारण नवनिर्माण की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। - अविनाश सिंह सिसोदिया, जिला अस्पताल कॉलोनी
पावरहाउस कॉलोनी जिले की सबसे पुरानी कॉलोनी है। बावजूद यह अपनी बदहाली को लेकर आज खुद मरम्मत की बाट जोह रही है। बारिश के मौसम में लोग दहशत में रहते हैं। आशीष श्रीवास्तव
सरकारी भवनों की लंबे समय से रख रखाव न होने से भवन की हालत दयनीय होती जा रही है। हमेशा हादसा होने का खतरा बना रहता है। शिकायत करने पर अधिकारी आश्वासन देकर मामले को टाल दे रहे हैं। -धीरेंद्र सिंह
बुनियादी सुविधाओं का विस्तार समय-समय पर होता है। जर्जर भवनों की मरम्मत भी आवश्यकतानुसार कराई जाती है। फिलहाल हम अभी आए हैं। जानकारी लेकर व्यवस्थाएं ठीक की जाएंगी। - वीपी सिंह, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम, मऊ
जिला अस्पताल के क्वार्टरों को मरम्मत की जरूरत है। इसको लेकर लगातार कई वर्षों से प्रस्ताव बनाकर बजट के लिए पत्र भेजा जा रहा है। लेकिन बीते 25 साल से इसको लेकर कोई बजट ही स्वीकृत नहीं हुआ है। - डॉ. धनज्जय कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल कॉलोनी
पहले गाजीपुर तिराहा स्थित जिला अस्पताल परिसर के अंदर पहुंचने अलग-अलग 16 भवनों में 96 क्वार्टर हैं। यहां रहने वाले स्वास्थ्य कर्मचारी सचिन पांडेय और सतीश कुमार ने बताया कि करीब चार दशक पुरानी कॉलोनी की मरम्मत न होने से वर्तमान में ज्यादातर भवन जर्जर हैं। स्थिति यह है कि कई क्वार्टरों की खिड़कियों के शीशे भी टूटे हुए हैं। इसके साथ ही ओवरहेड टैंक और पाइपलाइन पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। इसके कारण कई जगह पाइप लीकेज होने से गंदा पानी आने की परेशानी होती है। वहीं, कई जगह प्लास्टर तक गिर गया है।
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हाइडिल कॉलोनी के 50 घरों में भी बदहाल स्थिति
नगर के सहादतपुरा स्थित बिजली निगम की हाइडिल कॉलोनी में 50 से अधिक भवनों की स्थिति भी जस की तस है। यहां रहने वाले सुनील और मुकेश ने बताया कि कई घर ऐसे हैं, जिनके सामने नाली का गंदा पानी बह रहा है। कॉलोनी का रास्ता जर्जर हो गया है। कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं होता है। ओवरहेड टैंक भी तीन दशक से ज्यादा पुराना हो चुका है। नगर पालिका ईओ डॉ. मणिभूषण तिवारी ने बताया कि पावर हाउस और हाइडिल कॉलोनी में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण किया जाता है। अस्पताल कॉलोनी में अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था होती है।
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जिले की सबसे पुरानी कॉलोनी का दर्जा, फिर भी बदहाली
निजामुद्दीनपुरा स्थित पावर हाउस कॉलोनी में 100 से अधिक भवन हैं, जिनमें ज्यादातर जर्जर स्थिति में हैं। दशकों पहले बने इन सरकारी आवासों की मियाद पूरी हो चुकी है। भवनों की दीवारें दरक चुकी हैं और छतों का प्लास्टर आए दिन टूटकर गिरता है। कई कर्मचारी अपने स्तर से थोड़ी-बहुत मरम्मत कराकर किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर इन आवासों के कायाकल्प के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
छह माह में तीन बार ठप हो चुकी है बिजली आपूर्ति
जिला अस्पताल कॉलोनी न केवल अपनी अव्यवस्थाओं से जूझ रही है, बल्कि भारी-भरकम बिल के चलते यहां रहने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के परिवार कई दिन अंधेरे में रात बिता चुके हैं। कारण, 40 लाख से अधिक बकाया होने पर बीते दिनों ही दो दिन बिजली आपूर्ति यहां ठप हो गई थी।
स्ट्रीट लाइट, लेकिन अधिकांश खराब
जिला अस्पताल कॉलोनी में लगे करीब 10 लोहे के खंभे तीन दशक पुराने होने से जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। यहां मार्ग पर लगी लगभग 10 स्ट्रीट लाइट बेहद दूरी पर लगी हैं। इनमें 7 खराब पड़ी हैं। वहीं, पावर हाउस कॉलोनी और हाइडिल कॉलोनी में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था तो है, लेकिन इनमें आधे से अधिक खराब पड़ी हैं। जिला अस्पताल को छोड़ दें तो दोनों कॉलोनियों में कोई सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल होने के चलते यहां पुलिस बूथ बना हुआ है।
कई बार संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर इस जर्जर स्थिति और रोजमर्रा की समस्याओं से अवगत कराया है। इसके बावजूद अब तक मरम्मत और सफाई के नाम पर सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले हैं। शायद प्रशासन किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार कर रहा है, जिसके कारण नवनिर्माण की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। - अविनाश सिंह सिसोदिया, जिला अस्पताल कॉलोनी
पावरहाउस कॉलोनी जिले की सबसे पुरानी कॉलोनी है। बावजूद यह अपनी बदहाली को लेकर आज खुद मरम्मत की बाट जोह रही है। बारिश के मौसम में लोग दहशत में रहते हैं। आशीष श्रीवास्तव
सरकारी भवनों की लंबे समय से रख रखाव न होने से भवन की हालत दयनीय होती जा रही है। हमेशा हादसा होने का खतरा बना रहता है। शिकायत करने पर अधिकारी आश्वासन देकर मामले को टाल दे रहे हैं। -धीरेंद्र सिंह
बुनियादी सुविधाओं का विस्तार समय-समय पर होता है। जर्जर भवनों की मरम्मत भी आवश्यकतानुसार कराई जाती है। फिलहाल हम अभी आए हैं। जानकारी लेकर व्यवस्थाएं ठीक की जाएंगी। - वीपी सिंह, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम, मऊ
जिला अस्पताल के क्वार्टरों को मरम्मत की जरूरत है। इसको लेकर लगातार कई वर्षों से प्रस्ताव बनाकर बजट के लिए पत्र भेजा जा रहा है। लेकिन बीते 25 साल से इसको लेकर कोई बजट ही स्वीकृत नहीं हुआ है। - डॉ. धनज्जय कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल