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छात्रों और अभिभावकों ने जाम कर दी सड़क
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Thu, 24 Sep 2015 12:05 AM IST
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अधिक फीस व अंकपत्र के नाम पर जबरदस्ती पैसा मांगने पर बुधवार को दुबारी
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में छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा और वे दुबारी गजियापुर मार्ग
चक्काजाम कर दिए।
इससे विद्यालय प्रबंध तंत्र के हाथ पांव फूलने लगे। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी ने पूरे मामले की जांच का आश्वासन देकर लोगों से जाम समाप्त कराया।
इस दौरान अभिभावकों ने प्रबंधन पर यह भी आरोप लगाया कि स्कूल में बच्चों ईंट, बालू, गिट्टी आदि की ढुलाई से लेकर हर काम कराया जाता है।
चक्काजाम की वजह से लगभग तीन घंटे से अधिक समय तक आवागमन पूरी तरह ठप रहा। घंटों जाम लगने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं।
इससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
तहसील मधुबन अंतर्गत दुबारी में राजकीय शिक्षा संस्थान उच्च माध्यमिक विद्यालय है।
इस स्कूल के छात्रों व उनके अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रबंधन एडमिशन फीस के नाम पर 500 रुपये व अंकपत्र के नाम पर 250 रुपये मांग रहा है। बुधवार की सुबह स्कूल प्रार्थना के बाद विद्यालय प्रबंधन ने उन बच्चों को स्कूल के बाहर कर गेट बंद कर दिया जिन्होंने विद्यालय द्वारा निर्धारित फीस व अंकपत्र शुल्क जमा नहीं किया था।
बच्चे घंटों धूप में खड़े रहे जिन्हें देख लोगों ने कारण जाना तो उन्हें यह नागवार लगा इसी बीच इसकी सूचना अभिभावकों को मिली तो वे अपने बच्चों को धूप में खड़ा देख अपना आपा खो बैठे वहीं छात्र घरवालों को देखकर रोने लगे।
इस बात से गुस्साए अभिभावक अपने बच्चों के साथ दुबारी गजियापुर मार्ग पर पहुंचे और चक्काजाम कर दिया। इसकी सूचना पाकर मौके पर एसएसआई विश्वजीत सिंह पहुंचे और अभिभावकों को समझाने का प्रयास किए लेकिन अभिभावक किसी जिम्मेदार अधिकारी को बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
पूर्वाह्न 11.30 बजे उपजिलाधिकारी दया शंकर पांडेय मौके पर पहुंचे तो लोगों ने बताया की स्कूल के बच्चों से विद्यालय में ईंट बालू गिट्टी आदि ढुलाई से लेकर हर काम लिया जाता है जो बालश्रम कानून के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आता है इसके अलावा गरीब बच्चों से एडमिशन और कक्षा छह से सात व सात से आठ में गए बच्चों से 250 रुपये वसूले जा रहे हैं।
पीड़ितों के आरोपों को सुनकर शिक्षा विभाग ने जांच कराने का आश्वासन दिया तब जाकर जाम हट सका।
जबकि अभिषेक सिंह सिकंदर चौरसिया दीपक मौर्य सहित दर्जनों लोगों ने जांच शिक्षा विभाग के अलावा किसी अन्य अधिकारी से जांच की मांग की।
वहीं स्कूल के प्रबंधक मुसाफिर यादव का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है प्रधानाचार्य और शिक्षकों से बात कर इसकी जांच कराई जाएगी।
इससे विद्यालय प्रबंध तंत्र के हाथ पांव फूलने लगे। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी ने पूरे मामले की जांच का आश्वासन देकर लोगों से जाम समाप्त कराया।
इस दौरान अभिभावकों ने प्रबंधन पर यह भी आरोप लगाया कि स्कूल में बच्चों ईंट, बालू, गिट्टी आदि की ढुलाई से लेकर हर काम कराया जाता है।
चक्काजाम की वजह से लगभग तीन घंटे से अधिक समय तक आवागमन पूरी तरह ठप रहा। घंटों जाम लगने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं।
इससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
तहसील मधुबन अंतर्गत दुबारी में राजकीय शिक्षा संस्थान उच्च माध्यमिक विद्यालय है।
इस स्कूल के छात्रों व उनके अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रबंधन एडमिशन फीस के नाम पर 500 रुपये व अंकपत्र के नाम पर 250 रुपये मांग रहा है। बुधवार की सुबह स्कूल प्रार्थना के बाद विद्यालय प्रबंधन ने उन बच्चों को स्कूल के बाहर कर गेट बंद कर दिया जिन्होंने विद्यालय द्वारा निर्धारित फीस व अंकपत्र शुल्क जमा नहीं किया था।
बच्चे घंटों धूप में खड़े रहे जिन्हें देख लोगों ने कारण जाना तो उन्हें यह नागवार लगा इसी बीच इसकी सूचना अभिभावकों को मिली तो वे अपने बच्चों को धूप में खड़ा देख अपना आपा खो बैठे वहीं छात्र घरवालों को देखकर रोने लगे।
इस बात से गुस्साए अभिभावक अपने बच्चों के साथ दुबारी गजियापुर मार्ग पर पहुंचे और चक्काजाम कर दिया। इसकी सूचना पाकर मौके पर एसएसआई विश्वजीत सिंह पहुंचे और अभिभावकों को समझाने का प्रयास किए लेकिन अभिभावक किसी जिम्मेदार अधिकारी को बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
पूर्वाह्न 11.30 बजे उपजिलाधिकारी दया शंकर पांडेय मौके पर पहुंचे तो लोगों ने बताया की स्कूल के बच्चों से विद्यालय में ईंट बालू गिट्टी आदि ढुलाई से लेकर हर काम लिया जाता है जो बालश्रम कानून के अंतर्गत अपराध की श्रेणी में आता है इसके अलावा गरीब बच्चों से एडमिशन और कक्षा छह से सात व सात से आठ में गए बच्चों से 250 रुपये वसूले जा रहे हैं।
पीड़ितों के आरोपों को सुनकर शिक्षा विभाग ने जांच कराने का आश्वासन दिया तब जाकर जाम हट सका।
जबकि अभिषेक सिंह सिकंदर चौरसिया दीपक मौर्य सहित दर्जनों लोगों ने जांच शिक्षा विभाग के अलावा किसी अन्य अधिकारी से जांच की मांग की।
वहीं स्कूल के प्रबंधक मुसाफिर यादव का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है प्रधानाचार्य और शिक्षकों से बात कर इसकी जांच कराई जाएगी।